Magistrate दो तरह के होते हैं: Judicial Magistrate, जो फ़ौजदारी मामलों की सुनवाई करने वाली अदालत है, और Executive Magistrate, जो राज्य सरकार का प्रशासनिक अधिकारी है, जैसे District Magistrate। BNSS के मुताबिक किसी क़ानून में बिना विशेषण के 'Magistrate' लिखा हो, तो उसका मतलब आम तौर पर Judicial Magistrate होता है।
Judicial Magistrateअदालतनियुक्ति High Court करता है; BNSS धारा 9
Executive Magistrateप्रशासननियुक्ति राज्य सरकार करती है; BNSS धारा 14
बिना विशेषण का 'Magistrate'Judicialआम तौर पर Judicial Magistrate; BNSS धारा 3(1)
FIR न लिखी जाएMagistrate के पासपहले SP को डाक से, फिर Magistrate को application
1मतलब
Magistrate शब्द दो अलग पदों के लिए इस्तेमाल होता है। Judicial Magistrate फ़ौजदारी अदालत है, जिसकी नियुक्ति High Court करता है। Executive Magistrate राज्य सरकार का नियुक्त अधिकारी है; District Magistrate (DM) और Sub-divisional Magistrate (SDM) इसी श्रेणी में आते हैं।[1]
BNSS की धारा 3(1) के मुताबिक, संदर्भ से कुछ और न निकले, तो किसी क़ानून में बिना विशेषण के 'Magistrate' लिखा हो, तो उसका मतलब उस इलाक़े का Judicial Magistrate है।[1]
2Magistrate के प्रकार
Chief Judicial Magistrateज़िले में एक; High Court नियुक्त करता है
BNSS की धारा 6 के मुताबिक High Court और दूसरे क़ानूनों से बनी अदालतों के अलावा हर राज्य में फ़ौजदारी अदालतों के चार वर्ग हैं: Court of Session, Judicial Magistrate first class, Judicial Magistrate second class और Executive Magistrate।
Chief Judicial Magistrate (CJM): हर ज़िले में High Court किसी Judicial Magistrate first class को CJM नियुक्त करता है। CJM, Sessions Judge के अधीन होता है।[1]
Judicial Magistrate first class और second class: इनकी अदालतें राज्य सरकार High Court से सलाह करके बनाती है; presiding officer की नियुक्ति High Court करता है।[1]
District Magistrate: राज्य सरकार हर ज़िले में Executive Magistrate नियुक्त करती है और उनमें से एक को District Magistrate बनाती है। सभी Executive Magistrate उसके अधीन होते हैं।[1]
Sub-divisional Magistrate: जिस Executive Magistrate को किसी sub-division का प्रभार दिया जाए।[1]
3कौन-सा काम किसके पास
BNSS की धारा 3(2) के मुताबिक दूसरे क़ानूनों में Magistrate के काम इस तरह बँटते हैं:[1]
Judicial Magistrate: जहाँ सबूत परखने हों, या किसी को सज़ा, जुर्माना, हिरासत या मुक़दमे के लिए भेजने का फ़ैसला हो।[1]
Executive Magistrate: प्रशासनिक काम, जैसे licence देना, निलंबित या रद्द करना, या मुक़दमा चलाने की मंज़ूरी देना या वापस लेना।[1]
सज़ा की सीमा (धारा 23): first class Magistrate 3 साल तक की क़ैद या ₹50,000 तक जुर्माना; second class Magistrate 1 साल तक की क़ैद या ₹10,000 तक जुर्माना; दोनों community service भी दे सकते हैं।[1]
4आम ग़लतफ़हमी
✕ ग़लतफ़हमी"District Magistrate (DM) ही वह Magistrate है, जो फ़ौजदारी मुक़दमे सुनता है।"
✓ सचनहीं। BNSS में District Magistrate एक Executive Magistrate है, जिसे राज्य सरकार नियुक्त करती है। मुक़दमों की सुनवाई करने वाले Judicial Magistrate की नियुक्ति High Court करता है।[1]
✕ ग़लतफ़हमी"क़ानून में 'Magistrate' लिखा हो, तो कोई भी Magistrate चलेगा।"
✓ सचनहीं। BNSS की धारा 3(1) के मुताबिक, संदर्भ से कुछ और न निकले, तो किसी क़ानून में बिना विशेषण के 'Magistrate' का मतलब उस इलाक़े का Judicial Magistrate है। Licence देने या रद्द करने जैसे प्रशासनिक काम Executive Magistrate के पास जाते हैं।[1]
✕ ग़लतफ़हमी"FIR न लिखी जाए, तो कुछ नहीं हो सकता।"
✓ सचनहीं। BNSS की धारा 173(4) के मुताबिक सूचना का सार लिखकर डाक से Superintendent of Police को भेजा जा सकता है, और वहाँ भी बात न बने, तो Magistrate को application दी जा सकती है। धारा 175(3) के मुताबिक Magistrate affidavit के साथ दी गई application पर जाँच का आदेश दे सकता है।[1]
✕ ग़लतफ़हमी"Magistrate कितनी भी सज़ा दे सकता है।"
✓ सचनहीं। BNSS की धारा 23 के मुताबिक first class Magistrate ज़्यादा से ज़्यादा 3 साल की क़ैद, ₹50,000 तक जुर्माना या community service दे सकता है, और second class Magistrate 1 साल की क़ैद, ₹10,000 तक जुर्माना या community service।[1]
