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सीधा मतलब | Seedha Matlab

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शब्द · बैंकिंग✓ स्रोत से जाँचा · 7 Oct 2026

Affidavit

वह लिखित बयान, जिसकी बातों के सच होने की शपथ ली जाती है

एक लाइन में

Affidavit वह लिखित बयान है, जिस पर दस्तख़त करके बयान देने वाला शपथ लेता है, या सत्यनिष्ठा से प्रतिज्ञा (solemn affirmation) करता है, कि उसमें लिखी बातें सच हैं। यह Judge, Magistrate, notary या इसके लिए अधिकृत व्यक्ति के सामने होता है। शपथ लेकर जान-बूझकर झूठा बयान देने पर जेल हो सकती है।

जमा के दावे में शपथ₹15 लाख से ऊपरसीमा तक के दावे में declaration काफ़ी है
Notary का कामAffidavit लेनाशपथ दिलाना भी; दस्तख़त और मुहर के साथ
शपथ की जगहAffirmation भी"swear in the name of God" या "solemnly affirm"
झूठे बयान की सज़ा3 साल तकअदालती कार्यवाही में 7 साल तक

मतलब

Affidavit वह लिखित बयान है, जिस पर दस्तख़त करके बयान देने वाला शपथ लेता है, या सत्यनिष्ठा से प्रतिज्ञा (solemn affirmation) करता है, कि यह उसका नाम और दस्तख़त है और उसमें लिखी बातें सच हैं। Oaths Act, 1969 में affidavit का यही form दिया गया है।[1]

General Clauses Act, 1897 के मुताबिक "affidavit" में affirmation और declaration भी शामिल हैं, उन लोगों के मामले में, जिन्हें क़ानून शपथ लेने की जगह affirm या declare करने की इजाज़त देता है।[2]

Affidavit किसके सामने बनता है

General Clauses Act के मुताबिक "affidavit" में affirmation और declaration भी शामिल हैं, उन लोगों के मामले में, जिन्हें क़ानून शपथ की जगह इसकी इजाज़त देता है।

  • Notary: notary किसी व्यक्ति को शपथ दिला सकता है और उससे affidavit ले सकता है। उसका काम तभी notarial act माना जाता है, जब वह उसके दस्तख़त और official seal के साथ हो।[3]
  • अधिकृत court या व्यक्ति: कोई court, Judge, Magistrate या व्यक्ति affidavit के लिए शपथ दिला सकता है, अगर उसे इसका अधिकार High Court ने (अदालती कार्यवाही के affidavit के लिए) या राज्य सरकार ने (बाक़ी affidavit के लिए) दिया हो।[1]
  • फ़ौजदारी अदालत का affidavit: यह किसी Judge, Judicial या Executive Magistrate के सामने; High Court या Court of Session के नियुक्त किए Commissioner of Oaths के सामने; या notary के सामने बनता है।[4]

Affidavit में क्या लिखा जाता है

  • सिर्फ़ तथ्य: अदालत में देने वाले affidavit में वे तथ्य लिखे जाते हैं, जिन्हें बयान देने वाला अपनी जानकारी से साबित कर सकता है।[4]
  • भरोसे वाली बातें अलग: जिन तथ्यों को सच मानने का उसके पास उचित आधार है, वे अलग लिखे जाते हैं, और उसे अपने भरोसे का आधार साफ़ लिखना होता है।[4]
  • बेमतलब बातें हट सकती हैं: अदालत affidavit की अपमानजनक और बेमतलब (scandalous and irrelevant) बातें हटवा या बदलवा सकती है।[4]
  • शपथ या affirmation: form में दो रास्ते हैं: "swear in the name of God" या "solemnly affirm"।[1]

