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शब्द · पैसे की बुनियाद✓ स्रोत से जाँचा · 18 Oct 2026

Multidimensional Poverty Index

Multidimensional Poverty Index (MPI) · बहुआयामी ग़रीबी सूचकांक

एक लाइन में

Multidimensional Poverty Index (MPI) ग़रीबी को सिर्फ़ आमदनी से नहीं, बल्कि कई कमियों से नापता है — जैसे पोषण, पढ़ाई, साफ़ पानी, बिजली, पक्का घर, bank खाता। NITI Aayog का National MPI 12 संकेतकों (indicators) पर बना है। NITI Aayog के अनुमान के मुताबिक भारत में बहुआयामी ग़रीबी 2013-14 के 29.17% से घटकर 2022-23 में 11.28% रही।

संकेतक12 (National MPI)Global MPI में 10
2013-14 (अनुमानित)29.17%NITI Aayog
2022-23 (अनुमानित)11.28%
बाहर निकलेलगभग 24.82 करोड़ लोग9 साल में

मतलब

NITI Aayog के discussion paper के मुताबिक National Multidimensional Poverty Index, Alkire-Foster पद्धति पर 12 संकेतकों से बना है (Global MPI में 10)। इसके अनुमान के मुताबिक भारत में बहुआयामी ग़रीबी 2013-14 के 29.17% से घटकर 2022-23 में 11.28% रही, और लगभग 24.82 करोड़ लोग इससे बाहर निकले; ये दोनों आँकड़े रुझान से निकाले गए अनुमान (projected) हैं।[1]

तीन क्षेत्र

NITI Aayog के मुताबिक Global MPI तीन क्षेत्रों — स्वास्थ्य, शिक्षा और जीवन स्तर — के 10 संकेतकों पर है; National MPI में 12 संकेतक हैं (इनमें maternal health और bank account भी)।

रोज़ की ज़िंदगी का उदाहरण

उदाहरण (समझाने के लिए): दो परिवारों की आमदनी बराबर है। पहले परिवार के घर में बिजली, साफ़ पानी, शौचालय है और बच्चे school जाते हैं; दूसरे के घर में इनमें से कई चीज़ें नहीं हैं और बच्चा कुपोषित है। सिर्फ़ आमदनी देखें तो दोनों बराबर लगेंगे, पर MPI बताएगा कि दूसरा परिवार कई तरह से वंचित (deprived) है। यही 'बहुआयामी' का मतलब है।

आम ग़लतफ़हमी

✕ ग़लतफ़हमी"ग़रीबी सिर्फ़ आमदनी से नापी जाती है।"
✓ सचनहीं। NITI Aayog के मुताबिक आमदनी ज़रूरी है पर काफ़ी नहीं; MPI पोषण, शिक्षा, पानी, बिजली जैसी कई कमियों को साथ नापता है।[1]

परीक्षा के लिए

याद रखने लायक़: National MPI: 12 संकेतक; 2013-14 में 29.17% → 2022-23 में 11.28% (अनुमानित); लगभग 24.82 करोड़ लोग बाहर। इस तरह के बाक़ी शब्द परीक्षा के लिए पन्ने पर हैं।[1]

सवाल-जवाब

29.17% और 11.28% पक्के आँकड़े हैं?NITI Aayog ने इन्हें NFHS सर्वे के बीच के रुझान से निकाला अनुमान (projected) बताया है।[1]
किस राज्य में सबसे ज़्यादा लोग बाहर निकले?NITI Aayog के मुताबिक उत्तर प्रदेश (5.94 करोड़), फिर बिहार (3.77 करोड़) और मध्य प्रदेश (2.30 करोड़)।[1]

जुड़े शब्द

स्रोत

  1. NITI Aayog — Discussion Paper: Multidimensional Poverty in India since 2005-06 (दस्तावेज़ पर तारीख़ नहीं; NITI की site पर 2024-01 फ़ोल्डर में) (18 अक्टूबर 2026 को पढ़ा) ↗किस बात के लिए, दस्तावेज़ का कौन-सा हिस्सा
    • Abstract (पन्ना 1)National MPI में 12, Global MPI में 10 संकेतक; 29.17% (2013-14) से 11.28% (2022-23); लगभग 24.82 करोड़ लोग बाहर; UP 5.94, बिहार 3.77, MP 2.30 करोड़
    • Introduction (पन्ना 2), पन्ना 4आमदनी वाले माप की सीमाएँ; Global MPI के 3 क्षेत्र; 2013-14 और 2022-23 के आँकड़े रुझान से निकाले अनुमान

सुधार का इतिहास

  • पन्ना बना। NITI Aayog के discussion paper 'Multidimensional Poverty in India since 2005-06' से जाँचा।

पन्ना बना: 18 अक्तू 2026 · आख़िरी जाँच: 18 अक्तू 2026
यह सामान्य जानकारी है, कानूनी या वित्तीय सलाह नहीं।

यह पन्ना: https://seedhamatlab.com/shabdkosh/multidimensional-poverty/ · आख़िरी जाँच: 18 अक्तू 2026
छपी हुई प्रति पुरानी हो सकती है। ताज़ा पन्ना site पर देख लीजिए।