सूचना डेस्क · भारत

सीधा मतलब | Seedha Matlab

Contact
शब्द · बैंकिंग✓ स्रोत से जाँचा · 7 Oct 2026

Death Certificate

मृत्यु के registration का प्रमाणपत्र, जो Registrar of Births and Deaths अपने register से देता है

एक लाइन में

Death Certificate मृत्यु के registration का प्रमाणपत्र है, जो उस इलाक़े का Registrar of Births and Deaths अपने register से देता है। मृत्यु की सूचना देने वाले को यह registration पूरा होने के सात दिन के अंदर, मुफ़्त मिलता है। मृतक के bank खाते या locker के दावे में इसकी copy लगती है, और original जाँच के लिए दिखाना होता है।

सूचना देने वाले को certificateमुफ़्तregistration पूरा होने के 7 दिन के अंदर
1 साल बाद registrationMagistrate का आदेशजाँच और fee के बाद ही
Certificate में मृत्यु की वजहनहीं होतीregister से जारी certificate में
Bank के दावे मेंCopy + originalcopy लगती है; original जाँच के लिए

मतलब

Death Certificate मृत्यु के registration का प्रमाणपत्र है। यह Registration of Births and Deaths Act, 1969 के तहत Registrar अपने register से देता है।[1]

Act में "death" का मतलब है: जीवित जन्म के बाद किसी भी समय जीवन के सारे लक्षणों का हमेशा के लिए ख़त्म हो जाना।[1]

Registrar या राज्य सरकार के अधिकृत किए अधिकारी का प्रमाणित certificate उस मृत्यु को साबित करने के लिए सबूत के तौर पर मान्य है।[1]

Death Certificate कैसे बनता है

सूचना देने का समय राज्य सरकार के नियमों में तय होता है। देर हो जाए, तब भी registration हो सकता है।

  • सूचना कौन देता है: घर में मृत्यु हो, तो घर या परिवार का मुखिया; वह घर में न हो, तो उसका सबसे क़रीबी रिश्तेदार, जो घर में मौजूद हो; और वह भी न हो, तो घर में मौजूद सबसे बड़ा वयस्क। अस्पताल, health centre या nursing home में मृत्यु हो, तो medical officer in charge या उसका अधिकृत किया व्यक्ति।[1]
  • कितने समय में: नियमों में तय समय के अंदर। ये नियम राज्य सरकार बनाती है, केंद्र सरकार की मंज़ूरी से।[1]
  • किस Registrar के पास: राज्य सरकार हर local area के लिए Registrar नियुक्त करती है, जैसे municipality या panchayat का इलाक़ा। Registrar उन्हीं मृत्युओं की जानकारी दर्ज करता है, जो उसके इलाक़े में हुई हों, और यह काम बिना किसी fee के करता है।[1]
  • Certificate: registration पूरा होते ही, और सात दिन से ज़्यादा देर किए बिना, Registrar सूचना देने वाले को अपने दस्तख़त से certificate मुफ़्त देता है। यह electronic रूप में भी दिया जा सकता है।[1]
  • बाद में certificate: कोई भी व्यक्ति Registrar से register में entry की खोज करवा सकता है और death certificate ले सकता है। इसकी fee और डाक-ख़र्च राज्य सरकार के नियमों से तय होते हैं।[1]
  • मृत्यु की वजह: register से किसी भी व्यक्ति को जारी death certificate में मृत्यु की वजह का ब्योरा नहीं दिया जाता।[1]
  • मृत्यु की वजह का certificate अलग है: मृत्यु किसी medical institution में हो, तो वह संस्था यह certificate मुफ़्त बनाकर Registrar को देती है, और उसकी copy सबसे क़रीबी रिश्तेदार को।[1]

