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शब्द · पैसे की बुनियाद✓ स्रोत से जाँचा · 11 Oct 2026

Interest (ब्याज)

ब्याज · जमा पर bank देता है, क़र्ज़ पर bank लेता है

एक लाइन में

ब्याज वह रकम है, जो bank आपकी जमा पर आपको देता है और आपके क़र्ज़ पर आपसे लेता है। दर हमेशा सालाना करके देखिए: RBI की पुस्तिका के मुताबिक "2% महीना" असल में 24% सालाना बैठता है।

Savings खाते मेंरोज़ के balance परहर तिमाही या उससे जल्दी खाते में जमा
Loan परहर महीने लगता है'monthly rests'; खेती के क़र्ज़ में अलग नियम
₹10,000 पर 10%, 10 साल₹26,851तिमाही compounding से; simple interest से ₹20,000
किस्त में देरीPenal charge'penal interest' बनाकर दर में नहीं जोड़ा जा सकता

मतलब

RBI की वित्तीय जागरूकता पुस्तिका (FAME) के मुताबिक वित्तीय संस्थाएँ आपके जमा किए पैसे पर ब्याज देती हैं और उधार लिए पैसे पर ब्याज लेती हैं।[1]

  • Simple interest: ब्याज सिर्फ़ मूलधन पर। सूत्र: I = P × (r/100) × n, जहाँ P मूलधन, r ब्याज दर और n साल हैं।[1]
  • Compound interest: इसे 'ब्याज पर ब्याज' भी कहते हैं। कमाया हुआ ब्याज मूलधन में जुड़ जाता है, और आगे का ब्याज मूलधन और जुड़े हुए ब्याज, दोनों पर मिलता है।[1]

इसका मतलब आपके लिए क्या है

  • दर को सालाना करके देखिए: पुस्तिका के मुताबिक कुछ संस्थाएँ 2% लिखती हैं और छोटे अक्षरों में 'per month'; असल दर 24% सालाना बैठती है।[1]
  • Compounding का फ़र्क़: ₹10,000 पर 10% simple interest से 10 साल में ₹20,000 बनते हैं; वही 10% तिमाही compounding से ₹26,851।[1]
  • Credit score का असर: बाक़ी सब बातें बराबर हों, तो ज़्यादा credit score वाला borrower आम तौर पर कम ब्याज दर पर उधार ले पाता है।[1]

ब्याज कैसे बनता है

RBI की पुस्तिका का उदाहरण: ₹100 का loan, 1 साल, 10% simple interest। साल के अंत में ₹100 + ₹10 = ₹110 लौटाने होते हैं। पुस्तिका यह भी लिखती है कि banks simple interest वाला loan नहीं देते।

  • पहला साल: ₹10,000 पर 10% की दर से ₹1,000 ब्याज; साल के अंत में ₹11,000।[1]
  • दूसरा साल: सालाना compounding में 10% अब ₹11,000 पर लगता है, यानी ₹1,100; साल के अंत में ₹12,100।[1]
  • तीसरा साल: 10% अब ₹12,100 पर, यानी ₹1,210; साल के अंत में ₹13,310।[1]

जमा पर ब्याज

  • Savings खाता: ब्याज daily product पर, यानी हर दिन के अंत वाले balance पर गिना जाता है, और हर तिमाही या उससे कम अंतराल पर खाते में जमा होता है।[2]
  • Current account: इसकी जमा पर कोई ब्याज नहीं दिया जाता।[2]
  • FD की दर: दर अवधि के हिसाब से अलग हो सकती है। रकम के हिसाब से अलग दर सिर्फ़ bulk deposit पर हो सकती है, यानी ₹3 करोड़ और उससे ऊपर की एक term deposit पर।[2]
  • एक जैसी दरें: जमा की दरें सभी शाखाओं और सभी ग्राहकों के लिए एक जैसी होती हैं; bank की website पर पहले से बताई दरों के मुताबिक; मोल-भाव से नहीं।[2]
  • वरिष्ठ नागरिक: bank चाहे, तो भारत में रहने वाले वरिष्ठ नागरिकों के लिए ज़्यादा और तय ब्याज दर वाली term deposit योजना बना सकता है।[2]
  • FD समय से पहले तोड़ने पर: ब्याज उस दर से, जो जमा की रकम और जितने समय वह bank में रही, उस पर लागू होती है; FD की तय दर से नहीं।[2]
  • पकी FD, जो ली नहीं गई: उस रकम पर savings खाते की दर या FD की तय दर, जो भी कम हो।[2]

