1मतलब
SEBI (Alternative Investment Funds) Regulations, 2012 के नियम 2(1)(b) के मुताबिक AIF भारत में trust, company, LLP या body corporate के रूप में बना वह fund है, जो privately pooled investment vehicle है और निवेशकों से पैसा इकट्ठा करके एक तय निवेश-नीति के मुताबिक लगाता है।[1]
2AIF कैसे काम करता है
SEBI के नियम 3(4) के मुताबिक हर AIF को तीन में से एक category में registration लेना होता है: Category I, Category II या Category III।
3तीन category
- Category I: start-up, SME, social ventures, infrastructure जैसे क्षेत्रों में लगाने वाले fund; venture capital fund इसी में।[1]
- Category II: जो Category I या III में नहीं आते।[1]
- Category III: जटिल trading तरीक़े अपनाने वाले fund; hedge fund इसी में।[1]
4रोज़ की ज़िंदगी का उदाहरण
5आम ग़लतफ़हमी
6परीक्षा के लिए
7सवाल-जवाब
8जुड़े शब्द
9स्रोत
- SEBI (Alternative Investment Funds) Regulations, 2012 — 14 जुलाई 2026 तक संशोधित पाठ (17 अक्टूबर 2026 को पढ़ा) ↗किस बात के लिए, दस्तावेज़ का कौन-सा हिस्सा
- नियम 2(1)(b)AIF की परिभाषा: privately pooled investment vehicle, जो तय निवेश-नीति के मुताबिक लगाने के लिए निवेशकों से पैसा इकट्ठा करता है
- नियम 3(1)Board (SEBI) से certificate of registration लिए बिना कोई AIF के तौर पर काम नहीं कर सकता
- नियम 3(4)(a), (b), (c)Category I में venture capital funds; Category II = जो I या III में नहीं; Category III की Explanation में hedge funds
10सुधार का इतिहास
- 'रोज़ की ज़िंदगी का उदाहरण' जोड़ा।
- पन्ना बना। SEBI (AIF) Regulations, 2012 के 14.07.2026 तक संशोधित पाठ से जाँचा।
पन्ना बना: 17 अक्तू 2026 · आख़िरी जाँच: 17 अक्तू 2026
यह सामान्य जानकारी है, कानूनी या वित्तीय सलाह नहीं।
यह पन्ना: https://seedhamatlab.com/shabdkosh/aif/ · आख़िरी जाँच: 17 अक्तू 2026
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