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सीधा मतलब | Seedha Matlab

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शब्द · बैंकिंग✓ स्रोत से जाँचा · 7 Oct 2026

Probate

अदालत की मुहर के साथ प्रमाणित वसीयत की copy, जिसके साथ executor को संपत्ति सँभालने का अधिकार मिलता है

एक लाइन में

Probate, वसीयत की वह copy है, जिसे सक्षम अदालत अपनी मुहर लगाकर प्रमाणित करती है। इसके साथ वसीयत में नियुक्त executor को मृतक की संपत्ति सँभालने का अधिकार मिलता है।

किसे मिलता हैसिर्फ़ executor कोजिसे वसीयत में नियुक्त किया गया हो
कौन देता हैDistrict Judgeअपने ज़िले के सभी मामलों में
असर कब सेमृत्यु की तारीख़ सेवसीयत उसी दिन से स्थापित मानी जाती है
Bank में वसीयत वाला दावाहमेशा ज़रूरी नहींविवाद न हो, तो bank बिना probate भी चल सकता है

मतलब

Indian Succession Act, 1925 की धारा 2(f) के मुताबिक "probate" वसीयत की वह copy है, जिसे सक्षम अदालत ने अपनी मुहर के साथ प्रमाणित किया हो, और जिसके साथ वसीयत करने वाले (testator) की संपत्ति के administration का अधिकार दिया गया हो।[1]

इसी Act के मुताबिक "will" (वसीयत) किसी व्यक्ति की अपनी संपत्ति के बारे में वह क़ानूनी घोषणा है, जिसे वह अपनी मृत्यु के बाद लागू कराना चाहता है। "Executor" वह व्यक्ति है, जिसे वसीयत करने वाला अपनी आख़िरी वसीयत को अमल में लाने का काम सौंपता है।[1]

इसका मतलब आपके लिए क्या है

  • Bank में वसीयत वाला दावा: RBI के निर्देशों के मुताबिक bank ऐसे दावे Probate of Will या Letter of Administration के आधार पर निपटाता है, साथ में claim form, death certificate और पहचान का काग़ज़।[2]
  • Probate हमेशा ज़रूरी नहीं: वसीयत लागू क़ानूनों के ख़िलाफ़ न हो, उस पर कोई विवाद न हो, और bank उसके असली होने से संतुष्ट हो, तो bank probate के बिना भी वसीयत के मुताबिक चल सकता है।[2]
  • Nominee हो, तो नहीं: nominee या survivor को भुगतान करते समय bank Succession Certificate, Letter of Administration या Probate of Will जैसे काग़ज़ नहीं माँग सकता।[2]
  • विवाद हो, तो: वारिसों या वसीयत में लिखे लोगों के बीच विवाद हो, तो bank Probate of Will, Letter of Administration, Succession Certificate या अदालत के आदेश के आधार पर दावा निपटाता है।[2]

Probate कैसे मिलता है

Probate सिर्फ़ उस executor को दिया जाता है, जिसे वसीयत में नियुक्त किया गया हो।

  • किसे मिलता है: probate सिर्फ़ उस executor को दिया जाता है, जिसे वसीयत में नियुक्त किया गया हो। नियुक्ति साफ़ शब्दों में हो सकती है, या वसीयत की बातों से निकलती हो।[1]
  • किसे नहीं मिल सकता: नाबालिग को, या unsound mind वाले व्यक्ति को; और लोगों के किसी association को भी नहीं, जब तक वह नियमों में तय शर्तें पूरी करने वाली company न हो।[1]
  • कौन देता है: District Judge को अपने ज़िले के सभी मामलों में probate और letters of administration देने और रद्द करने का अधिकार है।[1]
  • किस Judge के पास: जिस District Judge के अधिकार-क्षेत्र में मृत्यु के समय वसीयत करने वाले का स्थायी घर, या कोई चल या अचल संपत्ति थी। Probate उसकी अदालत की मुहर के साथ दिया जाता है।[1]
  • Petition में क्या: petition के साथ वसीयत लगती है। उसमें लिखा जाता है: वसीयत करने वाले की मृत्यु का समय; कि लगा हुआ काग़ज़ उसकी आख़िरी वसीयत है; कि वह ठीक से execute हुई थी; petitioner के हाथ आने वाली संपत्ति की रकम; और कि petitioner वसीयत में नामित executor है।[1]
  • कई executor हों: probate सबको एक साथ, या अलग-अलग समय पर दिया जा सकता है।[1]

