1मतलब
Repo Rate वह ब्याज दर है, जिस पर RBI liquidity adjustment facility (LAF) में सरकारी और दूसरी मंज़ूर securities के बदले liquidity देता है।[1]
RBI Act, 1934 में "Policy Rate" का मतलब है: धारा 17(12AB) के repo लेन-देन की दर। उसी धारा के मुताबिक "repo" पैसे उधार लेने का वह तरीक़ा है, जिसमें securities बेची जाती हैं, इस समझौते के साथ कि उन्हें आगे की तय तारीख़ पर, तय कीमत पर वापस ख़रीदा जाएगा; उस कीमत में उधार ली गई रकम का ब्याज शामिल होता है।[3]
2अभी Repo Rate कितना है
- 7 अक्टूबर 2026 को: 5.50%। Monetary Policy Committee (MPC) ने 5 से 7 अक्टूबर 2026 की बैठक में सर्वसम्मति से policy repo rate 25 basis points बढ़ाया।[2]
- साथ की दरें: SDF rate 5.25%; MSF rate और Bank Rate 5.75%।[2]
- Stance: MPC ने stance बदलकर "calibrated tightening" किया। Resolution के मुताबिक इसका संकेत सिर्फ़ इतना है कि मौजूदा हालात में निकट भविष्य में दर घटाने की गुंजाइश नहीं है, और आगे का क़दम दर बढ़ाना या रोकना ही हो सकता है, बदलते हालात और outlook के मुताबिक।[2]
- ताज़ा दर कहाँ देखें: RBI की website के home page पर "Current Rates" में।[1]
3Repo Rate कौन और कैसे तय करता है
यह दर 7 अक्टूबर 2026 की है। ताज़ा दर RBI की website के home page पर "Current Rates" में देखिए।
- Inflation target: RBI Act की धारा 45ZA के मुताबिक केंद्र सरकार, RBI से सलाह करके, हर पाँच साल में Consumer Price Index के आधार पर inflation target तय करती है।[3] अभी यह 4 प्रतिशत है, ऊपरी सीमा 6 प्रतिशत और निचली सीमा 2 प्रतिशत के साथ; यह 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक के लिए है।[1]
- MPC: छह सदस्यों की committee: RBI के Governor (अध्यक्ष), monetary policy के प्रभारी Deputy Governor, RBI का एक अधिकारी, और केंद्र सरकार के नियुक्त किए हुए तीन सदस्य।[3]
- MPC का काम: वह Policy Rate तय करना, जो inflation target पाने के लिए ज़रूरी हो। MPC का फ़ैसला RBI पर बाध्यकारी है।[3]
- बैठकें और vote: MPC को साल में कम से कम चार बार मिलना है। Quorum चार सदस्यों का है। हर सदस्य का एक vote होता है; votes बराबर हों, तो Governor का दूसरा (casting) vote होता है।[1]
- जानकारी सार्वजनिक: हर बैठक के बाद resolution प्रकाशित होता है, और 14वें दिन बैठक के minutes।[1]
4बाक़ी दरें Repo Rate से कैसे जुड़ी हैं
- SDF rate: policy repo rate से 25 basis points नीचे रखा जाता है। यह LAF corridor की निचली सीमा (floor) है।[1]
- MSF rate: policy repo rate से 25 basis points ऊपर रखा जाता है। यह corridor की ऊपरी सीमा (ceiling) है।[1]
- Bank Rate: इसे MSF rate से जोड़ा गया है; MSF rate बदलता है, तो यह अपने-आप बदल जाता है।[1]
5इसका मतलब आपके लिए क्या है
- Floating दर वाले retail loan: commercial banks के सभी floating rate personal या retail loans (housing, auto वग़ैरह), और MSME को दिए गए floating rate loans, किसी External Benchmark Rate से जुड़े होने चाहिए।[4]
- External benchmark क्या हो सकता है: RBI का policy Repo Rate; भारत सरकार के तीन महीने और छह महीने के Treasury Bill की yield, जो FBIL प्रकाशित करता है; या FBIL का प्रकाशित कोई और benchmark market interest rate।[4]
- हर loan Repo Rate से नहीं जुड़ा: आपका loan किस benchmark से जुड़ा है, यह loan contract की शर्तों में लिखा होता है। Bank एक loan category में एक ही external benchmark रख सकता है।[4]
- आपकी दर कैसे बनती है: benchmark में bank का spread जोड़कर।[4]
- दर कब बदलती है: external benchmark वाले loan की ब्याज दर कम से कम तीन महीने में एक बार reset होनी चाहिए। आपके loan का benchmark Repo Rate हो, तो Repo Rate बदलने के बाद आपकी दर अगले reset पर बदलती है।[4]
- Spread: bank spread ख़ुद तय करता है। पर credit risk premium तभी बदल सकता है, जब आपके credit assessment में बड़ा बदलाव आए, जैसा loan contract में तय हो। Spread के बाक़ी हिस्से तीन साल में एक बार बदले जा सकते हैं; ग्राहक को बनाए रखने के लिए bank इन्हें तीन साल से पहले घटा सकता है।[4]
- Fixed और floating: fixed rate loan की ब्याज दर पूरी अवधि के लिए तय रहती है; floating rate loan की दर अवधि के दौरान तय नहीं रहती। Bank हर तरह का advance fixed या floating दर पर दे सकता है।[4]
