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शब्द · बैंकिंग✓ स्रोत से जाँचा · 7 Oct 2026

Notary Public

सरकार का नियुक्त किया वह व्यक्ति, जो काग़ज़ प्रमाणित करता है और शपथ दिलाता है

एक लाइन में

Notary Public वह व्यक्ति है, जिसे केंद्र या राज्य सरकार Notaries Act, 1952 के तहत notary नियुक्त करती है। वह काग़ज़ों का execution प्रमाणित कर सकता है, शपथ दिला सकता है और affidavit ले सकता है। उसका काम तभी notarial act माना जाता है, जब उस पर उसके दस्तख़त और official seal हों।

काम कब मान्यदस्तख़त + sealतभी वह notarial act माना जाता है
नियुक्त करती हैसरकारकेंद्र या राज्य सरकार
Certificate of practice5 सालफिर पाँच-पाँच साल के लिए renew
नक़ली notary की सज़ा1 साल तकजेल, या जुर्माना, या दोनों

मतलब

Notaries Act, 1952 के मुताबिक "notary" वह व्यक्ति है, जिसे इस Act के तहत notary नियुक्त किया गया हो। दूसरे क़ानूनों में जहाँ "notary public" लिखा है, वहाँ उसका मतलब वही notary है, जो इस Act के तहत practice का हक़दार है।[1]

Notary की नियुक्ति केंद्र सरकार (पूरे भारत या उसके किसी हिस्से के लिए) या राज्य सरकार (पूरे राज्य या उसके किसी हिस्से के लिए) करती है। नियुक्ति legal practitioners में से, या नियमों में तय योग्यता वाले दूसरे लोगों में से होती है।[1]

Notary क्या-क्या कर सकता है

  • काग़ज़ प्रमाणित करना: किसी instrument का execution verify, authenticate, certify या attest करना। "Instrument" में हर वह दस्तावेज़ शामिल है, जिससे कोई अधिकार या देनदारी बनती, बदलती, ख़त्म होती या दर्ज होती है।[1]
  • शपथ और affidavit: किसी व्यक्ति को शपथ दिलाना, या उससे Affidavit लेना।[1]
  • अनुवाद: दस्तावेज़ का एक भाषा से दूसरी भाषा में अनुवाद करना, और अनुवाद की जाँच करना।[1]
  • विदेश के लिए काग़ज़: भारत के बाहर काम आने वाले instrument को उस जगह के क़ानून के मुताबिक रूप और भाषा में तैयार, attest या authenticate करना।[1]
  • Promissory note और bill of exchange: इन्हें, या hundi को, स्वीकार या भुगतान के लिए पेश करना, और इनके dishonour को note या protest करना।[1]
  • अदालत के कहने पर: किसी दीवानी या फ़ौजदारी मुक़दमे में Commissioner बनकर गवाही दर्ज करना; और ज़रूरत हो, तो arbitrator, mediator या conciliator का काम करना।[1]

Notary का काम कब मान्य है

दूसरे क़ानूनों में जहाँ "notary public" लिखा है, वहाँ उसका मतलब वही notary है, जो इस Act के तहत practice का हक़दार है।

  • दस्तख़त और seal: notary का कोई काम तभी notarial act माना जाता है, जब वह उसके दस्तख़त और official seal के साथ किया गया हो।[1]
  • Seal: हर notary के पास नियमों में तय रूप और design की seal होनी चाहिए।[1]
  • Certificate of practice: यह पाँच साल के लिए मिलता है, और सरकार उसे एक बार में पाँच साल के लिए renew कर सकती है। चालू certificate के बिना कोई notary के तौर पर practice नहीं कर सकता।[1]
  • Register: केंद्र और हर राज्य सरकार अपने नियुक्त किए notaries का Register रखती है। उसमें notary का पूरा नाम, जन्म की तारीख़, घर और काम का पता, नाम दर्ज होने की तारीख़ और योग्यता दर्ज होती है।[1]
  • सालाना सूची: हर साल जनवरी में सरकार अपने notaries की सूची Official Gazette में छापती है।[1]

