इंडियन कॉन्ट्रैक्ट एक्ट, 1872 · भारतीय संविदा अधिनियम
एक लाइन में
Indian Contract Act, 1872 वह क़ानून है, जो बताता है कि कौन-सा समझौता क़ानूनी contract है और कौन contract कर सकता है। Bank के काम आने वाले indemnity, guarantee (surety), pledge और banker के general lien के नियम भी इसी Act में हैं।
Act No.9 of 1872लागू: 1 सितंबर 1872 से
Contractधारा 2(h)क़ानून से लागू होने वाला समझौता
कौन contract कर सकता हैधारा 11बालिग़, sound mind, अयोग्य नहीं
Bank के काम की धाराएँ124, 126, 171, 172indemnity, guarantee, lien, pledge
1मतलब
Indian Contract Act, 1872 (Act No. 9 of 1872) वह क़ानून है, जो बताता है कि कौन-सा समझौता क़ानूनी contract है, कौन contract कर सकता है, और indemnity, guarantee, bailment, pledge जैसे खास contracts कैसे चलते हैं।[1]
स्वीकार (धारा 2(b))→स्वीकार हुआ proposal वादा बन जाता है
Agreementदोनों के वादे (धारा 2(e))
धारा 10 की शर्तें→free consent, सक्षम पक्ष, lawful consideration और object
Contractक़ानून से लागू (धारा 2(h))
धारा 10 के मुताबिक कोई समझौता तब contract है, जब वह सक्षम पक्षों की स्वतंत्र सहमति से, lawful consideration और lawful object के लिए हुआ हो, और Act ने उसे साफ़ तौर पर void न कहा हो।
Void: जो agreement क़ानून से लागू नहीं हो सकता।[1]
कौन contract कर सकता है: बालिग़, sound mind, और किसी क़ानून से अयोग्य नहीं।[1]
3Bank के काम की धाराएँ
Indemnity (धारा 124): एक पक्ष दूसरे को नुक़सान से बचाने का वादा करता है।[1]
Guarantee (धारा 126): तीसरे व्यक्ति के default पर उसकी देनदारी चुकाने का contract; guarantee देने वाला surety; मौखिक या लिखित।[1]
Bailment (धारा 148): किसी मक़सद के लिए सामान सौंपना, बाद में लौटाने की शर्त पर।[1]
General lien (धारा 171): bankers, उलटे contract के न होने पर, bail किए गए सामान को general balance of account की security के रूप में रोक सकते हैं।[1]
Pledge (धारा 172): क़र्ज़ या वादे की security के तौर पर सामान का bailment; pawnor और pawnee।[1]
4आम ग़लतफ़हमी
✕ ग़लतफ़हमी"हर समझौता अपने आप contract होता है।"
✓ सचनहीं। धारा 2(h) के मुताबिक सिर्फ़ वही समझौता contract है, जो क़ानून से लागू करवाया जा सके; धारा 2(g) के मुताबिक जो समझौता क़ानून से लागू नहीं हो सकता, वह void है।[1]
✕ ग़लतफ़हमी"Guarantee सिर्फ़ लिखकर ही दी जा सकती है।"
✓ सचनहीं। धारा 126 के मुताबिक guarantee मौखिक भी हो सकती है और लिखित भी।[1]
✕ ग़लतफ़हमी"Bank किसी का सामान अपने पास नहीं रोक सकता।"
✓ सचधारा 171 के मुताबिक bankers, किसी उलटे contract के न होने पर, अपने पास bail किए गए सामान को general balance of account की security के रूप में रोक सकते हैं।[1]
5अभी क्या करें
किसी loan के लिए guarantee देने से पहले याद रखिए कि धारा 126 के मुताबिक guarantee देने वाला surety, principal debtor के default पर उसकी देनदारी चुकाने का वादा करता है।[1]
6सवाल-जवाब
Indian Contract Act क्या है?यह 1872 का Act No. 9 है, जो धारा 1 के मुताबिक पूरे भारत में लागू है और 1 सितंबर 1872 से लागू हुआ।[1]
Contract किसे कहते हैं?धारा 2(h) के मुताबिक क़ानून से लागू करवाया जा सकने वाला agreement contract है। धारा 2(e) के मुताबिक एक-दूसरे के बदले दिए गए वादे agreement हैं।[1]
कौन contract कर सकता है?धारा 11 के मुताबिक हर वह व्यक्ति, जो अपने ऊपर लागू क़ानून के हिसाब से बालिग़ हो, sound mind का हो, और किसी क़ानून से contract करने के अयोग्य न हो।[1]
Contract of indemnity क्या है?धारा 124 के मुताबिक ऐसा contract, जिसमें एक पक्ष वादा करता है कि वह दूसरे को अपने या किसी और के आचरण से होने वाले नुक़सान से बचाएगा।[1]
Guarantee और surety क्या हैं?धारा 126 के मुताबिक contract of guarantee किसी तीसरे व्यक्ति के default करने पर उसका वादा पूरा करने या उसकी देनदारी चुकाने का contract है। Guarantee देने वाला 'surety', जिसके default पर guarantee दी गई वह 'principal debtor', और जिसे guarantee दी गई वह 'creditor' कहलाता है।[1]
Pledge क्या है?धारा 172 के मुताबिक क़र्ज़ के भुगतान या किसी वादे को पूरा करने की security के तौर पर सामान का bailment pledge है। सामान देने वाला 'pawnor' और लेने वाला 'pawnee' कहलाता है।[1]
Bailment क्या है?धारा 148 के मुताबिक किसी मक़सद के लिए एक व्यक्ति का दूसरे को सामान सौंपना, इस contract पर कि मक़सद पूरा होने पर सामान लौटाया जाएगा या उसके कहे मुताबिक निपटाया जाएगा।[1]