1मतलब
Finance Commission यानी वित्त आयोग। संविधान के अनुच्छेद 280 के मुताबिक राष्ट्रपति हर पाँचवें साल की समाप्ति पर, या ज़रूरत हो तो पहले, वित्त आयोग बनाते हैं, जो केंद्र-राज्य के बीच करों के बँटवारे पर सिफ़ारिश करता है।[1]
2बँटवारा कैसे होता है
अनुच्छेद 280(3) के मुताबिक आयोग केंद्र और राज्यों के बीच करों की net proceeds के बँटवारे, राज्यों के बीच हिस्सों, और Consolidated Fund से राज्यों को grants-in-aid के सिद्धांतों पर राष्ट्रपति को सिफ़ारिश करता है।
3आम ग़लतफ़हमी
4परीक्षा के लिए
5सवाल-जवाब
6जुड़े शब्द
7स्रोत
- भारत का संविधान, भाग XII, अनुच्छेद 280 (विदेश मंत्रालय पर भारत सरकार की प्रति) (17 अक्टूबर 2026 को पढ़ा) ↗किस बात के लिए, दस्तावेज़ का कौन-सा हिस्सा
- अनुच्छेद 280(1), (3)(a)–(d)हर पाँचवें साल; अध्यक्ष + चार सदस्य; करों का बँटवारा; grants-in-aid; पंचायत / नगरपालिका; दूसरे मामले
- वित्त मंत्रालय — Explanatory Memorandum on Action Taken on the Recommendations of the Sixteenth Finance Commission, 01.02.2026 (17 अक्टूबर 2026 को पढ़ा) ↗किस बात के लिए, दस्तावेज़ का कौन-सा हिस्सा
- पैरा 1–3report 17.11.2025; 2026-27 से 2030-31; राज्यों का हिस्सा 41%
- Sixteenth Finance Commission — Report, Vol. I (पैरा 1.2, 1.3) (17 अक्टूबर 2026 को पढ़ा) ↗किस बात के लिए, दस्तावेज़ का कौन-सा हिस्सा
- पैरा 1.2, 1.3S.O. 5533(E) 31.12.2023; अध्यक्ष डॉ. अरविंद पनगढ़िया
8सुधार का इतिहास
- पन्ना बना। संविधान के अनुच्छेद 280, 16वें वित्त आयोग की report और वित्त मंत्रालय के 1 फ़रवरी 2026 के Explanatory Memorandum से जाँचा।
पन्ना बना: 17 अक्तू 2026 · आख़िरी जाँच: 17 अक्तू 2026
यह सामान्य जानकारी है, कानूनी या वित्तीय सलाह नहीं।
यह पन्ना: https://seedhamatlab.com/shabdkosh/finance-commission/ · आख़िरी जाँच: 17 अक्तू 2026
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