क़र्ज़ पर ब्याज

  • Fixed और floating: fixed rate loan में दर loan की पूरी अवधि के लिए तय रहती है; floating rate loan में दर अवधि के दौरान तय नहीं रहती।[3]
  • Floating दर कैसे बनती है: benchmark में spread जोड़कर; benchmark loan contract का हिस्सा होता है। Floating दर वाले personal या retail loans (जैसे housing और auto) और MSME loans external benchmark से जुड़े होने चाहिए।[3]
  • हर महीने: सभी advances पर ब्याज 'monthly rests' पर, यानी हर महीने लगाया जाता है; खेती के क़र्ज़ों के लिए अलग नियम हैं।[3]
  • APR: Annual Percentage Rate क़र्ज़ की सालाना लागत है, जिसमें ब्याज दर और loan से जुड़े बाक़ी सब charges शामिल हैं।[4]
  • APR का उदाहरण: RBI के निर्देशों के काल्पनिक उदाहरण में ₹20,000 का loan, 15% fixed दर, ₹970 की 24 मासिक किस्तें और ₹400 के charges हैं; APR 17.07% बैठता है।[4]
  • देरी का जुर्माना: loan की शर्तें न मानने (जैसे किस्त न चुकाने) का जुर्माना 'penal charges' के रूप में ही लिया जा सकता है, 'penal interest' बनाकर ब्याज दर में जोड़कर नहीं; और penal charges पर आगे ब्याज नहीं लगता। यह नियम credit card पर लागू नहीं है।[4]
  • नए निर्देशों का draft: RBI ने 12 अगस्त 2026 को loan के ब्याज पर नए निर्देशों का draft राय के लिए जारी किया है। Draft अभी नियम नहीं है; इस पन्ने की बातें 2025 के लागू निर्देशों से हैं।[5]
  • Floating दर बदले, तो: EMI वाले personal loan में bank को बढ़ी EMI या अवधि की सूचना तुरंत देनी है। Borrower को EMI बढ़ाने, अवधि बढ़ाने या दोनों का विकल्प, और loan पूरा या उसका कुछ हिस्सा पहले चुकाने का विकल्प मिलना चाहिए।[4]

आम ग़लतफ़हमी

✕ ग़लतफ़हमी"2% ब्याज तो बहुत कम है।"
✓ सचपहले देखिए कि 2% महीने का है या साल का। RBI की पुस्तिका के मुताबिक कुछ संस्थाएँ 2% लिखती हैं और छोटे अक्षरों में 'per month'; असल दर 24% सालाना बैठती है।[1]
✕ ग़लतफ़हमी"Loan की ब्याज दर ही उसकी पूरी लागत है।"
✓ सचनहीं। Annual Percentage Rate (APR) में ब्याज दर के साथ loan के बाक़ी सब charges भी गिने जाते हैं। RBI के निर्देशों के काल्पनिक उदाहरण में 15% दर वाले loan का APR 17.07% है।[4]
✕ ग़लतफ़हमी"किस्त में देरी हुई, तो bank ब्याज दर बढ़ा देगा।"
✓ सचRBI के निर्देशों के मुताबिक जुर्माना 'penal charges' के रूप में ही लिया जा सकता है, 'penal interest' बनाकर ब्याज दर में जोड़कर नहीं। पर जो ब्याज या किस्त चुकाई नहीं गई, उस पर bank loan की तय दर से ब्याज ले सकता है।[4]
✕ ग़लतफ़हमी"Bank से मोल-भाव करके जमा पर ज़्यादा ब्याज मिल सकता है।"
✓ सचनहीं। RBI के निर्देशों के मुताबिक जमा की दरें bank और जमाकर्ता के बीच मोल-भाव से तय नहीं होतीं। वे bank की website पर पहले से बताई दरों के मुताबिक ही होती हैं, और सभी शाखाओं और ग्राहकों के लिए एक जैसी।[2]