झूठा affidavit

  • False evidence: शपथ से, या क़ानून से, सच बोलने के लिए बँधा व्यक्ति ऐसा बयान दे, जो झूठा हो और जिसे वह झूठा जानता या मानता हो, या सच न मानता हो, तो वह false evidence देता है। बयान ज़बानी हो या किसी और रूप में, दोनों इसमें आते हैं।[5]
  • सज़ा: जान-बूझकर false evidence देने पर अदालती कार्यवाही में सात साल तक की जेल और ₹10,000 तक जुर्माना हो सकता है; बाक़ी मामलों में तीन साल तक की जेल और ₹5,000 तक जुर्माना।[5]
  • Declaration में झूठ: जिस declaration को कोई अदालत, सरकारी सेवक या दूसरा व्यक्ति क़ानूनन सबूत के तौर पर लेने के लिए बँधा या अधिकृत है, उसमें किसी अहम बात पर जान-बूझकर झूठा बयान देने वाले को वैसी ही सज़ा होती है, जैसी false evidence देने पर।[5]

Bank के दावे में affidavit

  • Nominee या survivor हो: bank सिर्फ़ तीन काग़ज़ लेता है: claim form, Death Certificate और पहचान का काग़ज़। Affidavit नहीं लगता।[6]
  • ₹15 लाख की सीमा तक: यह सीमा ₹15 लाख है, या उससे ऊँची, जो bank तय करे। Nominee न हो और जमा का दावा क़ानूनी वारिस करें, तो Legal Heir Certificate, या उसकी जगह एक स्वतंत्र व्यक्ति का declaration लगता है। इस declaration को affidavit के रूप में शपथ लेकर देना ज़रूरी नहीं है।[6]
  • सीमा से ऊपर: Succession Certificate न दिया जाए, तो Legal Heir Certificate, या स्वतंत्र व्यक्ति का affidavit लगता है, जो Notary Public, Judge या Judicial Magistrate के सामने शपथ लेकर दिया गया हो।[6]
  • कौन दे सकता है: वह व्यक्ति, जो मृतक के परिवार को अच्छी तरह जानता हो, दावे का पक्ष न हो और bank को मंज़ूर हो।[6]
  • क्या लिखा होता है: मृतक की मृत्यु बिना वसीयत के कब और कहाँ हुई; बयान देने वाला परिवार को कितने साल से जानता है; क़ानूनी वारिसों के नाम, उम्र और रिश्ता; और यह कि उसका मृतक या वारिसों से कोई रिश्ता नहीं, और संपत्ति में कोई दावा या हित नहीं।[6]
  • Stamp: RBI के format पर लिखा है कि इस पर राज्य में लागू Stamp Act के मुताबिक stamp लगना है।[6]
  • Locker: सरल प्रक्रिया वाले दावे में Legal Heir Certificate, या Notary Public, Judge या Judicial Magistrate के सामने शपथ लेकर दिया गया स्वतंत्र व्यक्ति का affidavit लगता है।[6]

आम ग़लतफ़हमी

✕ ग़लतफ़हमी"Affidavit सिर्फ़ अदालत में बनता है।"
✓ सचनहीं। Notaries Act, 1952 के मुताबिक notary भी किसी व्यक्ति को शपथ दिला सकता है और उससे affidavit ले सकता है।[3]
✕ ग़लतफ़हमी"Affidavit में कुछ भी लिख दो; कौन देखता है।"
✓ सचग़लत। शपथ से बँधा व्यक्ति ऐसा बयान दे, जिसे वह झूठा जानता या मानता हो, तो Bharatiya Nyaya Sanhita के मुताबिक यह false evidence देना है। जान-बूझकर ऐसा करने पर तीन साल तक की, और अदालती कार्यवाही में सात साल तक की, जेल हो सकती है।[5]
✕ ग़लतफ़हमी"शपथ ईश्वर के नाम पर ही लेनी पड़ती है।"
✓ सचनहीं। Oaths Act, 1969 के affidavit वाले form में दो रास्ते हैं: "swear in the name of God" या "solemnly affirm"।[1]
✕ ग़लतफ़हमी"मृतक के bank खाते के हर दावे में affidavit लगता है।"
✓ सचनहीं। Nominee या survivor से bank सिर्फ़ तीन काग़ज़ लेता है। Nominee न हो, तब भी जमा खाते के ₹15 लाख की सीमा तक के दावे में declaration को affidavit के रूप में शपथ लेकर देना ज़रूरी नहीं है; यह सीमा से ऊपर के दावे में ही ज़रूरी है।[6]

