1मतलब
RBI के मुताबिक Internet Banking वह digital banking channel है, जिससे bank का ग्राहक internet पर अपना खाता चलाता है और bank की सेवाएँ लेता है। इसमें web browser वाली सेवा आती है, mobile app नहीं।[1]
- View only सुविधा: सिर्फ़ वे काम, जिनसे ग्राहक की रक़म या देनदारी नहीं बदलती, जैसे balance देखना या statement download करना। इसमें loan या पैसा भेजने की सुविधा नहीं हो सकती।[1]
- Transactional सुविधा: पैसे वाले और बाक़ी सभी banking काम।[1]
- किन banks पर: ये निर्देश 1 जनवरी 2026 से commercial banks पर लागू हैं।[1]
2Net Banking और Mobile Banking
- Net Banking: bank की website से, web browser में।[1]
- Mobile Banking: bank के mobile app, USSD या SMS से।[1]
- दोनों remote लेनदेन: RBI के निर्देशों में internet banking और mobile banking के लेनदेन ऐसे लेनदेन गिने जाते हैं, जिनमें card जैसा कोई साधन मौक़े पर दिखाना नहीं पड़ता।[2]
3शुरू करना
Net Banking web browser से चलती है; bank का mobile app, USSD और SMS वाली सेवा mobile banking कहलाती है। View only सुविधा में सिर्फ़ balance देखना और statement निकालना जैसे काम होते हैं; पैसा भेजना transactional सुविधा में होता है।
- साफ़ सहमति: registration, और मौजूदा ग्राहक के लिए सेवा बंद कराने, दोनों के लिए bank को आपकी साफ़ सहमति लेनी और record में रखनी होती है।[1]
- कई रास्ते: registration के लिए bank कई रास्ते दे सकता है, ताकि शाखा कम जाना पड़े।[1]
- सरल भाषा में शर्तें: हो सके तो अंग्रेज़ी, हिंदी और स्थानीय भाषा में। उनमें charges, stop-payment का समय और तरीक़ा, helpdesk, शिकायत की व्यवस्था, और ग्राहक के जोखिम, ज़िम्मेदारी और देनदारी का ब्योरा होना चाहिए।[1]
- ज़बरदस्ती नहीं: bank debit card जैसी किसी दूसरी सुविधा के लिए net banking लेना ज़रूरी नहीं कर सकता, और सेवाओं की bundling भी नहीं कर सकता।[1]
4सीमा और alert
- हर लेनदेन का alert: bank को साफ़ बताना होता है कि पैसे वाले और बिना पैसे वाले, दोनों तरह के कामों के SMS या e-mail alert registered mobile number या e-mail पर आएँगे।[1] SMS alert भेजना ज़रूरी है।[2]
- Mobile number: जो ग्राहक mobile number नहीं देता, उसे bank ATM से cash निकालने के अलावा कोई electronic लेनदेन की सुविधा नहीं दे सकता।[2]
- लेनदेन की सीमा: bank अपनी नीति के हिसाब से हर लेनदेन, दिन, हफ़्ते और महीने की सीमा रखता है। RBI या NPCI जैसे payment system की शर्त ज़्यादा सख़्त हो, तो वही लागू होती है।[1]
- Log-in के बाद: bank अपने digital channel पर दूसरी कंपनियों के products और सेवाएँ तभी दिखा सकता है, जब RBI ने इसकी ख़ास इजाज़त दी हो।[1]
5नक़ली website से बचें
RBI की पुस्तिका के मुताबिक ठग bank की असली website जैसी दिखने वाली नक़ली (phishing) website बनाते हैं, और उसका link SMS, social media, e-mail या messenger से भेजते हैं। जो ग्राहक पता जाँचे बिना वहाँ PIN, OTP या password डाल देता है, उसकी जानकारी ठग के पास पहुँच जाती है।[3]
- ख़ुद जाइए: हमेशा bank की official website पर ख़ुद जाइए; अनजान link पर click मत कीजिए।[3]
- पता जाँचिए: credentials डालने से पहले website का पता ध्यान से देखिए; https के साथ ताले का निशान होना चाहिए, और नाम की spelling सही होनी चाहिए।[3]
- Public device पर: virtual keyboard इस्तेमाल कीजिए, और cyber cafe जैसे public computer से पैसे का लेनदेन मत कीजिए।[3]