आपका अधिकार

जमा पर ब्याज bank की website पर पहले से बताई दरों के मुताबिक ही मिलना चाहिए।[2] 1 अक्टूबर 2024 या उसके बाद मंज़ूर हर नए retail और MSME term loan में bank को Key Facts Statement (KFS) देना है, जिसमें APR का हिसाब और किस्तों की पूरी सारणी हो।[4]
  • जो charge KFS में नहीं: वह loan की अवधि में आपकी साफ़ सहमति के बिना नहीं लिया जा सकता।[4]
  • तिमाही statement: EMI वाले floating दर के personal loan में हर तिमाही के अंत में statement: अब तक वसूला मूलधन और ब्याज, EMI की रकम, बची EMIs की गिनती, और सालाना ब्याज दर या APR।[4]
  • पहले चुकाना: individuals को business से अलग काम के लिए दिए floating rate loan पर bank pre-payment charge नहीं ले सकता।[4]

अभी क्या करें

  • Loan लेने से पहले KFS में APR देखिए, सिर्फ़ ब्याज दर नहीं।[4]
  • कोई दर महीने की बताई जाए, तो उसे सालाना करके देखिए।[1]
  • Loan की मंज़ूरी के पत्र की शर्तें पढ़िए; ये अलग-अलग संस्थाओं में अलग हो सकती हैं।[1]
  • जमा और loan की दरें अपने bank की website पर देखिए; bank को ताज़ा दरें और service charges वहाँ दिखाने हैं।[4]