आपका अधिकार

जमा खाते के ₹15 लाख की सीमा तक के दावे में स्वतंत्र व्यक्ति के declaration को affidavit के रूप में शपथ लेकर देना ज़रूरी नहीं है।[6]
  • शपथ या affirmation: affidavit के form में "swear in the name of God" की जगह "solemnly affirm" का रास्ता भी है।[1]
  • Nominee हो, तो affidavit नहीं: nominee या survivor से bank सिर्फ़ claim form, death certificate और पहचान का काग़ज़ लेता है।[6]

अभी क्या करें

  • Affidavit पर दस्तख़त से पहले उसे पूरा पढ़िए; शपथ लेकर जान-बूझकर झूठा बयान देने पर जेल हो सकती है।[5]
  • अदालत के affidavit में वही तथ्य लिखिए, जिन्हें आप अपनी जानकारी से साबित कर सकें; भरोसे वाली बातें अलग लिखिए, आधार के साथ।[4]
  • जमा खाते का दावा ₹15 लाख की सीमा तक हो और bank शपथ वाला affidavit माँगे, तो बताइए कि RBI के format के मुताबिक शपथ सीमा से ऊपर के दावे में ही ज़रूरी है।[6]
  • Bank वाले affidavit के लिए ऐसा व्यक्ति चुनिए, जो परिवार को अच्छी तरह जानता हो, दावे का पक्ष न हो और bank को मंज़ूर हो।[6]
  • पुलिस FIR दर्ज न करे और आप Magistrate को application दें, तो उसके साथ affidavit लगता है।[4]

