1मतलब
FIR यानी First Information Report। Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita, 2023 के तहत संज्ञेय (cognizable) अपराध की जो सूचना पुलिस थाने के प्रभारी को दी जाती है और दर्ज की जाती है, वही FIR है।[1]
संज्ञेय अपराध वह है, जिसमें पुलिस अधिकारी बिना warrant गिरफ़्तार कर सकता है। Non-cognizable अपराध में उसे यह अधिकार नहीं है।[1]
2FIR कैसे दर्ज होती है
संज्ञेय (cognizable) अपराध वह है, जिसमें पुलिस बिना warrant गिरफ़्तार कर सकती है।
- कहाँ: संज्ञेय अपराध की सूचना थाने के प्रभारी को दी जा सकती है, अपराध चाहे किसी भी इलाक़े में हुआ हो।[1]
- ज़बानी सूचना: थाने का प्रभारी उसे लिखता या लिखवाता है, और सूचना देने वाले को पढ़कर सुनाता है। उस पर सूचना देने वाले के दस्तख़त होते हैं।[1]
- Electronic सूचना: यह तब record पर ली जाती है, जब सूचना देने वाला तीन दिन के अंदर उस पर दस्तख़त कर दे।[1]
- Copy: दर्ज की गई सूचना की copy सूचना देने वाले या पीड़ित को तुरंत और मुफ़्त दी जानी है।[1]
- महिला की सूचना: Bharatiya Nyaya Sanhita, 2023 की धारा 64 से 71, 74 से 79 या 124 के अपराध की सूचना वही महिला दे, जिसके ख़िलाफ़ अपराध हुआ या जिसकी कोशिश हुई, तो उसे महिला पुलिस अधिकारी या कोई महिला अधिकारी दर्ज करती है।[1]
- Preliminary enquiry: जिस संज्ञेय अपराध की सज़ा तीन साल या ज़्यादा, पर सात साल से कम है, उसकी सूचना मिलने पर थाने का प्रभारी, Deputy Superintendent of Police या उससे ऊपर के अधिकारी की पहले से ली गई इजाज़त से, 14 दिन के अंदर preliminary enquiry कर सकता है, यह देखने के लिए कि मामला आगे बढ़ाने लायक़ (prima facie case) बनता है या नहीं।[1]
- Non-cognizable अपराध: थाने का प्रभारी सूचना का सार अपनी book में दर्ज करता है और सूचना देने वाले को Magistrate के पास भेजता है। ऐसे मामले की जाँच पुलिस Magistrate के आदेश के बिना नहीं कर सकती।[1]
3पुलिस FIR दर्ज न करे
- Superintendent of Police को लिखिए: थाने का प्रभारी सूचना दर्ज करने से मना करे, तो सूचना का सार लिखकर, डाक से, संबंधित Superintendent of Police को भेजा जा सकता है।[1]
- वे क्या करेंगे: उन्हें लगे कि सूचना संज्ञेय अपराध बताती है, तो वे ख़ुद जाँच करेंगे, या किसी मातहत पुलिस अधिकारी से कराएँगे।[1]
- फिर Magistrate: ऐसा न हो, तो Magistrate को application दी जा सकती है। Magistrate affidavit के साथ दी गई ऐसी application पर, ज़रूरी पूछताछ और पुलिस अधिकारी की बात सुनने के बाद, जाँच का आदेश दे सकता है।[1]
4FIR के बाद
- 90 दिन में जानकारी: पुलिस अधिकारी को 90 दिन के अंदर जाँच की प्रगति की सूचना सूचना देने वाले या पीड़ित को देनी है; यह electronic communication से भी दी जा सकती है।[1]
- अदालत में copy: जो मामला police report पर शुरू हुआ हो, उसमें Magistrate आरोपी को, और पीड़ित को (अगर उसका वकील हो), police report और FIR की copy मुफ़्त देता है; आरोपी के पेश होने के 14 दिन के अंदर।[1]
5FIR और दूसरी शिकायतें
