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शब्द · पैसे की बुनियाद✓ स्रोत से जाँचा · 24 Oct 2026

Poverty Line (ग़रीबी रेखा)

ग़रीबी रेखा · प्रति व्यक्ति प्रति महीने उपभोग ख़र्च (MPCE) की सीमा

एक लाइन में

Poverty Line (ग़रीबी रेखा) प्रति व्यक्ति हर महीने के उपभोग ख़र्च की वह सीमा है, जिससे कम ख़र्च वाले लोग ग़रीबी रेखा से नीचे गिने जाते हैं। Planning Commission की 22 जुलाई 2013 की press note के मुताबिक 2011-12 में Tendulkar तरीक़े से यह गाँवों में ₹816 और शहरों में ₹1,000 प्रति व्यक्ति प्रति महीना थी, और देश की 21.9% आबादी इससे नीचे थी।

गाँव, 2011-12₹816प्रति व्यक्ति प्रति महीना
शहर, 2011-12₹1,000प्रति व्यक्ति प्रति महीना
Poverty ratio, 2011-1221.9%गाँव 25.7%, शहर 13.7%
रेखा से नीचेलगभग 27 करोड़ लोग2004-05 में लगभग 40.7 करोड़

मतलब

Planning Commission की 22 जुलाई 2013 की press note के मुताबिक all India poverty line प्रति व्यक्ति प्रति महीने का वह ख़र्च है, जो all India poverty ratio से मेल खाता है; यह Monthly Per Capita Consumption Expenditure (MPCE) में बताई जाती है।[1]

2011-12 के लिए Tendulkar तरीक़े से national poverty line गाँवों में ₹816 और शहरों में ₹1,000 प्रति व्यक्ति प्रति महीना आँकी गई। इसके मुताबिक 2011-12 में गाँवों की 25.7%, शहरों की 13.7% और पूरे देश की 21.9% आबादी ग़रीबी रेखा से नीचे थी (पैरा 7, 9)।[1]

Poverty line कैसे लगती है

Press note के मुताबिक poverty line राज्य-दर-राज्य अलग होती है, क्योंकि राज्यों में दाम अलग हैं (पैरा 7); हर राज्य की लाइन press note की Table 1 में है।

रोज़ की ज़िंदगी का उदाहरण

उदाहरण (समझाने के लिए): मान लीजिए गाँव के एक घर में 5 लोग हैं और पूरे घर का महीने का ख़र्च (खाना, कपड़ा, किराया, आना-जाना आदि) ₹3,500 है। तो प्रति व्यक्ति ख़र्च हुआ ₹3,500 ÷ 5 = ₹700। 2011-12 की ग्रामीण all India लाइन ₹816 थी, इसलिए इस हिसाब से यह घर ग़रीबी रेखा से नीचे गिना जाता। (आँकड़े सिर्फ़ समझाने के लिए हैं; असल में हर राज्य की अपनी लाइन है।)

आम ग़लतफ़हमी

✕ ग़लतफ़हमी"₹816 पूरे परिवार की महीने की सीमा है।"
✓ सचनहीं। ₹816 (गाँव) और ₹1,000 (शहर) प्रति व्यक्ति प्रति महीना है। Press note के मुताबिक पाँच लोगों के परिवार के लिए यह लगभग ₹4,080 (गाँव) और ₹5,000 (शहर) प्रति महीना बनती है।[1]
✕ ग़लतफ़हमी"पूरे देश में एक ही poverty line है।"
✓ सचनहीं। ₹816 / ₹1,000 all India लाइन है; राज्यों की लाइनें अलग हैं। जैसे Table 1 में 2011-12 की ग्रामीण लाइन Odisha में ₹695 और Nagaland में ₹1,270 है।[1]
✕ ग़लतफ़हमी"Poverty line और Multidimensional Poverty Index एक ही चीज़ हैं।"
✓ सचनहीं। यह poverty line उपभोग ख़र्च (MPCE) पर बनी है।[1] NITI Aayog का Multidimensional Poverty Index ग़रीबी को पोषण, पढ़ाई, बिजली, पक्का घर जैसी कई कमियों से नापता है; उसकी बात उसके अपने पन्ने पर है।