सवाल-जवाब

Affidavit का मतलब क्या है?Affidavit वह लिखित बयान है, जिसकी बातों के सच होने की शपथ या solemn affirmation बयान देने वाला लेता है। Oaths Act, 1969 के Schedule में affidavit का form यह है: "I do swear in the name of God / solemnly affirm that this is my name and signature (or mark) and that the contents of this my affidavit are true."
क्या क़ानून में affidavit की परिभाषा है?General Clauses Act, 1897 की धारा 3 कहती है कि "affidavit" में affirmation और declaration भी शामिल हैं, उन लोगों के मामले में, जिन्हें क़ानून शपथ लेने की जगह affirm या declare करने की इजाज़त देता है।
Affidavit किसके सामने बनवाया जा सकता है?Notaries Act, 1952 की धारा 8 के मुताबिक notary किसी व्यक्ति को शपथ दिला सकता है और उससे affidavit ले सकता है। Oaths Act, 1969 की धारा 3 के मुताबिक कोई court, Judge, Magistrate या व्यक्ति भी affidavit के लिए शपथ दिला सकता है, अगर उसे इसका अधिकार High Court ने (अदालती कार्यवाही के affidavit के लिए) या राज्य सरकार ने (बाक़ी affidavit के लिए) दिया हो।
फ़ौजदारी अदालत में देने वाला affidavit किसके सामने बनता है?Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita, 2023 की धारा 333 के मुताबिक इनमें से किसी के सामने: कोई Judge, या Judicial या Executive Magistrate; High Court या Court of Session का नियुक्त किया Commissioner of Oaths; या Notaries Act, 1952 के तहत नियुक्त notary।
Notary का किया काम कब मान्य है?Notaries Act की धारा 8 के मुताबिक notary का कोई काम तभी 'notarial act' माना जाता है, जब वह उसके दस्तख़त और official seal के साथ किया गया हो।
Affidavit में क्या लिखना चाहिए?Sanhita की धारा 333 के मुताबिक अदालत में देने वाले affidavit में सिर्फ़ तथ्य होने चाहिए, और दो तरह के तथ्य अलग-अलग लिखे जाने चाहिए: वे, जिन्हें बयान देने वाला अपनी जानकारी से साबित कर सकता है; और वे, जिन्हें सच मानने का उसके पास उचित आधार है। दूसरी तरह के तथ्यों में उसे अपने भरोसे का आधार साफ़ लिखना होता है। अदालत affidavit की अपमानजनक और बेमतलब (scandalous and irrelevant) बातें हटवा या बदलवा सकती है।
झूठा affidavit देने पर क्या होता है?Bharatiya Nyaya Sanhita, 2023 की धारा 227 के मुताबिक शपथ से, या क़ानून से, सच बोलने के लिए बँधा व्यक्ति ऐसा बयान दे, जो झूठा हो और जिसे वह झूठा जानता या मानता हो, या सच न मानता हो, तो वह false evidence देता है। धारा 229 के मुताबिक जान-बूझकर ऐसा करने पर अदालती कार्यवाही में सात साल तक की जेल और ₹10,000 तक जुर्माना, और बाक़ी मामलों में तीन साल तक की जेल और ₹5,000 तक जुर्माना हो सकता है।
बिना शपथ वाले declaration में झूठ लिखा जाए, तो?Bharatiya Nyaya Sanhita की धारा 236 के मुताबिक जिस declaration को कोई अदालत, सरकारी सेवक या दूसरा व्यक्ति क़ानूनन किसी तथ्य के सबूत के तौर पर लेने के लिए बँधा या अधिकृत है, उसमें किसी अहम बात पर जान-बूझकर झूठा बयान देने वाले को वैसी ही सज़ा होती है, जैसी false evidence देने पर।
मृतक के bank खाते के दावे में affidavit कब लगता है?RBI के निर्देशों के पैरा 290 के मुताबिक तब, जब nominee न हो, दावा ₹15 लाख की सीमा से ऊपर हो और Succession Certificate न दिया जा रहा हो। तब Legal Heir Certificate, या क़ानूनी वारिसों के बारे में एक स्वतंत्र व्यक्ति का affidavit लगता है, जो Notary Public, Judge या Judicial Magistrate के सामने शपथ लेकर दिया गया हो।
₹15 लाख की सीमा तक के दावे में क्या लगता है?पैरा 283 के मुताबिक यह सीमा ₹15 लाख है, या उससे ऊँची, जो bank तय करे। पैरा 288 के मुताबिक जमा खाते के ऐसे दावे में Legal Heir Certificate, या उसकी जगह Annex IX का declaration, जो एक स्वतंत्र व्यक्ति देता है। Annex IX में लिखा है कि इस declaration को Notary Public, Judge या Magistrate के सामने affidavit के रूप में शपथ लेकर देना तभी ज़रूरी है, जब दावे की रकम सीमा से ऊपर हो।
Bank वाला affidavit कौन दे सकता है?पैरा 290 के मुताबिक एक स्वतंत्र व्यक्ति, जो मृतक के परिवार को अच्छी तरह जानता हो, दावे का पक्ष न हो और bank को मंज़ूर हो। Annex IX के format में वह कहता है कि उसका मृतक या वारिसों से कोई रिश्ता नहीं है, और मृतक की संपत्ति में उसका कोई दावा या हित नहीं है।
Bank वाले affidavit में क्या लिखा होता है?Annex IX के format के मुताबिक: मृतक की मृत्यु बिना वसीयत के कब और कहाँ हुई; बयान देने वाला मृतक और उसके परिवार को कितने साल से जानता है; और मृतक के क़ानूनी वारिसों के नाम, उम्र और रिश्ता। Format के ऊपर लिखा है कि इस पर राज्य में लागू Stamp Act के मुताबिक stamp लगना है।
Locker के दावे में affidavit लगता है?निर्देशों के पैरा 309 के मुताबिक locker के सरल प्रक्रिया वाले दावे में Legal Heir Certificate, या Notary Public, Judge या Judicial Magistrate के सामने शपथ लेकर दिया गया एक स्वतंत्र व्यक्ति का affidavit लगता है।
RBI के ये नियम किन banks पर लागू हैं?ये RBI के commercial banks के लिए बने निर्देश हैं। इनके पैरा 3 में Small Finance Banks, Payments Banks और Local Area Banks 'commercial banks' में नहीं गिने गए हैं।

