स्रोत नीति
हर पोस्ट के नीचे आधिकारिक स्रोत का लिंक क्यों रहता है, कौन से स्रोत इस्तेमाल होते हैं, और गलती होने पर क्या किया जाता है।
बुनियादी नियम
हर पोस्ट के नीचे कम से कम एक आधिकारिक स्रोत का लिंक रहेगा। अगर किसी बात का स्रोत नहीं मिलता, तो वह बात यहाँ नहीं लिखी जाती — चाहे वह कितनी भी सही लगती हो।
यही इस डेस्क की पूरी बात है। आपको हम पर भरोसा करने की ज़रूरत नहीं — लिंक खोलिए और खुद देख लीजिए।
कौन से स्रोत
पहली पसंद हमेशा मूल दस्तावेज़ होता है — सर्कुलर, अधिसूचना, मास्टर डायरेक्शन, या विभाग का अपना पोर्टल:
- RBI — बैंकिंग नियम, ग्राहक संरक्षण, शिकायत व्यवस्था
- IRDAI — बीमा से जुड़े नियम
- EPFO — PF, पेंशन, नामांकन
- I4C / cybercrime.gov.in — साइबर अपराध और हेल्पलाइन 1930
- राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन (1915) और e-Jagriti — उपभोक्ता शिकायत और आयोग में दाखिला
- संसद, मंत्रालय और न्यायालय के दस्तावेज़, जहाँ लागू हों
समाचार रिपोर्ट को स्रोत नहीं माना जाता। अगर कोई खबर किसी नियम की बात करती है, तो हम उस नियम का मूल दस्तावेज़ ढूँढते हैं और उसी को लिंक करते हैं।
क्या यहाँ कभी नहीं आएगा
- किसी बैंक, कंपनी या संस्था की अंदरूनी या गोपनीय जानकारी
- किसी व्यक्ति या ग्राहक से जुड़ी कोई जानकारी
- अफ़वाह, "सुना है", या फ़ॉरवर्ड मैसेज — बिना मूल दस्तावेज़ के
- कोई विज्ञापन, प्रायोजित सामग्री या रेफरल लिंक
नियम बदलते रहते हैं
हर पोस्ट पर तारीख़ दर्ज है। नियम उसके बाद बदल सकता है — इसलिए अपने मामले में हमेशा स्रोत वाला लिंक खोलकर ताज़ा स्थिति देख लीजिए। यहाँ जो है वह सामान्य जानकारी है, कानूनी या वित्तीय सलाह नहीं।
गलती हो जाए तो
गलती हो सकती है। अगर कोई तथ्य गलत मिले, तो:
- सुधार उसी पोस्ट में किया जाएगा, चुपचाप हटाया नहीं जाएगा
- अगर बात का मतलब ही बदल जाता हो, तो पोस्ट में साफ़ लिखा जाएगा कि क्या सुधरा
- बताने के लिए X पर @seedhamatlab को सार्वजनिक reply दें; निजी जानकारी साझा न करें
भरोसा इसी से बनता है कि गलती मानी जाए, छुपाई न जाए।