सूचना देने में देर हो जाए

  • 30 दिन के अंदर: तय समय निकल जाए, पर सूचना मृत्यु के 30 दिन के अंदर दी जाए, तो late fee देकर registration होता है।[1]
  • 30 दिन के बाद, एक साल के अंदर: registration District Registrar या नियमों में तय authority की लिखित इजाज़त पर ही होता है; fee और self-attested दस्तावेज़ देना होता है।[1]
  • एक साल के बाद: registration District Magistrate, Sub-Divisional Magistrate, या District Magistrate के अधिकृत किए Executive Magistrate के आदेश पर ही होता है, जिसके इलाक़े में मृत्यु हुई हो। वह मृत्यु के सही होने की जाँच करता है, और fee लगती है।[1]
  • जुर्माना: बिना उचित कारण के सूचना न देने पर ₹250 तक जुर्माना हो सकता है। अस्पताल, jail या hostel जैसी जगहों के ज़िम्मेदार व्यक्तियों के लिए यह हर मृत्यु पर ₹1,000 तक है।[1]

ग़लती, इनकार और अपील

  • Entry में ग़लती: Registrar को यह साबित हो जाए कि entry ग़लत है, या धोखे से या ग़लत तरीक़े से की गई है, तो वह राज्य सरकार के नियमों के तहत उसे सुधार या रद्द कर सकता है। मूल entry बदली नहीं जाती; हाशिये में नई entry की जाती है, दस्तख़त और तारीख़ के साथ।[1]
  • अपील: Registrar के किसी काम या आदेश के ख़िलाफ़ District Registrar के पास, और District Registrar के ख़िलाफ़ Chief Registrar के पास, 30 दिन के अंदर अपील की जा सकती है। अपील का फ़ैसला 90 दिन के अंदर होना है।[1]
  • Registrar की लापरवाही: बिना उचित कारण के registration से, या सूचना देने वाले को certificate देने से, मना करने या लापरवाही करने वाले Registrar पर ₹250 तक जुर्माना हो सकता है।[1]

Bank के दावे में death certificate

  • दावे के काग़ज़ों में: Nominee या survivor से bank तीन काग़ज़ लेता है: claim form, death certificate और Officially Valid Document। Nominee न हो और दावा क़ानूनी वारिस करें, तब भी death certificate तय काग़ज़ों में है। Locker के दावों में भी यह लगता है।[2]
  • Copy और original: RBI के निर्देशों के claim form में death certificate का number, तारीख़ और जारी करने वाले authority का नाम भरना होता है। Copy साथ लगती है, और original जाँच के लिए दिखाना होता है।[2]
  • खाताधारक लापता हो: nominee या क़ानूनी वारिसों को अदालत से आदेश लेना होता है, और death certificate की जगह civil death घोषित करने वाले उस आदेश की copy लगती है। कुल रकम, ब्याज समेत, ₹1 लाख से कम हो (या bank की तय की हुई इससे ऊँची रकम से कम), तो इनकी जगह FIR की copy और पुलिस की non-traceable report ली जाती है।[2]
  • मृत्यु भारत के बाहर हुई हो: bank मृत्यु के प्रमाण की वह original certified copy मानता है, जो उसी देश में इनमें से किसी एक तरीक़े से प्रमाणित हो: भारत में registered Scheduled Commercial Bank की विदेशी शाखा के authorised अधिकारी से; भारतीय banks से correspondent रिश्ता रखने वाले विदेशी bank की शाखा से; court magistrate, judge या notary public से; भारतीय दूतावास या Consulate General से; या Apostille से।[2]
  • विदेश में मृत्यु का registration: भारत के बाहर भारतीय नागरिकों की मृत्यु की जो सूचना Indian Consulates में registration के नियमों के तहत Registrar General of India को मिलती है, वह दर्ज की जाती है, और यह registration इस Act के तहत हुआ माना जाता है।[1]