- cybercrime.gov.in की शिकायत: portal पर दर्ज घटना अपने-आप FIR नहीं है। उसे FIR में बदलना और आगे की कार्रवाई उस राज्य या केंद्र-शासित प्रदेश की पुलिस करती है।[2]
- Bank में लापता खाताधारक का दावा: कुल रकम, ब्याज समेत, ₹1 लाख से कम हो (या bank की तय की हुई इससे ऊँची रकम से कम), तो Death Certificate या अदालत के आदेश की जगह FIR की copy और पुलिस की non-traceable report ली जाती है।[3]
6आम ग़लतफ़हमी
7आपका अधिकार
- कोई भी इलाक़ा: संज्ञेय अपराध की सूचना थाने के प्रभारी को दी जा सकती है, अपराध चाहे किसी भी इलाक़े में हुआ हो।[1]
- जाँच की जानकारी: 90 दिन के अंदर जाँच की प्रगति की सूचना आपको दी जानी है।[1]
8अभी क्या करें
- सूचना ज़बानी दी हो, तो लिखी हुई सूचना पढ़वाकर सुनिए, और तभी दस्तख़त कीजिए।[1]
- दर्ज की गई सूचना की copy उसी समय लीजिए; यह मुफ़्त है।[1]
- सूचना electronic रूप में भेजी हो, तो तीन दिन के अंदर उस पर दस्तख़त कीजिए; तभी वह record पर ली जाती है।[1]
- थाना सूचना दर्ज करने से मना करे, तो उसका सार लिखकर डाक से Superintendent of Police को भेजिए।[1]
- cybercrime.gov.in पर शिकायत की हो, तो याद रखिए कि उसे FIR में बदलना राज्य की पुलिस का काम है।[2]
9सवाल-जवाब
10जुड़े शब्द
11स्रोत
- India Code — The Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita, 2023 (Act No. 46 of 2023), पाठ "As on the 6th October, 2025" ↗किस बात के लिए, दस्तावेज़ का कौन-सा हिस्सा
- धारा 2cognizable और non-cognizable अपराध की परिभाषा
- धारा 173(1)सूचना ज़बानी या electronic; किसी भी इलाक़े का अपराध; दस्तख़त; तीन दिन; महिला अधिकारी
- धारा 173(2)copy तुरंत और मुफ़्त
- धारा 173(3)तीन से सात साल से कम सज़ा: 14 दिन में preliminary enquiry
- धारा 173(4)मना करने पर Superintendent of Police को डाक से; फिर Magistrate
- धारा 174non-cognizable अपराध की सूचना
- धारा 175Magistrate जाँच का आदेश दे सकता है
- धारा 19390 दिन के अंदर जाँच की प्रगति की सूचना
- धारा 230"first information report" शब्द; आरोपी और पीड़ित को copy
- गृह मंत्रालय (PIB) — National Cyber Crime Reporting Portal, लोकसभा में लिखित उत्तर, 9 मार्च 2021 (Release ID 1703509) ↗किस बात के लिए, दस्तावेज़ का कौन-सा हिस्सा
- पैरा 2portal की घटनाओं को FIR में बदलना और आगे की कार्रवाई राज्य / केंद्र-शासित प्रदेश की पुलिस करती है
- RBI — Reserve Bank of India (Commercial Banks – Responsible Business Conduct) Directions, 2025 (RBI/DOR/2025-26/170; Updated as on October 1, 2026) ↗किस बात के लिए, दस्तावेज़ का कौन-सा हिस्सा
- पैरा 298लापता खाताधारक: ₹1 लाख से कम में FIR की copy और non-traceable report
12सुधार का इतिहास
- पन्ना बना। Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita, 2023 (India Code, पाठ "As on the 6th October, 2025"), गृह मंत्रालय के 9 मार्च 2021 के लोकसभा उत्तर (PIB) और RBI के Commercial Banks – Responsible Business Conduct Directions, 2025 से जाँचा।
पन्ना बना: 07 अक्तू 2026 · आख़िरी जाँच: 07 अक्तू 2026
यह सामान्य जानकारी है, कानूनी या वित्तीय सलाह नहीं।