1मतलब
Indian Contract Act, 1872 की धारा 124 के मुताबिक "contract of indemnity" वह contract है, जिसमें एक पक्ष दूसरे को उस नुकसान से बचाने का वादा करता है, जो वादा करने वाले के अपने काम से, या किसी और व्यक्ति के काम से उसे हो।[2]
RBI के निर्देशों में दिया गया 'Bond of Indemnity' ऐसा ही लिखित वादा है। इसमें दावा करने वाले लिखते हैं कि bank के उन्हें रकम देने की वजह से bank पर जो भी दावे, माँगें, कार्यवाही, नुकसान, charges और ख़र्च आएँ, उनकी भरपाई वे करेंगे।[1]
2इसका मतलब आपके लिए क्या है
- Nominee हो, तो नहीं: nominee या survivor को भुगतान करते समय bank उनसे या किसी तीसरे व्यक्ति से indemnity bond या surety नहीं माँग सकता, रकम चाहे जितनी हो।[1]
- ₹15 लाख की सीमा तक, nominee के बिना: दावा क़ानूनी वारिस करते हैं, और दावा करने वालों का indemnity bond लगता है। तीसरे व्यक्ति का surety bond bank नहीं ले सकता।[1]
- सीमा से ऊपर, पहला रास्ता: Succession Certificate के साथ सिर्फ़ claim form, death certificate और पहचान का काग़ज़ लगता है; bond नहीं।[1]
- सीमा से ऊपर, दूसरा रास्ता: Legal Heir Certificate या शपथ लेकर दिए गए affidavit के साथ indemnity bond लगता है, और bank तीसरे व्यक्ति का surety bond भी माँग सकता है।[1]
- वसीयत वाला दावा: Probate of Will या Letter of Administration पर निपटे, तो bond नहीं लगता। Bank probate के बिना वसीयत के मुताबिक चले, तो indemnity bond और बाक़ी वारिसों का no-objection लगता है।[1]
- Locker: nominee या survivor से bond नहीं लगता, जब तक nomination में कोई discrepancy न हो। Nominee न हो, तो bond देने के बाद सामान निकाला जा सकता है; दावा Probate of Will, Succession Certificate, Letter of Administration या अदालत के आदेश पर निपटे, तो bond नहीं लगता।[1]
3Bond में क्या लिखा होता है
RBI के format के ऊपर लिखा है कि यह bond मृतक ग्राहक के जमा खातों का दावा 'without production of Legal Documents' निपटाने के लिए है।
- किसके नाम: bond bank के Branch Manager के नाम होता है।[1]
- ब्योरा: दावा करने वालों के नाम, और मृतक के जमा खातों का ब्योरा: खाते की क़िस्म, खाता number, रकम, और term deposit हो, तो maturity की तारीख़।[1]
- वादा: दस्तख़त करने वाले bank को, उसके अधिकारियों और Directors को, और उसके successors और assignees को, इस भुगतान की वजह से आने वाले सभी दावों, माँगों, कार्यवाही, नुकसान, charges और ख़र्च से indemnify करने का वादा करते हैं।[1]
- किन पर लागू: दस्तख़त करने वालों पर, और उनके वारिसों, legal representatives, executors और administrators पर भी; सब पर jointly and severally।[1]
- Stamp: format पर लिखा है कि bond पर राज्य में लागू Stamp Act के मुताबिक stamp लगना चाहिए।[1]
- Surety: format में sureties के दस्तख़त की जगह भी है, पर वह सिर्फ़ सीमा से ऊपर के दावों के लिए है। Surety से bank नाम, पता, काम, आय और संपत्ति जैसी जानकारी लेता है।[1]
- Locker का bond: उसमें locker के सामान का ब्योरा, description, वज़न और valuation लिखा जाता है; valuation bank भरता है।[1]
4Indemnity और surety, क़ानून में