5आपका काम कहाँ पड़ता है
FIR न लिखी जाए: पहले सूचना का सार लिखकर डाक से Superintendent of Police को; फिर Magistrate को application।[1]
Affidavit: BNSS के तहत अदालत में लगने वाला affidavit Judicial या Executive Magistrate, Commissioner of Oaths या notary के सामने दिया जा सकता है।[1]
Complaint: first class Magistrate अपराध के तथ्यों वाली complaint पर भी संज्ञान ले सकता है।[1]
वकील से सलाह: किस मामले में कौन-सी अदालत या अधिकारी, यह हर मामले के क़ानून पर निर्भर है। हम वकील नहीं हैं और यह कानूनी सलाह नहीं है।
6सवाल-जवाब
Magistrate का मतलब क्या है?BNSS में दो तरह के Magistrate हैं: Judicial Magistrate (first class और second class), जो फ़ौजदारी अदालतें हैं, और Executive Magistrate, जो राज्य सरकार के नियुक्त प्रशासनिक अधिकारी हैं।[1]
Judicial Magistrate की नियुक्ति कौन करता है?BNSS की धारा 9 के मुताबिक हर ज़िले में Judicial Magistrate first class और second class की अदालतें राज्य सरकार High Court से सलाह करके बनाती है, और उनके presiding officer की नियुक्ति High Court करता है।[1]
Chief Judicial Magistrate (CJM) कौन होता है?धारा 10 के मुताबिक हर ज़िले में High Court किसी Judicial Magistrate first class को Chief Judicial Magistrate नियुक्त करता है। धारा 13 के मुताबिक CJM, Sessions Judge के अधीन होता है, और बाक़ी Judicial Magistrate, Sessions Judge के सामान्य नियंत्रण में, CJM के अधीन।[1]
Executive Magistrate कौन होते हैं?धारा 14 के मुताबिक राज्य सरकार हर ज़िले में Executive Magistrate नियुक्त करती है, और उनमें से एक को District Magistrate बनाती है। किसी sub-division का प्रभार जिस Executive Magistrate को दिया जाए, वह Sub-divisional Magistrate कहलाता है। धारा 17 के मुताबिक सभी Executive Magistrate, District Magistrate के अधीन होते हैं।[1]
Judicial और Executive Magistrate के काम कैसे बँटते हैं?BNSS की धारा 3(2) के मुताबिक दूसरे क़ानूनों में Magistrate के जिन कामों में सबूत परखना, किसी को सज़ा, जुर्माना या हिरासत में भेजना, या मुक़दमे के लिए भेजना हो, वे Judicial Magistrate करता है। जो काम प्रशासनिक हों, जैसे licence देना, निलंबित या रद्द करना, या मुक़दमा चलाने की मंज़ूरी देना या वापस लेना, वे Executive Magistrate करता है।[1]
Magistrate किसी अपराध पर कार्रवाई कैसे शुरू करता है?धारा 210 के मुताबिक first class Magistrate (और विशेष रूप से अधिकृत second class Magistrate) अपराध का संज्ञान ले सकता है: अपराध के तथ्यों वाली complaint मिलने पर, police report पर, या पुलिस के अलावा किसी व्यक्ति से मिली सूचना या अपनी जानकारी पर।[1]
थाना FIR न लिखे, तो Magistrate क्या कर सकता है?धारा 173(4) के मुताबिक पहले सूचना का सार लिखकर डाक से Superintendent of Police को भेजिए; वहाँ से भी जाँच न हो, तो Magistrate को application दी जा सकती है। धारा 175(3) के मुताबिक Magistrate affidavit के साथ दी गई application पर, ज़रूरी जाँच-पड़ताल और पुलिस अधिकारी की बात सुनकर, जाँच का आदेश दे सकता है।[1]
क्या Magistrate के सामने affidavit दिया जा सकता है?हाँ। BNSS की धारा 333 के मुताबिक इस Sanhita के तहत अदालत में इस्तेमाल होने वाला affidavit किसी Judge, Judicial या Executive Magistrate, High Court या Court of Session के नियुक्त Commissioner of Oaths, या Notaries Act, 1952 के तहत नियुक्त notary के सामने शपथ लेकर दिया जा सकता है।[1]
Magistrate कितनी सज़ा दे सकता है?धारा 23 के मुताबिक CJM मौत, उम्रक़ैद और 7 साल से ज़्यादा की क़ैद को छोड़कर क़ानून में तय कोई भी सज़ा दे सकता है। First class Magistrate 3 साल तक की क़ैद, ₹50,000 तक जुर्माना, दोनों, या community service; second class Magistrate 1 साल तक की क़ैद, ₹10,000 तक जुर्माना, दोनों, या community service दे सकता है।[1]
क्या पुलिस अफ़सर को भी Executive Magistrate की शक्तियाँ मिल सकती हैं?धारा 14(6) के मुताबिक राज्य सरकार किसी क़ानून के तहत Commissioner of Police को Executive Magistrate की सारी या कुछ शक्तियाँ दे सकती है। धारा 15 के मुताबिक Superintendent of Police या उसके बराबर या ऊपर के पुलिस अधिकारी को Special Executive Magistrate भी नियुक्त किया जा सकता है।[1]