Probate का असर

  • वसीयत स्थापित होती है: probate मिलने पर वसीयत, वसीयत करने वाले की मृत्यु की तारीख़ से स्थापित मानी जाती है, और executor के बीच के सारे काम मान्य हो जाते हैं।[1]
  • देनदारों के लिए पक्का: probate या letters of administration मृतक के सभी देनदारों, और उसकी संपत्ति रखने वालों के सामने representative title का conclusive सबूत है। जो देनदार इसके धारक को भुगतान करता है, उसे पूरी indemnity मिलती है।[1]
  • कहाँ तक लागू: उस State भर में, जहाँ वह दिया गया है। High Court का दिया probate दूसरे States में भी वैसा ही असर रखता है, जब तक grant में कुछ और न लिखा हो।[1]
  • वही प्रतिनिधि: probate मिलने के बाद, जब तक वह वापस न लिया जाए या रद्द न हो, उस State में सिर्फ़ वही व्यक्ति मृतक के representative के तौर पर मुक़दमा या दूसरा काम कर सकता है, जिसे वह मिला है।[1]
  • धारा 213 अब नहीं है: धारा 213 ('Right as executor or legatee when established') को Repealing and Amending Act, 2025 ने 20 दिसंबर 2025 से हटा दिया है।[1]

आम ग़लतफ़हमी

✕ ग़लतफ़हमी"वसीयत है, तो bank probate के बिना पैसा नहीं देगा।"
✓ सचज़रूरी नहीं। RBI के निर्देशों के मुताबिक वसीयत लागू क़ानूनों के ख़िलाफ़ न हो, उस पर वारिसों या उसमें लिखे लोगों के बीच कोई विवाद न हो, और bank उसके असली होने से संतुष्ट हो, तो bank probate के बिना भी वसीयत के मुताबिक चल सकता है।[2]
✕ ग़लतफ़हमी"Probate कोई भी वारिस ले सकता है।"
✓ सचनहीं। Indian Succession Act के मुताबिक probate सिर्फ़ उस executor को दिया जाता है, जिसे वसीयत में नियुक्त किया गया हो। वसीयत में executor न हो, तो अदालत वसीयत के साथ letters of administration दे सकती है।[1]
✕ ग़लतफ़हमी"Probate और succession certificate एक ही चीज़ है।"
✓ सचनहीं। Probate वसीयत की प्रमाणित copy है। Succession certificate इसी Act के अलग हिस्से (Part X) में है, और मृतक के debts और securities के लिए District Judge देता है। बाद में मिला probate, उन्हीं debts या securities पर पहले मिले certificate की जगह ले लेता है।[1]
✕ ग़लतफ़हमी"Nominee को भी probate लाना पड़ेगा।"
✓ सचनहीं। RBI के निर्देशों के मुताबिक nominee या survivor को भुगतान करते समय bank Succession Certificate, Letter of Administration या Probate of Will जैसे काग़ज़ नहीं माँग सकता।[2]

आपका अधिकार

Nominee या survivor को भुगतान करते समय bank Succession Certificate, Letter of Administration या Probate of Will जैसे काग़ज़ नहीं माँग सकता, रकम चाहे जितनी हो।[2]
  • वसीयत पर विवाद न हो: निर्देश bank को यह छूट देते हैं कि वह probate के बिना भी वसीयत के मुताबिक दावा निपटा दे। यह bank का फ़ैसला है।[2]
  • तीसरे व्यक्ति का surety bond नहीं: वसीयत या विवाद वाले मामलों में bank तीसरे व्यक्ति का surety bond नहीं ले सकता।[2]

अभी क्या करें

  • वसीयत में देखिए कि executor किसे बनाया गया है। Probate उसी को मिलता है।[1]
  • दावा bank का हो, तो पहले bank से पूछिए कि क्या वह probate के बिना वसीयत के मुताबिक दावा निपटाएगा।[2]
  • Probate लेना हो, तो अर्ज़ी उस District Judge की अदालत में जाती है, जिसके अधिकार-क्षेत्र में मृतक का स्थायी घर या संपत्ति थी।[1]
  • वसीयत में executor न हो, तो probate नहीं, वसीयत के साथ letters of administration की अर्ज़ी होती है।[1]