नक़ली या ग़लत notary

  • सज़ा: जो व्यक्ति notary नियुक्त हुए बिना ख़ुद को notary बताए, या चालू certificate के बिना notary के तौर पर practice या कोई notarial act करे, उसे एक साल तक की जेल, या जुर्माना, या दोनों हो सकते हैं।[1]
  • Register से नाम हटना: जाँच में notary ऐसे professional या दूसरे misconduct का दोषी पाया जाए, जो उसे notary के लायक़ न रहने दे, तो सरकार उसका नाम Register से हटा सकती है। Moral turpitude वाले अपराध में दोषी ठहरने, या certificate renew न कराने पर भी नाम हट सकता है।[1]
  • Fees: notarial act के लिए notary को दी जाने वाली fees केंद्र सरकार के नियमों से तय की जा सकती है।[1]

Bank और अदालत के काम में

  • मृतक के जमा खाते का दावा: दावा क़ानूनी वारिस करें, रकम ₹15 लाख की सीमा से ऊपर हो और Succession Certificate न दिया जा रहा हो, तो Legal Heir Certificate की जगह एक स्वतंत्र व्यक्ति का affidavit दिया जा सकता है, जो Notary Public, Judge या Judicial Magistrate के सामने शपथ लेकर दिया गया हो।[3]
  • Locker का दावा: सरल प्रक्रिया वाले दावे में भी Legal Heir Certificate, या Notary Public, Judge या Judicial Magistrate के सामने शपथ लेकर दिया गया affidavit लगता है।[3]
  • विदेश में हुई मृत्यु: bank मृत्यु के प्रमाण की वह original certified copy मानता है, जो उसी देश में तय तरीक़ों में से किसी एक से प्रमाणित हो; इनमें से एक तरीक़ा court magistrate, judge या notary public से प्रमाणित कराना है।[3]
  • अदालत का affidavit: फ़ौजदारी अदालत में देने वाला affidavit Judge, Magistrate या Commissioner of Oaths के अलावा notary के सामने भी बनाया जा सकता है।[2]
  • विदेशी notary: केंद्र सरकार Official Gazette में अधिसूचना से घोषित कर सकती है कि किसी देश के notaries के notarial acts भारत में माने जाएँगे, अगर उस देश में भारत के notaries के notarial acts माने जाते हों।[1]

आम ग़लतफ़हमी

✕ ग़लतफ़हमी"Notary के दस्तख़त काफ़ी हैं; मुहर ज़रूरी नहीं।"
✓ सचग़लत। Notaries Act की धारा 8 के मुताबिक notary का काम तभी notarial act माना जाता है, जब वह उसके दस्तख़त और official seal के साथ किया गया हो।[1]
✕ ग़लतफ़हमी"कोई भी वकील notary का काम कर सकता है।"
✓ सचनहीं। Notary सरकार नियुक्त करती है, और चालू certificate of practice के बिना कोई notary के तौर पर काम नहीं कर सकता। बिना नियुक्ति के ख़ुद को notary बताने, या बिना certificate के notary का काम करने पर एक साल तक की जेल, या जुर्माना, या दोनों हो सकते हैं।[1]
✕ ग़लतफ़हमी"Notary का certificate एक बार मिल गया, तो हमेशा चलता है।"
✓ सचनहीं। Certificate of practice पाँच साल के लिए होता है, और सरकार उसे एक बार में पाँच साल के लिए renew करती है। Renew न कराने पर सरकार notary का नाम Register से हटा सकती है।[1]
✕ ग़लतफ़हमी"Notary का काम सिर्फ़ affidavit बनाना है।"
✓ सचनहीं। Act में उसके कई काम गिनाए गए हैं: काग़ज़ों का execution प्रमाणित करना, शपथ दिलाना, दस्तावेज़ का अनुवाद और उसकी जाँच, और विदेश में काम आने वाले काग़ज़ तैयार या प्रमाणित करना।[1]

आपका अधिकार

Notary का काम तभी notarial act है, जब उस पर उसके दस्तख़त और official seal, दोनों हों।[1]
  • चालू certificate: चालू certificate of practice के बिना कोई notary के तौर पर काम नहीं कर सकता।[1]
  • सरकारी सूची: सरकार हर साल जनवरी में अपने notaries की सूची Official Gazette में छापती है।[1]