- किन banks पर: loan वाले ये नियम RBI के commercial banks के लिए बने निर्देशों के हैं।[4]
6पुराना loan MCLR या Base Rate पर हो
- जारी रह सकता है: MCLR, Base Rate या BPLR से जुड़े मौजूदा loan चुकाए जाने या renewal तक वैसे ही चल सकते हैं।[4]
- बिना charge के बदलाव: जिन borrowers को floating rate term loan बिना pre-payment charge के पहले चुकाने की छूट है, वे बिना किसी charge या fee के external benchmark पर जा सकते हैं; सिर्फ़ वाजिब administrative या legal ख़र्च लग सकता है।[4]
- बाक़ी borrowers: आपसी सहमति की शर्तों पर external benchmark पर जा सकते हैं।[4]
- Foreclosure नहीं: यह बदलाव मौजूदा loan का foreclosure नहीं माना जाता।[4]
7आम ग़लतफ़हमी
8आपका अधिकार
- Benchmark contract में: जिस benchmark से आपकी दर तय होती है, वह loan contract की शर्तों का हिस्सा होना चाहिए।[4]
- Credit risk premium: यह तभी बदल सकता है, जब आपके credit assessment में बड़ा बदलाव आए, जैसा loan contract में तय हो।[4]
9अभी क्या करें
- अपने loan के काग़ज़ में देखिए: दर fixed है या floating, और benchmark कौन-सा है।[4]
- Benchmark Repo Rate हो, तो bank से reset की तारीख़ पूछ लीजिए; reset कम से कम तीन महीने में एक बार होना चाहिए।[4]
- Loan MCLR, Base Rate या BPLR पर हो, तो bank से external benchmark पर जाने की शर्तें पूछिए।[4]
- ताज़ा Repo Rate RBI की website के home page पर "Current Rates" में देख लीजिए।[1]
10सवाल-जवाब
11जुड़े शब्द
12स्रोत
- RBI — Monetary Policy: Overview (Last Updated On: Apr 02, 2026) ↗किस बात के लिए, दस्तावेज़ का कौन-सा हिस्सा
- Frameworkinflation target 4% (CPI), सीमा 2% से 6%; 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक बरक़रार
- MPCMPC policy repo rate तय करती है; साल में कम से कम चार बैठकें; quorum चार; हर सदस्य का एक vote; Governor का casting vote
- InstrumentsRepo Rate, SDF rate, MSF rate, LAF corridor और Bank Rate क्या हैं; ताज़ा दरें "Current Rates" में
- Processहर बैठक के बाद resolution; 14वें दिन minutes
- RBI — Monetary Policy Statement, 2026-27: Resolution of the Monetary Policy Committee, October 5 to 7, 2026 (press release 2026-2027/1264, 7 अक्टूबर 2026) ↗किस बात के लिए, दस्तावेज़ का कौन-सा हिस्सा
- पैरा 2MPC ने सर्वसम्मति से policy repo rate 25 bps बढ़ाकर 5.50% किया; SDF rate 5.25%; MSF rate और Bank Rate 5.75%; stance: calibrated tightening
- पैरा 14stance का मतलब, resolution के शब्दों में
- पैरा 17 और 18minutes 21 अक्टूबर 2026 को; अगली बैठक 2 से 4 दिसंबर 2026
- India Code — The Reserve Bank of India Act, 1934 (Act No. 2 of 1934), पाठ "As on the 23rd June, 2026" ↗किस बात के लिए, दस्तावेज़ का कौन-सा हिस्सा
- धारा 2(cccci)"Policy Rate" की परिभाषा
- धारा 17(12AB)"repo" का मतलब
- धारा 45ZAinflation target केंद्र सरकार तय करती है, RBI से सलाह करके, हर पाँच साल में
- धारा 45ZBMPC के छह सदस्य; MPC Policy Rate तय करती है; फ़ैसला RBI पर बाध्यकारी
- RBI — Reserve Bank of India (Commercial Banks – Interest Rates on Advances) Directions, 2025, RBI/DOR/2025-26/161 (28 नवंबर 2025; सिर्फ़ commercial banks पर लागू) ↗किस बात के लिए, दस्तावेज़ का कौन-सा हिस्सा
- पैरा 3ये निर्देश किन banks पर लागू हैं
- पैरा 5External benchmark rate, fixed rate loan और floating rate loan की परिभाषा
- पैरा 6fixed या floating दर की छूट; दर = benchmark + spread; benchmark loan contract का हिस्सा
- पैरा 25, 26 और 27floating retail और MSME loans external benchmark से; एक loan category में एक ही benchmark
- पैरा 33external benchmark पर spread कब बदल सकता है
- पैरा 38कम से कम तीन महीने में एक बार reset
- पैरा 41MCLR / Base Rate / BPLR से external benchmark पर जाना
13सुधार का इतिहास
- पन्ना बना। RBI के Monetary Policy overview, 7 अक्टूबर 2026 के MPC resolution, RBI Act, 1934 और Commercial Banks – Interest Rates on Advances Directions, 2025 से जाँचा। दर: 7 अक्टूबर 2026 को 5.50%।
पन्ना बना: 07 अक्तू 2026 · आख़िरी जाँच: 07 अक्तू 2026
यह सामान्य जानकारी है, कानूनी या वित्तीय सलाह नहीं।