बॉन्ड · क़र्ज़ का काग़ज़: निवेशक पैसा उधार देता है, जारी करने वाला तय समय तक ब्याज देता है
एक लाइन में
Bond एक क़र्ज़ का काग़ज़ (debt instrument) है: निवेशक किसी कंपनी या सरकार को तय समय के लिए पैसा उधार देता है, और बदले में तय या बदलती दर से ब्याज पाता है। Bond रखने वाला उस संस्था का लेनदार (creditor) होता है।
क्या हैक़र्ज़ का काग़ज़debt instrument
कौन जारी करता हैकंपनी, नगरपालिका, राज्य, केंद्र सरकार
ब्याजCouponतय या बदलती दर
Bond रखने वालालेनदार (creditor)मालिक नहीं
1मतलब
RBI के मुताबिक bond एक debt instrument है, जिसमें निवेशक किसी संस्था (आम तौर पर कंपनी या सरकार) को तय अवधि के लिए, तय या बदलती ब्याज दर पर पैसा उधार देता है। Bond रखने वाले जारी करने वाले के लेनदार होते हैं।[1]
2इसका मतलब आपके लिए क्या है
आप उधार देने वाले हैं: bond में आप हिस्सेदार नहीं, लेनदार होते हैं।[1]
RBI के मुताबिक कंपनियाँ, नगरपालिकाएँ, राज्य और केंद्र सरकारें अलग-अलग परियोजनाओं के लिए पैसा जुटाने को bond जारी करती हैं।
4आम ग़लतफ़हमी
✕ ग़लतफ़हमी"Bond ख़रीदने से आप कंपनी के हिस्सेदार बन जाते हैं।"
✓ सचनहीं। RBI के मुताबिक bond रखने वाले जारी करने वाले के लेनदार (debt holders / creditors) होते हैं, यानी आपने उधार दिया है।[1]
5सवाल-जवाब
Bond आसान भाषा में क्या है?उधार का लिखा हुआ वादा। आप किसी कंपनी या सरकार को पैसा उधार देते हैं; वह तय समय तक ब्याज देती है और अंत में आपका पैसा लौटाती है। (यह समझाने का उदाहरण है।)
Coupon क्या है?RBI के मुताबिक dated G-Sec पर face value पर मिलने वाला ब्याज coupon कहलाता है, जो तय (fixed) या बदलता (floating) हो सकता है।[1]
सरकारी bond और कंपनी के bond में फ़र्क़?RBI के मुताबिक सरकारी securities में सरकार का वादा होता है, इसलिए default का जोखिम लगभग नहीं; इन्हें risk-free gilt-edged कहा जाता है। सरकारी securities के बारे में अलग पन्ना है।[1]