सवाल-जवाब

ब्याज क्या होता है?RBI की वित्तीय जागरूकता पुस्तिका के मुताबिक वित्तीय संस्थाएँ आपके जमा किए पैसे पर ब्याज देती हैं और उधार लिए पैसे पर ब्याज लेती हैं।
Simple interest कैसे निकालते हैं?RBI की पुस्तिका का सूत्र: I = P × (r/100) × n, जहाँ P मूलधन, r ब्याज दर और n साल हैं। उदाहरण: ₹100 पर 10% की दर से 1 साल का simple interest ₹10 होता है।
Compound interest क्या है?RBI की पुस्तिका इसे 'ब्याज पर ब्याज' कहती है: कमाया हुआ ब्याज मूलधन में जुड़ जाता है, और आगे का ब्याज दोनों पर मिलता है। पुस्तिका का उदाहरण: ₹10,000 पर 10% सालाना compounding से पहले साल के अंत में ₹11,000, दूसरे में ₹12,100 और तीसरे में ₹13,310।
Savings खाते पर ब्याज कैसे गिना जाता है?RBI के निर्देशों के मुताबिक daily product पर, यानी हर दिन के अंत वाले balance पर। यह हर तिमाही या उससे कम अंतराल पर खाते में जमा होता है।
Fixed rate और floating rate loan में क्या फ़र्क़ है?RBI के निर्देशों के मुताबिक fixed rate loan में ब्याज दर loan की पूरी अवधि के लिए तय रहती है। Floating rate loan में दर अवधि के दौरान तय नहीं रहती।
APR क्या है?Annual Percentage Rate, यानी क़र्ज़ की सालाना लागत, जिसमें ब्याज दर और loan से जुड़े बाक़ी सब charges शामिल हैं। RBI के निर्देशों के मुताबिक bank को अपनी website पर APR या उस जैसा तरीक़ा छापना है, ताकि ग्राहक लागत की तुलना कर सकें।
Penal interest और penal charge में क्या फ़र्क़ है?RBI के निर्देशों के मुताबिक loan की शर्तें न मानने का जुर्माना 'penal charges' के रूप में ही लिया जा सकता है, ब्याज दर में जोड़े गए 'penal interest' के रूप में नहीं; और penal charges पर आगे ब्याज नहीं लगता। यह नियम credit card पर लागू नहीं है।
FD समय से पहले तोड़ने पर कितना ब्याज मिलता है?RBI के निर्देशों के मुताबिक तब ब्याज उस दर से मिलता है, जो जमा की रकम और जितने समय वह bank में रही, उस पर लागू होती है; FD की तय दर से नहीं। 7 दिन की न्यूनतम अवधि से पहले निकासी हो, तो कोई ब्याज नहीं।
क्या वरिष्ठ नागरिकों को ज़्यादा ब्याज मिलता है?RBI के निर्देशों के मुताबिक bank चाहे, तो भारत में रहने वाले वरिष्ठ नागरिकों के लिए ऐसी term deposit योजना बना सकता है, जिसमें ब्याज दर ज़्यादा और तय हो। यह bank के अपने फ़ैसले पर है। HUF या उसके Karta के नाम की जमा पर यह सुविधा नहीं मिलती।
क्या Current Account पर ब्याज मिलता है?नहीं। RBI के निर्देशों के मुताबिक current account की जमा पर कोई ब्याज नहीं दिया जाता।
क्या loan के ब्याज के नियम बदलने वाले हैं?RBI ने 12 अगस्त 2026 को नए निर्देशों का draft, Reserve Bank of India (Interest Rates on Loans and Advances) Directions, 2026, लोगों की राय के लिए जारी किया; राय देने की आख़िरी तारीख़ 11 सितंबर 2026 थी। RBI के मुताबिक राय देखने के बाद final निर्देश जारी होंगे। Draft अभी नियम नहीं है; इस पन्ने की बातें 2025 के लागू निर्देशों से हैं।
क्या ये नियम हर bank पर लागू हैं?ये RBI के commercial banks के लिए बने निर्देश हैं। जमा वाले निर्देशों में Small Finance Banks, Payment Banks, Regional Rural Banks और Local Area Banks 'commercial banks' में नहीं गिने गए हैं; loan वाले निर्देशों में Small Finance Banks, Payment Banks और Local Area Banks।