आम ग़लतफ़हमी

✕ ग़लतफ़हमी"Death certificate के लिए हर बार fee देनी पड़ती है।"
✓ सचनहीं। मृत्यु की सूचना देने वाले को Registrar, registration पूरा होने के सात दिन के अंदर, certificate मुफ़्त देता है। बाद में register से certificate लेने की fee राज्य सरकार के नियमों से तय होती है।[1]
✕ ग़लतफ़हमी"एक साल निकल गया, तो अब मृत्यु का registration नहीं हो सकता।"
✓ सचहो सकता है। एक साल के बाद registration District Magistrate, Sub-Divisional Magistrate, या District Magistrate के अधिकृत किए Executive Magistrate के आदेश पर होता है। वह मृत्यु के सही होने की जाँच करता है, और fee लगती है।[1]
✕ ग़लतफ़हमी"Death certificate में मृत्यु की वजह लिखी होती है।"
✓ सचनहीं। Act की धारा 17 के मुताबिक register से किसी भी व्यक्ति को जारी death certificate में मृत्यु की वजह का ब्योरा नहीं दिया जाता।[1]
✕ ग़लतफ़हमी"खाताधारक लापता है, तो death certificate के बिना bank में दावा हो ही नहीं सकता।"
✓ सचहो सकता है। तब death certificate की जगह अदालत के उस आदेश की copy लगती है, जिसमें खाताधारक की civil death घोषित हो। कुल रकम ₹1 लाख से कम हो (या bank की तय की हुई इससे ऊँची रकम से कम), तो FIR की copy और पुलिस की non-traceable report ली जाती है।[2]

आपका अधिकार

मृत्यु की सूचना देने वाले को death certificate registration पूरा होने के सात दिन के अंदर, मुफ़्त मिलना है।[1]
  • अपील का अधिकार: Registrar के किसी काम या आदेश के ख़िलाफ़ 30 दिन के अंदर District Registrar के पास अपील की जा सकती है।[1]
  • Bank में: nominee या survivor से bank claim form, death certificate और Officially Valid Document ही लेता है; Succession Certificate जैसे क़ानूनी काग़ज़ नहीं माँग सकता।[2]

अभी क्या करें

  • मृत्यु घर में हुई हो, तो उस इलाक़े के Registrar को नियमों में तय समय के अंदर सूचना दीजिए; देर होने पर late fee, इजाज़त या Magistrate के आदेश की शर्तें लगती हैं।[1]
  • मृत्यु अस्पताल में हुई हो, तो सूचना देना medical officer in charge की ज़िम्मेदारी है; मृत्यु की वजह के certificate की copy सबसे क़रीबी रिश्तेदार को मिलनी है।[1]
  • Certificate में कोई ग़लती दिखे, तो Registrar से entry का सुधार करवाइए।[1]
  • Bank के दावे में death certificate की copy लगाइए और original साथ ले जाइए; उसे जाँच के लिए दिखाना होता है।[2]
  • Registrar registration या certificate से मना करे, तो 30 दिन के अंदर District Registrar के पास अपील कीजिए।[1]

