Open Market Operations · RBI का सरकारी securities ख़रीदना या बेचना, ताकि लंबे समय के लिए पैसा डाले या खींचे
एक लाइन में
OMO (Open Market Operations) में RBI बाज़ार से सरकारी securities ख़रीदता या उन्हें बेचता है। ख़रीदने पर bank व्यवस्था में लंबे समय (durable) के लिए पैसा आता है, और बेचने पर पैसा बाहर खिंचता है।
OMO यानी Open Market Operations। RBI के मुताबिक इसमें RBI सरकारी securities ख़रीदता या बेचता है, ताकि bank व्यवस्था में टिकाऊ (durable) liquidity डाले या खींचे।[1]
2इसका मतलब आपके लिए क्या है
Bank व्यवस्था का पैसा: OMO से bank व्यवस्था की टिकाऊ liquidity बढ़ या घट सकती है।[1]
3OMO कैसे काम करता है
RBIसरकारी securities
ख़रीदा→पैसा अंदर
बाज़ार / bankख़रीद या बिक्री
बेचा→पैसा बाहर
Bank व्यवस्था में पैसाबढ़ता या घटता
RBI के मुताबिक OMO से durable (टिकाऊ) liquidity डाली या खींची जाती है, जबकि छोटी अवधि की ज़रूरत LAF से संभाली जाती है।
4आम ग़लतफ़हमी
✕ ग़लतफ़हमी"OMO का मतलब शेयर बाज़ार में शेयर ख़रीदना है।"
✓ सचनहीं। RBI के मुताबिक OMO में सरकारी securities की outright ख़रीद-बिक्री होती है।[1]
5परीक्षा के लिए
याद रखने लायक़: OMO = सरकारी securities की outright ख़रीद-बिक्री; durable liquidity; ख़रीद = injection, बिक्री = absorption। इस तरह के बाक़ी शब्द परीक्षा के लिए पन्ने पर हैं।[1]
6सवाल-जवाब
OMO आसान भाषा में क्या है?RBI जब बाज़ार से सरकारी bond (securities) ख़रीदता है, तो बेचने वालों को पैसा देता है, यानी व्यवस्था में पैसा आता है। जब बेचता है, तो ख़रीदार RBI को पैसा देते हैं, यानी पैसा व्यवस्था से बाहर जाता है।[1]
OMO और LAF में फ़र्क़?RBI के मुताबिक LAF मुख्य रूप से छोटी अवधि की liquidity के लिए है, और OMO durable liquidity डालने या खींचने के लिए। दोनों RBI के liquidity संभालने के औज़ार हैं।[1]