इंडियन सक्सेशन एक्ट, 1925 · भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम
एक लाइन में
Indian Succession Act, 1925 वह क़ानून है, जिसमें वसीयत (will), probate, letters of administration और succession certificate के नियम हैं। इसके कुछ हिस्से हर धर्म के लोगों पर एक जैसे लागू नहीं होते, इसलिए हर बार देखना पड़ता है कि कौन-सा Part किस पर लागू है।
Act No.39 of 1925India Code का पाठ: 19 जून 2026 तक
हिस्से11 PartsPart I से Part XI
वसीयतPart VIधारा 57 से
Succession CertificatePart Xधारा 370 से
1मतलब
Indian Succession Act, 1925 (Act No. 39 of 1925) वह क़ानून है, जिसमें वसीयत, probate, letters of administration और succession certificate के नियम हैं।[1] धारा 2(h) के मुताबिक will वह क़ानूनी घोषणा है, जिससे व्यक्ति बताता है कि उसकी मृत्यु के बाद उसकी संपत्ति का क्या हो।[1]
Part VII और VIII: मृतक की संपत्ति की सुरक्षा; executor या administrator का प्रतिनिधि हक़।[1]
Part IX: probate, letters of administration और संपत्ति का प्रशासन।[1]
Part X और XI: succession certificate; और दूसरे प्रावधान।[1]
3वसीयत से probate तक
वसीयत बनीsound mind, बालिग़ व्यक्ति (धारा 59)
वसीयत में→नाम साफ़ लिखा या ज़ाहिर
Executor नियुक्तवसीयत में (धारा 222)
मृत्यु के बाद→वसीयत पर अमल के लिए
Probateसिर्फ़ उसी executor को
धारा 59 के मुताबिक sound mind का हर बालिग़ व्यक्ति वसीयत बना सकता है, और धारा 222 के मुताबिक probate सिर्फ़ उसी executor को मिलता है, जिसे वसीयत में साफ़ तौर पर या ज़ाहिर तौर पर नियुक्त किया गया हो।
4किस पर लागू
Part V (बिना वसीयत): हिंदू, मुसलमान, बौद्ध, सिख या जैन की संपत्ति पर लागू नहीं।[1]
Part VI (वसीयत): मुसलमान पर लागू नहीं; हिंदू, बौद्ध, सिख या जैन की वसीयत पर Schedule III में दी गई धाराएँ लागू, और ऐसी वसीयत शादी से रद्द नहीं होती।[1]
Letters of administration की शर्त (धारा 212): हिंदू, मुसलमान, बौद्ध, सिख, जैन, Indian Christian या Parsi की intestacy पर लागू नहीं।[1]
5आम ग़लतफ़हमी
✕ ग़लतफ़हमी"यह Act हर धर्म के लोगों पर पूरा लागू होता है।"
✓ सचनहीं। धारा 29 के मुताबिक बिना वसीयत वाले उत्तराधिकार का Part V हिंदू, मुसलमान, बौद्ध, सिख या जैन की संपत्ति पर लागू नहीं होता; और धारा 58 के मुताबिक वसीयत वाला Part VI मुसलमान पर लागू नहीं होता।[1]
✕ ग़लतफ़हमी"हिंदू की वसीयत पर इस Act का कोई नियम लागू नहीं होता।"
✓ सचग़लत। धारा 57 के मुताबिक हिंदू, बौद्ध, सिख या जैन की 1 जनवरी 1927 या उसके बाद बनी वसीयतों पर Part VI की वे धाराएँ लागू होती हैं, जो Schedule III में दी गई हैं।[1]
✕ ग़लतफ़हमी"शादी होते ही हिंदू की पुरानी वसीयत रद्द हो जाती है।"
✓ सचनहीं। धारा 57 की शर्त के मुताबिक ऐसी वसीयत या codicil शादी से रद्द नहीं होती।[1]
✕ ग़लतफ़हमी"बिना वसीयत मरे हर व्यक्ति की संपत्ति के लिए letters of administration ज़रूरी है।"
✓ सचनहीं। धारा 212 की यह शर्त हिंदू, मुसलमान, बौद्ध, सिख, जैन, Indian Christian या Parsi की intestacy पर लागू नहीं होती।[1]
6अभी क्या करें
वसीयत, probate या succession certificate का काम हो, तो पहले देखिए कि मृतक पर Act का कौन-सा Part लागू होता है।[1]
वसीयत में बदलाव करना हो, तो codicil भी बनाया जा सकता है; धारा 2(b) के मुताबिक codicil वसीयत का ही हिस्सा माना जाता है।[1]
7सवाल-जवाब
Indian Succession Act क्या है?यह 1925 का Act No. 39 है। इसमें 11 Parts हैं, जिनमें domicile, बिना वसीयत उत्तराधिकार, वसीयत, मृतक की संपत्ति की सुरक्षा, probate और letters of administration, और succession certificate के नियम हैं।[1]
इस Act में 'will' का मतलब क्या है?धारा 2(h) के मुताबिक will, वसीयत करने वाले की अपनी संपत्ति के बारे में वह क़ानूनी घोषणा है, जिसे वह अपनी मृत्यु के बाद लागू करवाना चाहता है।[1]
वसीयत कौन बना सकता है?धारा 59 के मुताबिक sound mind का हर व्यक्ति, जो नाबालिग न हो। देख, सुन या बोल न सकने वाले व्यक्ति भी वसीयत बना सकते हैं, अगर वे समझते हैं कि वे क्या कर रहे हैं; पर नशे, बीमारी या किसी और वजह से ऐसी हालत में, जब व्यक्ति को पता न हो कि वह क्या कर रहा है, वसीयत नहीं बनाई जा सकती।[1]
Probate किसे मिलता है?धारा 222 के मुताबिक probate सिर्फ़ उसी executor को मिलता है, जिसे वसीयत में नियुक्त किया गया हो; नियुक्ति साफ़ लिखी हो या ज़रूरी तौर पर समझ में आती हो।[1]
Succession certificate की अर्ज़ी कहाँ दी जाती है?धारा 372 के मुताबिक District Judge को, petition के ज़रिए, जिसमें मृत्यु का समय, मृतक का आम निवास जैसी बातें लिखी जाती हैं।[1]
धारा 213 का क्या हुआ?India Code के पाठ के मुताबिक धारा 213 को Repealing and Amending Act, 2025 (37 of 2025) से हटा दिया गया है, 20 दिसंबर 2025 से।[1]
बिना वसीयत वाले उत्तराधिकार का Part V किस पर लागू होता है?धारा 29 के मुताबिक यह 1 जनवरी 1866 से पहले की intestacy पर, और हिंदू, मुसलमान, बौद्ध, सिख या जैन की संपत्ति पर लागू नहीं होता। बाक़ी मामलों में, जहाँ कोई और क़ानून लागू न हो, यही Part लागू होता है।[1]