सवाल-जवाब

Death Certificate क्या है?यह मृत्यु के registration का प्रमाणपत्र है, जो Registration of Births and Deaths Act, 1969 के तहत Registrar अपने register से देता है। Act की धारा 17 के मुताबिक Registrar या राज्य सरकार के अधिकृत किए अधिकारी का प्रमाणित certificate उस मृत्यु को साबित करने के लिए सबूत के तौर पर मान्य है।
मृत्यु की सूचना Registrar को कौन देता है?धारा 8 के मुताबिक: घर में मृत्यु हो, तो घर या परिवार का मुखिया; वह घर में न हो, तो उसका सबसे क़रीबी रिश्तेदार, जो घर में मौजूद हो; और वह भी न हो, तो घर में मौजूद सबसे बड़ा वयस्क। अस्पताल, health centre या nursing home में मृत्यु हो, तो medical officer in charge या उसका अधिकृत किया व्यक्ति। Jail में jailor; और hostel, धर्मशाला या lodging-house जैसी जगह में उसका प्रभारी।
सूचना कितने समय में देनी होती है?धारा 8 के मुताबिक नियमों में तय समय के अंदर। धारा 30 के मुताबिक ये नियम राज्य सरकार बनाती है, केंद्र सरकार की मंज़ूरी से।
Registration कहाँ होता है?धारा 7 के मुताबिक राज्य सरकार हर local area के लिए Registrar नियुक्त करती है, जैसे municipality या panchayat का इलाक़ा। Registrar उन्हीं मृत्युओं की जानकारी दर्ज करता है, जो उसके इलाक़े में हुई हों, और यह काम बिना किसी fee के करता है।
Death certificate कब और कितने में मिलता है?धारा 12 के मुताबिक registration पूरा होते ही, और सात दिन से ज़्यादा देर किए बिना, Registrar सूचना देने वाले को अपने दस्तख़त से certificate मुफ़्त देता है। यह electronic रूप में भी दिया जा सकता है।
बाद में certificate चाहिए हो, तो?धारा 17 के मुताबिक कोई भी व्यक्ति Registrar से register में entry की खोज करवा सकता है और death certificate ले सकता है। इसकी fee और डाक-ख़र्च राज्य सरकार के नियमों से तय होते हैं।
सूचना देने में देर हो गई, तो?धारा 13 के मुताबिक: तय समय निकल जाए, पर सूचना मृत्यु के 30 दिन के अंदर दी जाए, तो late fee देकर registration होता है। 30 दिन के बाद, पर एक साल के अंदर, District Registrar या नियमों में तय authority की लिखित इजाज़त, fee और self-attested दस्तावेज़ पर। एक साल के बाद, District Magistrate, Sub-Divisional Magistrate या District Magistrate के अधिकृत किए Executive Magistrate के आदेश पर, जाँच और fee के बाद।
Register की entry में ग़लती हो, तो?धारा 15 के मुताबिक Registrar को यह साबित हो जाए कि entry ग़लत है, या धोखे से या ग़लत तरीक़े से की गई है, तो वह राज्य सरकार के नियमों के तहत उसे सुधार या रद्द कर सकता है। मूल entry बदली नहीं जाती; हाशिये में नई entry की जाती है, दस्तख़त और तारीख़ के साथ।
Registrar registration या certificate से मना करे, तो?धारा 25A के मुताबिक Registrar के किसी काम या आदेश के ख़िलाफ़ District Registrar के पास, और District Registrar के ख़िलाफ़ Chief Registrar के पास, 30 दिन के अंदर अपील की जा सकती है; अपील का फ़ैसला 90 दिन के अंदर होना है। धारा 23 के मुताबिक बिना उचित कारण के registration से, या सूचना देने वाले को certificate देने से, मना करने या लापरवाही करने वाले Registrar पर ₹250 तक जुर्माना हो सकता है।
मृत्यु की वजह का certificate क्या है?यह death certificate से अलग है। धारा 10 के मुताबिक मृत्यु किसी medical institution में हो, तो वह संस्था मृत्यु की वजह का certificate मुफ़्त बनाकर Registrar को देती है, और उसकी copy सबसे क़रीबी रिश्तेदार को। मृत्यु कहीं और हो और आख़िरी बीमारी में किसी medical practitioner ने इलाज किया हो, तो वह यह certificate मुफ़्त, सूचना देने वाले व्यक्ति को देता है, जो उसे Registrar को सौंपता है।
सूचना न देने पर क्या जुर्माना है?धारा 23 के मुताबिक बिना उचित कारण के सूचना न देने पर, या जानबूझकर ग़लत जानकारी देने पर, ₹250 तक जुर्माना हो सकता है। अस्पताल, jail या hostel जैसी जगहों के ज़िम्मेदार व्यक्तियों के लिए यह हर मृत्यु पर ₹1,000 तक है।
Bank के दावे में death certificate कैसे लगता है?RBI के निर्देशों के claim form (Annex V और VI) में death certificate का number, तारीख़ और जारी करने वाले authority का नाम भरना होता है। Copy साथ लगती है, और original जाँच के लिए दिखाना होता है।
खाताधारक लापता हो, तो death certificate की जगह क्या लगता है?निर्देशों के पैरा 298 के मुताबिक nominee या क़ानूनी वारिसों को Bharatiya Sakshya Adhiniyam, 2023 की धारा 110 या 111 के तहत अदालत से आदेश लेना होता है, और death certificate की जगह civil death घोषित करने वाले उस आदेश की copy लगती है। कुल रकम, ब्याज समेत, ₹1 लाख से कम हो (या bank की तय की हुई इससे ऊँची रकम से कम), तो इनकी जगह FIR की copy और पुलिस की non-traceable report ली जाती है।
मृत्यु भारत के बाहर हुई हो, तो?निर्देशों के पैरा 324 के मुताबिक bank मृत्यु के प्रमाण की वह original certified copy मानता है, जो उसी देश में इनमें से किसी एक तरीक़े से प्रमाणित हो: भारत में registered Scheduled Commercial Bank की विदेशी शाखा के authorised अधिकारी से; भारतीय banks से correspondent रिश्ता रखने वाले विदेशी bank की शाखा से; court magistrate, judge या notary public से; भारतीय दूतावास या Consulate General से; या Apostille से।
RBI के ये नियम किन banks पर लागू हैं?ये RBI के commercial banks के लिए बने निर्देश हैं। इनके पैरा 3 में Small Finance Banks, Payments Banks और Local Area Banks 'commercial banks' में नहीं गिने गए हैं।