जुड़े शब्द

स्रोत

  1. India Code — The Oaths Act, 1969 (Act No. 44 of 1969), पाठ "As on the 6th Oct, 2025" ↗किस बात के लिए, दस्तावेज़ का कौन-सा हिस्सा
    • धारा 3affidavit के लिए शपथ कौन दिला सकता है
    • ScheduleForm No. 4 (Affidavits): शपथ या solemn affirmation
  2. India Code — The General Clauses Act, 1897 (Act No. 10 of 1897) ↗किस बात के लिए, दस्तावेज़ का कौन-सा हिस्सा
    • धारा 3(3)"affidavit" में affirmation और declaration शामिल
  3. India Code — The Notaries Act, 1952 (Act No. 53 of 1952), पाठ "As on the 15th January, 2026" ↗किस बात के लिए, दस्तावेज़ का कौन-सा हिस्सा
    • धारा 8(1)notary शपथ दिला सकता है और affidavit ले सकता है
    • धारा 8(2)दस्तख़त और official seal के साथ ही notarial act
  4. India Code — The Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita, 2023 (Act No. 46 of 2023), पाठ "As on the 6th October, 2025" ↗किस बात के लिए, दस्तावेज़ का कौन-सा हिस्सा
    • धारा 175Magistrate को दी जाने वाली application के साथ affidavit
    • धारा 333(1)अदालती affidavit किसके सामने
    • धारा 333(2)affidavit में कौन-से तथ्य, और कैसे लिखे जाएँ
    • धारा 333(3)अदालत कौन-सी बातें हटवा सकती है
  5. India Code — The Bharatiya Nyaya Sanhita, 2023 (Act No. 45 of 2023), पाठ "As on the 6th October, 2025" ↗किस बात के लिए, दस्तावेज़ का कौन-सा हिस्सा
    • धारा 227false evidence देना क्या है
    • धारा 229सज़ा: सात साल तक; तीन साल तक
    • धारा 236declaration में झूठा बयान
  6. RBI — Reserve Bank of India (Commercial Banks – Responsible Business Conduct) Directions, 2025 (RBI/DOR/2025-26/170; Updated as on October 1, 2026) ↗जारी: 28 नव 2025किस बात के लिए, दस्तावेज़ का कौन-सा हिस्सा
    • पैरा 3ये निर्देश किन banks पर लागू हैं
    • पैरा 283threshold limit: ₹15 लाख, या bank की तय की हुई ऊँची सीमा
    • पैरा 286nominee या survivor से सिर्फ़ तीन काग़ज़
    • पैरा 288सीमा तक: Legal Heir Certificate या स्वतंत्र व्यक्ति का declaration
    • पैरा 290सीमा से ऊपर: शपथ लेकर दिया गया affidavit; कौन दे सकता है
    • पैरा 309locker के दावे में affidavit
    • Annex IXDeclaration / Affidavit का format; stamp; शपथ कब ज़रूरी

सुधार का इतिहास

  • पन्ना बना। Oaths Act, 1969; General Clauses Act, 1897; Notaries Act, 1952; Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita, 2023; Bharatiya Nyaya Sanhita, 2023 (सब India Code से) और RBI के Commercial Banks – Responsible Business Conduct Directions, 2025 से जाँचा।

पन्ना बना: 07 अक्तू 2026 · आख़िरी जाँच: 07 अक्तू 2026
यह सामान्य जानकारी है, कानूनी या वित्तीय सलाह नहीं।