परीक्षा के लिए

याद रखने लायक़: 2011-12 (Tendulkar, MRP): गाँव ₹816, शहर ₹1,000 प्रति व्यक्ति प्रति महीना; poverty ratio 25.7% / 13.7% / 21.9%; Press Note 22.07.2013 (Planning Commission); Rangarajan report (30.06.2014): ₹972 / ₹1,407। इस तरह के बाक़ी शब्द परीक्षा के लिए पन्ने पर हैं।[1][2]

सवाल-जवाब

Poverty line कैसे तय हुई?Press note के मुताबिक NSSO लगभग 1.20 लाख घरों का उपभोग ख़र्च दर्ज करता है; घर के ख़र्च को सदस्यों से भाग देकर Monthly Per Capita Consumption Expenditure (MPCE) निकलता है। Tendulkar तरीक़े में poverty line Mixed Reference Period (MRP) वाले MPCE में बताई जाती है (पैरा 6)।[1]
Tendulkar Committee कब बनी?Planning Commission ने दिसंबर 2005 में Prof. Suresh D. Tendulkar की अध्यक्षता में Expert Group बनाया; उसने दिसंबर 2009 में report दी (पैरा 2)।[1]
2004-05 से 2011-12 तक ग़रीबी कितनी घटी?Press note के मुताबिक poverty ratio 2004-05 के 37.2% से घटकर 2011-12 में 21.9% रहा; रेखा से नीचे के लोग 407 million से घटकर 270 million रहे (पैरा 9)। सालाना औसत गिरावट 1993-94 से 2004-05 में 0.74 और 2004-05 से 2011-12 में 2.18 percentage points रही (पैरा 10)।[1]
Rangarajan Committee क्या है?Press note के मुताबिक Tendulkar line को बहुत कम बताने वाले कई representations आने पर Planning Commission ने जून 2012 में Dr. C. Rangarajan की अध्यक्षता में Expert Group बनाया (पैरा 3)।[1] PIB की 7 अगस्त 2014 की release के मुताबिक इस Group ने 30 जून 2014 को report दी, जिसमें 2011-12 की poverty line गाँवों में ₹972 और शहरों में ₹1,407 प्रति व्यक्ति प्रति महीना आँकी गई।[2]

जुड़े शब्द

स्रोत

  1. Planning Commission — Press Note on Poverty Estimates, 2011-12 (PIB, New Delhi: 22 July, 2013; NITI Aayog की site पर) (24 अक्टूबर 2026 को पढ़ा) ↗जारी: 22 जुल 2013किस बात के लिए, दस्तावेज़ का कौन-सा हिस्सा
    • पैरा 2, 3Tendulkar Expert Group: दिसंबर 2005 में बना, दिसंबर 2009 में report; Rangarajan Group जून 2012 में
    • पैरा 5, 6all India line, poverty ratio से; NSSO के लगभग 1.20 लाख घर; MPCE, MRP
    • पैरा 7"Rs. 816 per capita per month" गाँव, Rs. 1,000 शहर; पाँच के परिवार ~Rs. 4,080 / 5,000; राज्यवार अलग
    • पैरा 9, 102011-12: 25.7% / 13.7% / 21.9%; 270 million (2004-05: 407 million); गिरावट 0.74 और 2.18 points/साल
    • Table 1राज्यवार लाइनें: Odisha ग्रामीण ₹695, Nagaland ग्रामीण ₹1,270
  2. PIB (Planning Commission) — Rangarajan Report on Poverty, 07 अगस्त 2014 (24 अक्टूबर 2026 को पढ़ा) ↗जारी: 07 अग 2014किस बात के लिए, दस्तावेज़ का कौन-सा हिस्सा
    • पहला पैराExpert Group (Rangarajan) ने 30 जून 2014 को report दी; Rajya Sabha में लिखित जवाब
    • पैरा 2 (vi)2011-12 की नई line: ग्रामीण Rs.972, शहरी Rs.1,407 प्रति व्यक्ति प्रति महीना

सुधार का इतिहास

  • पन्ना बना। Planning Commission की Press Note on Poverty Estimates, 2011-12 (22 जुलाई 2013, NITI Aayog की site पर) और Rangarajan Report पर PIB की 7 अगस्त 2014 की release से जाँचा।

पन्ना बना: 24 अक्तू 2026 · आख़िरी जाँच: 24 अक्तू 2026
यह सामान्य जानकारी है, कानूनी या वित्तीय सलाह नहीं।

यह पन्ना: https://seedhamatlab.com/shabdkosh/poverty-line/ · आख़िरी जाँच: 24 अक्तू 2026
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