जुड़े शब्द

स्रोत

  1. India Code — The Registration of Births and Deaths Act, 1969 (Act No. 18 of 1969), पाठ "As on the 26th Sep, 2025" ↗किस बात के लिए, दस्तावेज़ का कौन-सा हिस्सा
    • धारा 2"death" की परिभाषा
    • धारा 7Registrar की नियुक्ति; अपने इलाक़े की मृत्यु; बिना fee दर्ज करना
    • धारा 8सूचना कौन देता है; नियमों में तय समय
    • धारा 10मृत्यु की वजह का certificate, मुफ़्त
    • धारा 12सूचना देने वाले को सात दिन के अंदर, मुफ़्त certificate
    • धारा 13देर से registration: 30 दिन; एक साल; Magistrate का आदेश
    • धारा 15entry का सुधार या रद्द होना
    • धारा 17खोज और certificate; मृत्यु की वजह नहीं; सबूत के तौर पर मान्य
    • धारा 20भारत के बाहर भारतीय नागरिकों की मृत्यु
    • धारा 23जुर्माने: सूचना न देना; Registrar का मना करना
    • धारा 25Aअपील: 30 दिन; फ़ैसला 90 दिन में
    • धारा 30नियम राज्य सरकार बनाती है
  2. RBI — Reserve Bank of India (Commercial Banks – Responsible Business Conduct) Directions, 2025 (RBI/DOR/2025-26/170; Updated as on October 1, 2026) ↗जारी: 28 नव 2025किस बात के लिए, दस्तावेज़ का कौन-सा हिस्सा
    • पैरा 3ये निर्देश किन banks पर लागू हैं
    • पैरा 286nominee या survivor से तीन काग़ज़; क़ानूनी काग़ज़ नहीं
    • पैरा 288क़ानूनी वारिसों के दावे के काग़ज़
    • पैरा 298लापता खाताधारक: अदालत का आदेश; FIR और non-traceable report
    • पैरा 303locker: nominee या survivor के दावे के काग़ज़
    • पैरा 309locker: क़ानूनी वारिसों के दावे के काग़ज़
    • पैरा 324भारत के बाहर हुई मृत्यु का प्रमाण
    • Annex Vnominee या survivor का claim form: certificate का ब्योरा; copy और original
    • Annex VIबाक़ी दावों का claim form: certificate का ब्योरा; copy और original

सुधार का इतिहास

  • पन्ना बना। Registration of Births and Deaths Act, 1969 (India Code, पाठ "As on the 26th Sep, 2025") और RBI के Commercial Banks – Responsible Business Conduct Directions, 2025 (1 अक्टूबर 2026 तक update) से जाँचा।

पन्ना बना: 07 अक्तू 2026 · आख़िरी जाँच: 07 अक्तू 2026
यह सामान्य जानकारी है, कानूनी या वित्तीय सलाह नहीं।