1मतलब
Legal heir का मतलब है क़ानूनी वारिस। RBI के निर्देश इस शब्द को मृतक खाताधारक के वारिसों के लिए इस्तेमाल करते हैं। Nominee न हो, तो bank में पड़ी रकम या locker के सामान का दावा वही करते हैं; और nominee हो, तो वह भी रकम उन्हीं के trustee के तौर पर लेता है।[1]
इन निर्देशों में 'legal heir' की अलग परिभाषा नहीं दी गई है।[1] किस परिवार में कौन वारिस होता है, यह इस पन्ने में नहीं बताया गया है। यह पन्ना सिर्फ़ bank में दावे की प्रक्रिया के बारे में है।
दावे के ये निर्देश 1 अप्रैल 2026 से लागू हैं।[1]
2इसका मतलब आपके लिए क्या है
- ₹15 लाख की सीमा तक सरल प्रक्रिया: nominee न हो, और कोई वसीयत, आपसी विवाद या अदालत की रोक भी न हो, तो इस सीमा तक के दावे में bank को सरल प्रक्रिया अपनानी है।[1]
- Bank सीमा बढ़ा सकता है: सीमा ₹15 लाख है, या bank की तय की हुई इससे ऊँची कोई सीमा।[1]
- किसी भी शाखा में दावा: दावा bank की किसी भी शाखा में दिया जा सकता है, और bank को उसकी पावती देनी है।[1]
- Forms और सूची website पर: bank को दावे के forms अपनी सभी शाखाओं और website पर रखने हैं, और website पर यह भी बताना है कि किस हालत में कौन-से काग़ज़ लगेंगे।[1]
- 15 calendar दिन: सारे ज़रूरी काग़ज़ मिलने के 15 calendar दिन के भीतर bank को deposit खाते का दावा निपटाना है।[1]
3दावा कैसे होता है
ये निर्देश 1 अप्रैल 2026 से लागू हैं। ये PPF और SCSS जैसी सरकारी बचत योजनाओं पर लागू नहीं हैं।
- दावा देते समय सारे काग़ज़ पूरे हों, तो bank को पावती के साथ इसकी पुष्टि भी देनी है।[1]
- कोई काग़ज़ बाक़ी, अधूरा या ग़लत हो, तो bank को पावती देते समय ही ऐसे काग़ज़ों की सूची बतानी है। बाद में सारे काग़ज़ मिल जाने पर उसे इसकी पुष्टि देनी है।[1]
- Bank चाहे, तो online दावा लेने की सुविधा दे सकता है। तब उसे दावे का status online देखने की सुविधा भी देनी है, और original काग़ज़ दिखाने हों, तो यह काम उसकी किसी भी शाखा में हो सकता है।[1]
- दावा निपट जाने के बाद मृतक खाताधारक के नाम कोई रकम आए, तो bank उसे 'Account holder deceased' लिखकर भेजने वाले को लौटा देता है, और nominee या वारिसों को इसकी सूचना देता है।[1]
4कौन-से काग़ज़ लगते हैं
- ₹15 लाख की सीमा तक: claim form; खाताधारक का death certificate; दावा करने वालों की पहचान और पते का Officially Valid Document; indemnity bond; जो वारिस दावा नहीं कर रहे, उनका disclaimer या no-objection letter (जहाँ लागू हो); और Legal Heir Certificate, या फिर परिवार को जानने वाले किसी ऐसे स्वतंत्र व्यक्ति का declaration, जो दावे में शामिल न हो और bank को मंज़ूर हो।[1]
- सीमा से ऊपर, पहला रास्ता: Succession Certificate, साथ में claim form, death certificate और पहचान का काग़ज़।[1]
- सीमा से ऊपर, दूसरा रास्ता: Legal Heir Certificate, या Notary Public, Judge या Judicial Magistrate के सामने शपथ लेकर दिया गया एक स्वतंत्र व्यक्ति का affidavit। इसमें claim form, death certificate और पहचान के काग़ज़ के साथ indemnity bond और बाक़ी वारिसों का no-objection भी लगता है, और bank तीसरे व्यक्ति का surety bond माँग सकता है।[1]
- वसीयत हो, विवाद न हो: Probate of Will या Letter of Administration, साथ में claim form, death certificate और पहचान का काग़ज़।[1]
- विवाद हो: Probate of Will, Letter of Administration, Succession Certificate या अदालत का आदेश। अदालत ने bank को भुगतान से रोका हो, तो रोक रहने तक दावा नहीं लिया जाता।[1]
- खाताधारक लापता हो: अदालत का आदेश लेना होता है, और death certificate की जगह उस आदेश की copy लगती है। कुल रकम ₹1 लाख से कम हो (या bank की तय की हुई इससे ऊँची रकम से कम), तो इनकी जगह FIR की copy और पुलिस की non-traceable report ली जाती है।[1]
5Locker, FD और joint खाता
- Locker, nominee के बिना: वारिसों में कोई विवाद न हो, तो bank सरल प्रक्रिया अपनाता है, और Succession Certificate, Letter of Administration या अदालत के आदेश जैसे काग़ज़ नहीं लेता। वसीयत वाले दावे Probate of Will या Letter of Administration के आधार पर निपटते हैं।[1]