अभी क्या करें

  • Notary से बनवाए काग़ज़ पर उसके दस्तख़त और official seal, दोनों देख लीजिए।[1]
  • शक हो, तो notary से उसका certificate of practice दिखाने को कहिए; चालू certificate के बिना वह practice नहीं कर सकता।[1]
  • मृतक के जमा खाते का दावा ₹15 लाख की सीमा से ऊपर हो और आप affidavit का रास्ता लें, तो उसे Notary Public, Judge या Judicial Magistrate के सामने शपथ लेकर बनवाइए।[3]
  • मृत्यु विदेश में हुई हो, तो वहाँ का मृत्यु का प्रमाण उसी देश में प्रमाणित कराइए; notary public से प्रमाणित कराना तय तरीक़ों में से एक है।[3]

सवाल-जवाब

Notary Public कौन होता है?Notaries Act, 1952 की धारा 2 के मुताबिक "notary" वह व्यक्ति है, जिसे इस Act के तहत notary नियुक्त किया गया हो। धारा 11 के मुताबिक किसी दूसरे क़ानून में "notary public" का मतलब वही notary है, जो इस Act के तहत practice का हक़दार है।
Notary कौन नियुक्त करता है?धारा 3 के मुताबिक केंद्र सरकार पूरे भारत या उसके किसी हिस्से के लिए, और राज्य सरकार पूरे राज्य या उसके किसी हिस्से के लिए, notary नियुक्त कर सकती है। नियुक्ति legal practitioners (advocates) में से, या नियमों में तय योग्यता वाले दूसरे लोगों में से होती है।
Notary क्या-क्या कर सकता है?धारा 8 के मुताबिक, दूसरे कामों के साथ: किसी instrument का execution verify, authenticate, certify या attest करना; किसी व्यक्ति को शपथ दिलाना या उससे affidavit लेना; दस्तावेज़ का एक भाषा से दूसरी भाषा में अनुवाद करना और अनुवाद की जाँच करना; भारत के बाहर काम आने वाले instrument तैयार, attest या authenticate करना; promissory note, hundi या bill of exchange को पेश करना और उसके dishonour को note या protest करना; और अदालत कहे, तो Commissioner बनकर गवाही दर्ज करना।
Instrument का क्या मतलब है?धारा 2 के मुताबिक "instrument" में हर वह दस्तावेज़ शामिल है, जिससे कोई अधिकार या देनदारी बनती, बदलती, सीमित होती, बढ़ती, रुकती, ख़त्म होती या दर्ज होती है।
Notary का काम कब मान्य है?धारा 8 के मुताबिक उसका कोई काम तभी notarial act माना जाता है, जब वह उसके दस्तख़त और official seal के साथ किया गया हो। धारा 7 के मुताबिक हर notary के पास नियमों में तय रूप और design की seal होनी चाहिए।
Certificate of practice क्या है?धारा 5 के मुताबिक जो notary practice करना चाहता है, वह तय fee देकर सरकार के Register में अपना नाम दर्ज करा सकता है और पाँच साल के लिए practice का certificate पा सकता है। सरकार यह certificate एक बार में पाँच साल के लिए renew कर सकती है। धारा 9 के मुताबिक चालू certificate के बिना कोई notary के तौर पर practice नहीं कर सकता।
कैसे पता चले कि notary असली है?धारा 4 के मुताबिक केंद्र और हर राज्य सरकार अपने नियुक्त किए notaries का Register रखती है, जिसमें notary का पूरा नाम, जन्म की तारीख़, घर और काम का पता, Register में नाम दर्ज होने की तारीख़ और योग्यता दर्ज होती है। धारा 6 के मुताबिक हर साल जनवरी में सरकार अपने notaries की सूची Official Gazette में छापती है।
नक़ली notary की सज़ा क्या है?धारा 12 के मुताबिक जो व्यक्ति notary नियुक्त हुए बिना ख़ुद को notary बताए, या चालू certificate के बिना notary के तौर पर practice या कोई notarial act करे, उसे एक साल तक की जेल, या जुर्माना, या दोनों हो सकते हैं।
Notary का नाम Register से कब हट सकता है?धारा 10 के मुताबिक सरकार इन हालात में नाम हटा सकती है: notary ख़ुद कहे; उसने तय fee न दी हो; वह undischarged insolvent हो; तय तरीक़े की जाँच में वह ऐसे professional या दूसरे misconduct का दोषी पाया जाए, जो उसे notary के लायक़ न रहने दे; अदालत उसे moral turpitude वाले अपराध में दोषी ठहराए; या वह certificate renew न कराए।
Notary की fees कौन तय करता है?धारा 15 के मुताबिक notarial act के लिए notary को दी जाने वाली fees केंद्र सरकार के बनाए नियमों से तय की जा सकती है।
अदालत के affidavit में notary की क्या भूमिका है?Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita, 2023 की धारा 333 के मुताबिक Sanhita के तहत किसी अदालत में देने वाला affidavit, Judge, Magistrate या Commissioner of Oaths के अलावा, Notaries Act के तहत नियुक्त notary के सामने भी बनाया जा सकता है।
Bank के दावे में notary कब चाहिए?RBI के निर्देशों के पैरा 290 के मुताबिक मृतक के जमा खाते का दावा ₹15 लाख की सीमा से ऊपर हो और Succession Certificate न दिया जा रहा हो, तो Legal Heir Certificate की जगह एक स्वतंत्र व्यक्ति का affidavit दिया जा सकता है, जो Notary Public, Judge या Judicial Magistrate के सामने शपथ लेकर दिया गया हो। पैरा 309 में locker के दावे के लिए भी यही लिखा है।
विदेश में हुई मृत्यु के प्रमाण में notary का क्या काम है?निर्देशों के पैरा 324 के मुताबिक bank मृत्यु के प्रमाण की वह original certified copy मानता है, जो उसी देश में तय तरीक़ों में से किसी एक से प्रमाणित हो। इन तरीक़ों में से एक है: court magistrate, judge या notary public से प्रमाणित कराना।
क्या विदेशी notary का काम भारत में माना जाता है?Notaries Act की धारा 14 के मुताबिक केंद्र सरकार को भरोसा हो कि किसी देश में भारत के notaries के notarial acts माने जाते हैं, तो वह Official Gazette में अधिसूचना से घोषित कर सकती है कि उस देश के notaries के notarial acts भारत में सभी, या अधिसूचना में बताए सीमित, कामों के लिए माने जाएँगे।

