1मतलब
Negotiable Instruments Act, 1881 की धारा 6 के मुताबिक cheque एक bill of exchange है, जो किसी तय bank पर लिखा जाता है और माँगने के अलावा किसी और तरह देय नहीं होता।[1]
- Electronic रूप भी: इस परिभाषा में truncated cheque की electronic image और electronic form का cheque भी शामिल है।[1]
- Truncated cheque: clearing के दौरान, electronic image बनते ही, clearing house या bank काग़ज़ी cheque को आगे भेजना रोक देता है।[1]
2कौन, क्या
Negotiable Instruments Act की धारा 7 के मुताबिक cheque लिखने वाला drawer कहलाता है, और जिसे पैसा देने का आदेश दिया जाता है, यानी bank, वह drawee। Cheque में जिसका नाम है और जिसे पैसा मिलना है, वह payee कहलाता है।
3Cheque book
- 25 मुफ़्त: savings खाते में माँगने पर हर साल कम से कम 25 cheque leaves मुफ़्त।[2]
- कैसे माँगें: पिछली cheque book के requisition slip से, या bank की policy के मुताबिक दूसरे तरीक़ों से।[2]
- ख़ुद आना ज़रूरी नहीं: bank किसी ग्राहक से, senior citizens और दिव्यांग ग्राहकों समेत, cheque book के लिए ख़ुद आने पर ज़ोर नहीं दे सकता।[2]
- Courier की ज़बरदस्ती नहीं: courier से भेजने और उसका जोखिम ग्राहक पर डालने का declaration ज़बरदस्ती लेना अनुचित है; माँगने पर cheque book counter पर देनी होती है।[2]
4Cheque लिखना और जमा करना
- भाषा: cheque forms हिंदी और अंग्रेज़ी में छपते हैं; cheque हिंदी, अंग्रेज़ी या संबंधित क्षेत्रीय भाषा में लिखा जा सकता है।[2]
- शक संवत की तारीख़: हिंदी में लिखे cheque पर राष्ट्रीय पंचांग की तारीख़ हो, तो bank उसे भी, बाक़ी सब ठीक होने पर, स्वीकार करता है।[2]
- Counter पर पावती: कोई शाखा counter पर cheque लेने और पावती देने से मना नहीं कर सकती; drop box में डालने पर मजबूर नहीं किया जा सकता।[2]
- Collection में देर: bank की cheque collection policy में देर पर दिया जाने वाला ब्याज तय होता है; ज़रूरत होने पर यह ब्याज बिना दावे के मिलना चाहिए।[2]
5Cheque bounce
- 24 घंटे में वापस: bank को लौटा हुआ cheque ग्राहक को बिना देर, हर हाल में 24 घंटे के अंदर लौटाना या भेजना होता है।[2]
- वजह लिखी हो: return memo पर लौटाने की वजह का code और bank अधिकारी के हस्ताक्षर या initial होने चाहिए।[2]
- Bank की policy: खाताधारक का cheque लौटने पर bank क्या करेगा, यह उसकी Board (या उसकी समिति) की मंज़ूर policy में तय होता है; यह policy पारदर्शी हो और हर ग्राहक को पहले से बताई जाए।[2]
- जुर्म कब: किसी क़र्ज़ या देनदारी के लिए दिया cheque खाते में पैसा कम होने से लौटे; cheque छह महीने या उसकी validity के अंदर (जो पहले हो) पेश हुआ हो; पाने वाला bank की सूचना के 30 दिन के अंदर लिखित notice दे; और cheque देने वाला notice मिलने के 15 दिन में भुगतान न करे।[1]
- सज़ा: दो साल तक की क़ैद, या cheque की रक़म के दोगुने तक जुर्माना, या दोनों।[1]
- शिकायत: payee या holder in due course की लिखित शिकायत पर, cause of action बनने के एक महीने के अंदर; पर्याप्त वजह हो, तो court देर से भी ले सकता है।[1]
- Bank का सहयोग: court, consumer forum या किसी authority में सबूत के लिए bank को bounce का दस्तावेज़ी सबूत देना होता है।[2]
6आम ग़लतफ़हमी
7आपका अधिकार
- पावती: counter पर cheque देने पर पावती का हक़।[2]
- अपनी भाषा: cheque हिंदी या क्षेत्रीय भाषा में लिखने का हक़।[2]
- सबूत: cheque bounce के मुक़दमे में bank से bounce का दस्तावेज़ी सबूत पाने का हक़।[2]
8अभी क्या करें
- Cheque counter पर जमा करें, तो pay-in slip पर पावती ज़रूर लीजिए।[2]
- Cheque bounce हो, तो return memo सँभालकर रखिए, और bank की सूचना मिलने के 30 दिन के अंदर लिखित notice भेजने का ध्यान रखिए।[1]
- किसी को cheque दें, तो पक्का कीजिए कि खाते में पैसा है; bounce होने पर सज़ा हो सकती है।[1]
- Cheque book ख़त्म होने वाली हो, तो requisition slip से नई माँग लीजिए।[2]
9सवाल-जवाब
10जुड़े शब्द
11स्रोत
- India Code — The Negotiable Instruments Act, 1881 (Act No. 26 of 1881) ↗किस बात के लिए, दस्तावेज़ का कौन-सा हिस्सा
- धारा 6cheque की परिभाषा; truncated cheque; electronic cheque; clearing house
- धारा 7drawer, drawee और payee
- धारा 138पैसा कम होने से bounce; छह महीने / validity; 30 दिन में notice; 15 दिन में भुगतान; 2 साल या दोगुना जुर्माना
- धारा 142(1)लिखित शिकायत; एक महीना; देर की माफ़ी; MM / JMFC
- RBI — Reserve Bank of India (Commercial Banks – Responsible Business Conduct) Directions, 2025 (RBI/DOR/2025-26/170; Updated as on October 1, 2026) ↗किस बात के लिए, दस्तावेज़ का कौन-सा हिस्सा
- पैरा 112 से 115requisition slip; साल में 25 मुफ़्त leaves; ख़ुद आने पर ज़ोर नहीं; दूसरे तरीक़े
- पैरा 131 से 133cheque collection policy; देर पर ब्याज, बिना दावे के
- पैरा 136 से 138हिंदी, अंग्रेज़ी या क्षेत्रीय भाषा; courier की ज़बरदस्ती नहीं; शक संवत की तारीख़
- पैरा 139 और 140counter पर पावती; drop box में मजबूर नहीं
- पैरा 144, 146, 14724 घंटे में लौटाना; return reason code; dishonour की policy
- पैरा 153court में सबूत के लिए सहयोग
12सुधार का इतिहास
- पन्ना बना। India Code पर The Negotiable Instruments Act, 1881 के पाठ और RBI के Responsible Business Conduct Directions, 2025 (1 अक्टूबर 2026 तक update) से जाँचा।
पन्ना बना: 08 अक्तू 2026 · आख़िरी जाँच: 08 अक्तू 2026
यह सामान्य जानकारी है, कानूनी या वित्तीय सलाह नहीं।