- Locker के काग़ज़: claim form, death certificate, दावा करने वालों की पहचान का काग़ज़, बाक़ी वारिसों का no-objection (जहाँ लागू हो), और Legal Heir Certificate या शपथ लेकर दिया गया एक स्वतंत्र व्यक्ति का affidavit।[1]
- सामान की सूची: bank लिखकर तारीख़ और समय तय करता है। सूची सभी दावा करने वालों या उनके प्रतिनिधियों, दो स्वतंत्र गवाहों, vault के custodian और bank के एक और कर्मचारी की मौजूदगी में बनती है।[1]
- सामान की क़ीमत: एक स्वतंत्र valuer सामान की क़ीमत आँकता है, जो indemnity bond में लिखी जाती है। Bond देने के बाद सामान निकाला जा सकता है।[1]
- मृत्यु पर FD तोड़ना: खाताधारक की मृत्यु होने पर FD समय से पहले तोड़ने पर कोई penal charge नहीं लगता, lock-in period के भीतर भी।[1]
- Joint FD: एक खाताधारक की मृत्यु पर FD समय से पहले तोड़ने के लिए बचे हुए खाताधारकों और मृतक के क़ानूनी वारिसों, दोनों की सहमति चाहिए। Survivorship clause वाले joint खाते में सभी खाताधारकों ने bank को पहले से mandate दे रखा हो, तो वारिसों की सहमति नहीं लगती।[1]
6आम ग़लतफ़हमी
7आपका अधिकार
- देरी की वजह: दावा 15 calendar दिन में न निपटे, तो bank को दावा करने वाले को देरी की वजह बतानी है।[1]
- Locker के दावे में देरी: सारे काग़ज़ मिलने के 15 calendar दिन के भीतर bank को दावा process करके सामान की सूची बनाने की तारीख़ तय करने के लिए संपर्क करना है। ऐसा न हो, तो उसे देरी के हर दिन के ₹5,000 देने हैं।[1]
- तीसरे व्यक्ति का surety bond नहीं: ₹15 लाख की सीमा तक के दावे में, और वसीयत या विवाद वाले मामलों में, bank तीसरे व्यक्ति का surety bond नहीं ले सकता।[1]
8अभी क्या करें
- Bank की website पर दावे के forms और काग़ज़ों की सूची देखिए।[1]
- दावा किसी भी शाखा में दीजिए, और पावती लीजिए।[1]
- काग़ज़ अधूरे हों, तो bank से बाक़ी काग़ज़ों की सूची लीजिए; यह सूची उसे पावती के साथ ही देनी है।[1]
- दावा 15 calendar दिन में न निपटे, तो bank से देरी की वजह पूछिए; वजह बताना उसकी ज़िम्मेदारी है।[1]
- अपने खातों में nominee दर्ज रखिए। Nominee से bank सिर्फ़ तीन काग़ज़ लेता है: claim form, death certificate और पहचान का काग़ज़।[1]
9सवाल-जवाब
10जुड़े शब्द
11स्रोत
- RBI — Reserve Bank of India (Commercial Banks – Responsible Business Conduct) Directions, 2025 (RBI/DOR/2025-26/170; Updated as on October 1, 2026) ↗किस बात के लिए, दस्तावेज़ का कौन-सा हिस्सा
- पैरा 282 और 2831 अप्रैल 2026 से लागू; SCSS, PPF पर लागू नहीं; इस हिस्से की परिभाषाएँ; ₹15 लाख की सीमा
- पैरा 284 और 286nominee trustee के तौर पर; nominee से तीन काग़ज़
- पैरा 287, 288 और 289सरल प्रक्रिया की शर्तें; सीमा तक के दावे के काग़ज़; तीसरे व्यक्ति का surety bond नहीं
- पैरा 290सीमा से ऊपर के दावे के दो रास्ते
- पैरा 291, 292, 293 और 294वसीयत; विवाद; अदालत की रोक; इन मामलों में surety bond नहीं
- पैरा 295, 296 और 297निपटारे के बाद आई रकम; मृत्यु पर FD बिना penal charge; joint FD
- पैरा 298लापता व्यक्ति; ₹1 लाख से कम में FIR और non-traceable report
- पैरा 308, 309, 310 और 313locker: सरल प्रक्रिया, काग़ज़, वसीयत वाले दावे, सामान की सूची और valuation
- पैरा 316, 317 और 318forms और काग़ज़ों की सूची website पर; किसी भी शाखा में दावा; पावती और पुष्टि; online दावा
- पैरा 319, 320, 321 और 32215 calendar दिन; देरी की वजह और ब्याज; locker में ₹5,000 रोज़
- पैरा 324भारत के बाहर हुई मृत्यु का प्रमाण
12सुधार का इतिहास
- पन्ना बना। RBI के Commercial Banks – Responsible Business Conduct Directions, 2025 (1 अक्टूबर 2026 तक update) के पैरा 282 से 325 से जाँचा। यह पन्ना सिर्फ़ bank में दावे की प्रक्रिया पर है।
पन्ना बना: 07 अक्तू 2026 · आख़िरी जाँच: 07 अक्तू 2026
यह सामान्य जानकारी है, कानूनी या वित्तीय सलाह नहीं।