- Indemnity पाने वाले के अधिकार: धारा 125 के मुताबिक जिसे indemnity दी गई है, उस पर मुक़दमा हो, तो वह अपने अधिकार के दायरे में काम करते हुए वादा करने वाले से वह हर्जाना वसूल सकता है, जो उसे उस मामले में देना पड़े।[2]
- ख़र्च और समझौता: धारा 125 में लिखी शर्तों पर वह मुक़दमे का ख़र्च, और मुक़दमे के समझौते में दी गई रकम भी वसूल सकता है।[2]
- Surety कौन है: धारा 126 के मुताबिक "contract of guarantee" किसी तीसरे व्यक्ति के चूकने पर उसका वादा निभाने, या उसकी देनदारी चुकाने का contract है; guarantee देने वाले को "surety" कहते हैं।[2]
- Surety की देनदारी: धारा 128 के मुताबिक surety की देनदारी उतनी ही होती है, जितनी principal debtor की, जब तक contract में कुछ और न लिखा हो।[2]
5आम ग़लतफ़हमी
6आपका अधिकार
- ₹15 लाख की सीमा तक: तीसरे व्यक्ति का surety bond नहीं लिया जा सकता।[1]
- वसीयत या विवाद वाले दावे: इनमें भी तीसरे व्यक्ति का surety bond नहीं लिया जा सकता।[1]
- Standard forms: bank को दावे के standard forms अपनी सभी शाखाओं और website पर रखने हैं।[1]
7अभी क्या करें
- Bond का format bank की शाखा या website से लीजिए; bank को RBI के तय किए हुए standard forms ही इस्तेमाल करने हैं।[1]
- दस्तख़त से पहले पढ़ लीजिए कि आप क्या वादा कर रहे हैं: बाद में bank पर इस भुगतान को लेकर दावा आया, तो भरपाई आपको करनी होगी।[1]
- Bond पर अपने राज्य के Stamp Act के मुताबिक stamp लगवाइए।[1]
- जो वारिस दावा नहीं कर रहे, उनका disclaimer या no-objection letter भी साथ लगाइए, जहाँ लागू हो।[1]
- दावा ₹15 लाख की सीमा के भीतर हो और bank तीसरे व्यक्ति का surety माँगे, तो बताइए कि RBI के निर्देशों में इसकी मनाही है।[1]
8सवाल-जवाब
9जुड़े शब्द
10स्रोत
- RBI — Reserve Bank of India (Commercial Banks – Responsible Business Conduct) Directions, 2025 (RBI/DOR/2025-26/170; Updated as on October 1, 2026) ↗किस बात के लिए, दस्तावेज़ का कौन-सा हिस्सा
- पैरा 286nominee या survivor से indemnity bond या surety नहीं
- पैरा 288 और 289₹15 लाख की सीमा तक: दावा करने वालों का bond; तीसरे व्यक्ति का surety नहीं
- पैरा 290सीमा से ऊपर के दो रास्ते; surety bond कब
- पैरा 291, 292, 293 और 294वसीयत और विवाद वाले दावे; probate के बिना वसीयत पर bond; surety नहीं
- पैरा 306 और 313locker के दावे में bond कब लगता है और कब नहीं
- पैरा 315 और 316standard forms; शाखाओं और website पर
- Annex VIIdeposit खातों के bond का format; stamp; surety की जानकारी
- Annex XIIlocker के सामान के bond का format
- India Code — The Indian Contract Act, 1872 (Act No. 9 of 1872) ↗किस बात के लिए, दस्तावेज़ का कौन-सा हिस्सा
- धारा 124 और 125contract of indemnity की परिभाषा; indemnity पाने वाले के अधिकार
- धारा 126 और 128surety कौन है; surety की देनदारी
11सुधार का इतिहास
- पन्ना बना। RBI के Commercial Banks – Responsible Business Conduct Directions, 2025 (1 अक्टूबर 2026 तक update) और India Code पर Indian Contract Act, 1872 के पाठ से जाँचा।
पन्ना बना: 07 अक्तू 2026 · आख़िरी जाँच: 07 अक्तू 2026
यह सामान्य जानकारी है, कानूनी या वित्तीय सलाह नहीं।