जुड़े शब्द

स्रोत

  1. India Code — The Notaries Act, 1952 (Act No. 53 of 1952), पाठ "As on the 15th January, 2026" ↗किस बात के लिए, दस्तावेज़ का कौन-सा हिस्सा
    • धारा 2"notary" और "instrument" की परिभाषा
    • धारा 3नियुक्ति: केंद्र या राज्य सरकार; किन लोगों में से
    • धारा 4Register और उसमें दर्ज ब्योरे
    • धारा 5certificate of practice: पाँच साल; renew
    • धारा 6हर जनवरी Official Gazette में notaries की सूची
    • धारा 7notary की seal
    • धारा 8(1)notary के काम
    • धारा 8(2)दस्तख़त और official seal के साथ ही notarial act
    • धारा 9चालू certificate के बिना practice नहीं
    • धारा 10Register से नाम हटना
    • धारा 11दूसरे क़ानूनों में "notary public" का मतलब
    • धारा 12नक़ली notary की सज़ा
    • धारा 14विदेशी notaries के notarial acts की मान्यता
    • धारा 15fees नियमों से तय की जा सकती है
  2. India Code — The Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita, 2023 (Act No. 46 of 2023), पाठ "As on the 6th October, 2025" ↗किस बात के लिए, दस्तावेज़ का कौन-सा हिस्सा
    • धारा 333(1)अदालती affidavit notary के सामने भी बन सकता है
  3. RBI — Reserve Bank of India (Commercial Banks – Responsible Business Conduct) Directions, 2025 (RBI/DOR/2025-26/170; Updated as on October 1, 2026) ↗जारी: 28 नव 2025किस बात के लिए, दस्तावेज़ का कौन-सा हिस्सा
    • पैरा 290सीमा से ऊपर के दावे में Notary Public के सामने शपथ वाला affidavit
    • पैरा 309locker के दावे में वही
    • पैरा 324विदेश में हुई मृत्यु का प्रमाण: notary public से प्रमाणित copy

सुधार का इतिहास

  • पन्ना बना। Notaries Act, 1952 (India Code, पाठ "As on the 15th January, 2026"), Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita, 2023 और RBI के Commercial Banks – Responsible Business Conduct Directions, 2025 से जाँचा।

पन्ना बना: 07 अक्तू 2026 · आख़िरी जाँच: 07 अक्तू 2026
यह सामान्य जानकारी है, कानूनी या वित्तीय सलाह नहीं।