सवाल-जवाब

Probate का मतलब क्या है?Indian Succession Act, 1925 की धारा 2(f) के मुताबिक probate वसीयत की वह copy है, जिसे सक्षम अदालत ने अपनी मुहर के साथ प्रमाणित किया हो, और जिसके साथ वसीयत करने वाले की संपत्ति (estate) के administration का अधिकार दिया गया हो।
Will (वसीयत) क्या है?इसी Act की धारा 2(h) के मुताबिक will किसी व्यक्ति की अपनी संपत्ति के बारे में वह क़ानूनी घोषणा है, जिसे वह अपनी मृत्यु के बाद लागू कराना चाहता है।
Executor कौन होता है?धारा 2(c) के मुताबिक executor वह व्यक्ति है, जिसे वसीयत करने वाला अपनी आख़िरी वसीयत को अमल में लाने का काम सौंपता है।
Codicil क्या है?धारा 2(b) के मुताबिक codicil वसीयत से जुड़ा वह दस्तावेज़ है, जो वसीयत की बातों को समझाता, बदलता या उनमें कुछ जोड़ता है। इसे वसीयत का ही हिस्सा माना जाता है।
Probate कौन देता है?धारा 264 के मुताबिक District Judge को अपने ज़िले के सभी मामलों में probate और letters of administration देने और रद्द करने का अधिकार है। Act में High Court के दिए probate का भी ज़िक्र है।
Probate की अर्ज़ी कहाँ दी जाती है?धारा 270 के मुताबिक District Judge तब probate दे सकता है, जब अर्ज़ी से दिखे कि मृत्यु के समय वसीयत करने वाले का स्थायी घर, या कोई चल या अचल संपत्ति, उस Judge के अधिकार-क्षेत्र में थी।
वसीयत में executor का नाम न हो, तो?धारा 232 के मुताबिक तब universal या residuary legatee को वसीयत साबित करने दिया जा सकता है, और उसे वसीयत के साथ letters of administration दिए जा सकते हैं।
Probate और Letter of Administration में क्या फ़र्क़ है?Probate वसीयत में नियुक्त executor को मिलता है। Act के मुताबिक administrator वह व्यक्ति है, जिसे सक्षम authority तब मृतक की संपत्ति सँभालने के लिए नियुक्त करती है, जब कोई executor न हो; उसे letters of administration मिलते हैं।
Bank में probate कब लगता है?RBI के निर्देशों के मुताबिक वसीयत वाले दावे bank Probate of Will या Letter of Administration के आधार पर निपटाता है। वसीयत पर कोई विवाद न हो, तो bank probate के बिना भी चल सकता है। वारिसों में विवाद हो, तो Probate of Will, Letter of Administration, Succession Certificate या अदालत का आदेश लगता है।
Act की धारा 213 का क्या हुआ?India Code पर 19 जून 2026 तक के पाठ के मुताबिक धारा 213 ('Right as executor or legatee when established') को Repealing and Amending Act, 2025 ने 20 दिसंबर 2025 से हटा दिया है।

जुड़े शब्द

स्रोत

  1. India Code — The Indian Succession Act, 1925 (Act No. 39 of 1925), पाठ "As on the 19th June, 2026" ↗किस बात के लिए, दस्तावेज़ का कौन-सा हिस्सा
    • धारा 2(b), 2(c), 2(f) और 2(h)codicil, executor, probate और will की परिभाषाएँ
    • धारा 2(a) और 232administrator की परिभाषा; executor न हो, तो वसीयत के साथ letters of administration
    • धारा 213धारा 20 दिसंबर 2025 से हटाई गई
    • धारा 215 और 216probate पहले के certificate की जगह लेता है; grant के बाद वही representative
    • धारा 222, 223 और 224probate सिर्फ़ नियुक्त executor को; किसे नहीं मिल सकता; कई executor
    • धारा 227probate का असर: वसीयत मृत्यु की तारीख़ से स्थापित
    • धारा 264 और 270District Judge का अधिकार; किस Judge के पास अर्ज़ी; अदालत की मुहर
    • धारा 273देनदारों के सामने conclusive; पूरी indemnity; State भर में असर; High Court का grant
    • धारा 276probate की petition में क्या लिखा जाता है
    • Part X, धारा 370 से 374succession certificate अलग चीज़ है: debts और securities के लिए, District Judge से
  2. RBI — Reserve Bank of India (Commercial Banks – Responsible Business Conduct) Directions, 2025 (RBI/DOR/2025-26/170; Updated as on October 1, 2026) ↗जारी: 28 नव 2025किस बात के लिए, दस्तावेज़ का कौन-सा हिस्सा
    • पैरा 286nominee या survivor से Probate of Will जैसे काग़ज़ नहीं माँगे जा सकते
    • पैरा 291 और 292वसीयत वाले दावे; bank probate के बिना भी चल सकता है
    • पैरा 293 और 294विवाद हो, तो कौन-से काग़ज़; वसीयत या विवाद वाले मामलों में surety bond नहीं

सुधार का इतिहास

  • पन्ना बना। India Code पर Indian Succession Act, 1925 के पाठ (19 जून 2026 तक का) और RBI के Commercial Banks – Responsible Business Conduct Directions, 2025 (1 अक्टूबर 2026 तक update) से जाँचा।

पन्ना बना: 07 अक्तू 2026 · आख़िरी जाँच: 07 अक्तू 2026
यह सामान्य जानकारी है, कानूनी या वित्तीय सलाह नहीं।