जुड़े शब्द

स्रोत

  1. RBI — Financial Awareness Messages (FAME), Fourth Edition, February 2024 ↗किस बात के लिए, दस्तावेज़ का कौन-सा हिस्सा
    • Message 3, पन्ना 5ज़्यादा credit score वाला borrower आम तौर पर कम ब्याज दर पर उधार ले पाता है
    • Message 6, पन्ना 12simple interest का सूत्र और ₹100 वाला उदाहरण; 2% महीना = 24% सालाना; दर सालाना करके देखना; मंज़ूरी के पत्र की शर्तें पढ़ना; banks simple interest वाला loan नहीं देते
    • Message 7, पन्ना 13 और 14compounding यानी 'ब्याज पर ब्याज'; ₹10,000 के उदाहरण (₹13,310; ₹20,000 और ₹26,851)
    • Message 9, पन्ना 17वित्तीय संस्थाएँ जमा पर ब्याज देती हैं और उधार पर ब्याज लेती हैं
  2. RBI — Reserve Bank of India (Commercial Banks – Interest Rate on Deposits) Directions, 2025 (RBI/DOR/2025-26/153, 28 नवंबर 2025; 1 अक्टूबर 2026 तक updated) ↗जारी: 28 नव 2025किस बात के लिए, दस्तावेज़ का कौन-सा हिस्सा
    • पैरा 4लागू किस पर: commercial banks; SFB, Payment Banks, RRB और LAB बाहर
    • पैरा 6(2), 6(5)bulk deposit: ₹3 करोड़ और उससे ऊपर की एक rupee term deposit; daily product की परिभाषा
    • पैरा 7(2), 7(3), 7(5)सभी शाखाओं और ग्राहकों के लिए एक जैसी दरें; website पर पहले से बताई दरें; मोल-भाव नहीं
    • पैरा 8, 9current account पर ब्याज नहीं; savings ब्याज daily product पर
    • पैरा 10, 11term deposit की दर किन वजहों से अलग हो सकती है; न्यूनतम अवधि 7 दिन; समय से पहले निकासी पर ब्याज
    • पैरा 13वरिष्ठ नागरिकों के लिए ज़्यादा और तय दर वाली योजना, bank के फ़ैसले पर; HUF पर नहीं
    • पैरा 16पकी, पर न ली गई term deposit पर savings दर या तय दर, जो कम हो
    • पैरा 18savings ब्याज हर तिमाही या उससे कम अंतराल पर जमा
  3. RBI — Reserve Bank of India (Commercial Banks – Interest Rates on Advances) Directions, 2025, RBI/DOR/2025-26/161 (28 नवंबर 2025; सिर्फ़ commercial banks पर लागू) ↗जारी: 28 नव 2025किस बात के लिए, दस्तावेज़ का कौन-सा हिस्सा
    • पैरा 3लागू किस पर: commercial banks; SFB, Payment Banks और LAB बाहर
    • पैरा 5(5), 5(6)fixed rate loan और floating rate loan की परिभाषा
    • पैरा 6(4), 6(5)floating दर = benchmark + spread; benchmark loan contract का हिस्सा
    • पैरा 6(7)सभी advances पर ब्याज monthly rests पर; खेती के क़र्ज़ों के लिए अलग नियम
    • पैरा 25floating दर वाले personal या retail loans और MSME loans external benchmark से जुड़े
  4. RBI — Reserve Bank of India (Commercial Banks – Responsible Business Conduct) Directions, 2025 (RBI/DOR/2025-26/170; Updated as on October 1, 2026) ↗जारी: 28 नव 2025किस बात के लिए, दस्तावेज़ का कौन-सा हिस्सा
    • पैरा 4(3)APR की परिभाषा
    • पैरा 52, 53(3)website पर ब्याज दरें और service charges; APR छापना
    • पैरा 348नए retail और MSME term loans में KFS; APR का हिसाब और किस्तों की सारणी; ₹20,000 वाला उदाहरण (APR 17.07%); KFS में न लिखा charge सहमति के बिना नहीं
    • पैरा 349EMI वाले floating दर के personal loan: दर बदलने पर सूचना और विकल्प; तिमाही statement
    • पैरा 351penal charges, penal interest नहीं; penal charges पर आगे ब्याज नहीं; न चुकाए ब्याज पर तय दर से ब्याज; credit card पर लागू नहीं
    • पैरा 352, 353(1)individuals के business से अलग काम के floating rate loan पर pre-payment charge नहीं
  5. RBI — RBI invites comments on the Draft "Reserve Bank of India (Interest Rates on Loans and Advances) Directions, 2026", press release 2026-2027/877 (12 अगस्त 2026; यह draft की सूचना है, नियम नहीं) ↗जारी: 12 अग 2026किस बात के लिए, दस्तावेज़ का कौन-सा हिस्सा
    • पैरा 1, 3 और 4draft जारी हुआ; राय के बाद final निर्देश; राय की आख़िरी तारीख़ 11 सितंबर 2026

सुधार का इतिहास

  • पन्ना बना। RBI की FAME पुस्तिका (फ़रवरी 2024), Commercial Banks – Interest Rate on Deposits Directions, 2025 (1 अक्टूबर 2026 तक updated), Interest Rates on Advances Directions, 2025 और Responsible Business Conduct Directions, 2025 (1 अक्टूबर 2026 तक update) से जाँचा। RBI का 12 अगस्त 2026 का draft भी देखा; वह अभी नियम नहीं है।

पन्ना बना: 11 अक्तू 2026 · आख़िरी जाँच: 11 अक्तू 2026
यह सामान्य जानकारी है, कानूनी या वित्तीय सलाह नहीं।

यह पन्ना: https://seedhamatlab.com/shabdkosh/interest/ · आख़िरी जाँच: 11 अक्तू 2026
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