BNSS, यानी Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita, 2023 (Act No. 46 of 2023), फ़ौजदारी प्रक्रिया (criminal procedure) का क़ानून है। India Code के मुताबिक यह 1 जुलाई 2024 से लागू है, और इसकी धारा 531 ने पुराने Code of Criminal Procedure, 1973 (CrPC) को रद्द किया। FIR दर्ज होना, पुलिस का दस्तावेज़ माँगना और संपत्ति ज़ब्त करना, ये सब इसी क़ानून में हैं।
पूरा नामभारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023Act No. 46 of 2023
लागू1 जुलाई 2024धारा 1(3) का notification
किसकी जगहCrPC, 1973धारा 531(1)
FIRधारा 173किसी भी थाने में, ज़ुबानी या electronic
1मतलब
BNSS, यानी Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita, 2023, फ़ौजदारी प्रक्रिया का क़ानून है।[1] इसकी धारा 531 ने Code of Criminal Procedure, 1973 (CrPC) को रद्द किया, और India Code के मुताबिक यह 1 जुलाई 2024 से लागू है।[1]
दस्तावेज़ माँगनाधारा 94: लिखित आदेश, electronic भी
शक हो तो→धारा 106
ज़ब्तीधारा 106: सूचना Magistrate को
BNSS के मुताबिक संज्ञेय अपराध की सूचना थाने के प्रभारी को दी जाती है; जाँच के लिए पुलिस का प्रभारी अधिकारी लिखित आदेश से किसी से दस्तावेज़ या चीज़ पेश करने को कह सकता है; और पुलिस अधिकारी शक वाली संपत्ति ज़ब्त कर सकता है, जिसकी सूचना उसे तुरंत Magistrate को देनी होती है।
3आम ग़लतफ़हमी
✕ ग़लतफ़हमी"FIR सिर्फ़ उसी थाने में होगी, जिसके इलाक़े में अपराध हुआ।"
✓ सचनहीं। BNSS की धारा 173(1) के मुताबिक संज्ञेय अपराध की सूचना, अपराध चाहे किसी भी इलाक़े में हुआ हो, थाने के प्रभारी अधिकारी को ज़ुबानी या electronic communication से दी जा सकती है।[1]
✕ ग़लतफ़हमी"अब भी CrPC ही लागू है।"
✓ सचनहीं। BNSS की धारा 531(1) के मुताबिक Code of Criminal Procedure, 1973 रद्द कर दिया गया है। धारा 531(2) के मुताबिक BNSS लागू होने से पहले से चल रही appeal, trial, जाँच वग़ैरह पुराने Code के हिसाब से ही चलती रहेंगी।[1]
4अभी क्या करें
संज्ञेय अपराध की सूचना देनी हो, तो किसी भी थाने के प्रभारी को दी जा सकती है, और दर्ज सूचना की मुफ़्त copy माँगिए।[1]
5सवाल-जवाब
BNSS का पूरा नाम क्या है?BNSS का पूरा नाम Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita, 2023 (भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता) है; यह Act No. 46 of 2023 है।[1]
BNSS कब से लागू है?India Code के पाठ में धारा 1(3) के फ़ुटनोट के मुताबिक 1 जुलाई 2024 से (notification S.O. 848(E), 23 फ़रवरी 2024), पहली अनुसूची में धारा 106(2) से जुड़ी entry को छोड़कर।[1]
Electronic तरीक़े से दी गई सूचना का क्या होता है?धारा 173(1)(ii) के मुताबिक electronic communication से दी गई सूचना तब record पर ली जाती है, जब देने वाला तीन दिन के अंदर उस पर हस्ताक्षर कर दे।[1]
FIR की copy मिलती है?हाँ। धारा 173(2) के मुताबिक दर्ज सूचना की copy सूचना देने वाले या पीड़ित को तुरंत और मुफ़्त दी जाती है।[1]
पुलिस bank से दस्तावेज़ कैसे माँगती है?धारा 94(1) के मुताबिक जाँच के लिए ज़रूरी लगे, तो थाने का प्रभारी अधिकारी लिखित आदेश से, काग़ज़ पर या electronic रूप में, किसी व्यक्ति से कोई दस्तावेज़, electronic communication या चीज़ पेश करने को कह सकता है।[1]
पुलिस संपत्ति कब ज़ब्त कर सकती है?धारा 106(1) के मुताबिक कोई पुलिस अधिकारी ऐसी संपत्ति ज़ब्त कर सकता है, जिसके चोरी होने का आरोप या शक हो, या जो ऐसे हालात में मिले जिनसे किसी अपराध का शक हो। धारा 106(3) के मुताबिक ज़ब्ती की सूचना तुरंत अधिकार-क्षेत्र वाले Magistrate को देनी होती है।[1]