- Password: समय-समय पर बदलिए, और e-mail और net banking का password एक मत रखिए।[3]
- काम के बाद: net banking से तुरंत log out कीजिए।[3]
6ठगी हो जाए
- Bank की चूक: ग्राहक की देनदारी शून्य, चाहे उसने बताया हो या नहीं।[2]
- किसी तीसरे की चूक, तीन working दिन के अंदर बताया: शून्य।[2]
- चार से सात working दिन में बताया: लेनदेन की रक़म या खाते के हिसाब से तय सीमा, जो कम हो। प्रति लेनदेन यह सीमा BSBD खाते में ₹5,000, बाक़ी savings खातों में ₹10,000, और current, cash credit या overdraft खातों में ₹10,000 या ₹25,000 है।[2]
- सात working दिन के बाद बताया: bank की Board की मंज़ूर नीति के मुताबिक।[2]
- ग्राहक की लापरवाही: जैसे payment credentials किसी को बता देना; तब bank को बताने तक का पूरा नुक़सान ग्राहक का, और बताने के बाद का bank का।[2]
- दिन कैसे गिनते हैं: home branch के कामकाजी दिनों के हिसाब से, जिस दिन bank की सूचना मिली, उस दिन को छोड़कर।[2]
- 10 working दिन में वापसी: बताने के 10 working दिन के अंदर bank को रक़म खाते में (shadow reversal) डालनी होती है, ठगी वाली तारीख़ से।[2]
- 90 दिन: शिकायत का हल और ग्राहक की देनदारी 90 दिन के अंदर तय होनी चाहिए; न हो पाए, तो तय मुआवज़ा देना होता है। ब्याज का नुक़सान भी नहीं होना चाहिए।[2]
7आम ग़लतफ़हमी
8आपका अधिकार
- 24x7 रास्ता: unauthorised लेनदेन बताने के लिए bank को website, phone banking, SMS, e-mail, IVR, toll-free helpline और home branch जैसे कई रास्ते 24x7 देने होते हैं।[2]
- Reply से आपत्ति: alert वाले SMS या e-mail का Reply करके भी आपत्ति दर्ज हो सकती है; कोई web page या e-mail पता ढूँढना न पड़े।[2]
- Complaint number: शिकायत मिलते ही bank को complaint number के साथ जवाब भेजना होता है।[2]
- सबूत का भार: ग्राहक की देनदारी साबित करने का भार bank पर है।[2]
9अभी क्या करें
- Net banking के लिए bank की website का पता ख़ुद टाइप कीजिए; SMS या e-mail के link से मत खोलिए।[3]
- पक्का कीजिए कि bank के पास आपका सही mobile number है, ताकि हर लेनदेन का alert आए।[2]
- Net banking का password e-mail के password से अलग रखिए, और काम के बाद log out कीजिए।[3]
- कोई अनजान लेनदेन दिखे, तो तुरंत bank को बताइए; बताने में जितनी देर होगी, नुक़सान का जोखिम उतना बढ़ेगा।[2]
- फिर 1930 पर call कीजिए या cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज कीजिए।[3]
10सवाल-जवाब
11जुड़े शब्द
12स्रोत
- RBI — Reserve Bank of India (Commercial Banks – Digital Banking Channels Authorisation) Directions, 2025 (RBI/DOR/2025-26/380; 1 जनवरी 2026 से लागू) ↗किस बात के लिए, दस्तावेज़ का कौन-सा हिस्सा
- पैरा 2 और 31 जनवरी 2026 से; commercial banks पर लागू
- पैरा 4.1(a) से (e)digital banking channel, internet banking, mobile banking, view only और transactional सुविधा की परिभाषाएँ
- पैरा 10.1, 10.2, 10.3साफ़ सहमति; SMS / e-mail alert; registration के कई रास्ते; सरल भाषा में शर्तें
- पैरा 10.4unauthorised लेनदेन में देनदारी के नियम Responsible Business Conduct Directions से
- पैरा 10.5ज़बरदस्ती नहीं; bundling नहीं; mobile number
- पैरा 10.7, 10.8लेनदेन की सीमाएँ; log-in के बाद दूसरी कंपनियों के products
- RBI — Reserve Bank of India (Commercial Banks – Responsible Business Conduct) Directions, 2025 (RBI/DOR/2025-26/170; Updated as on October 1, 2026) ↗किस बात के लिए, दस्तावेज़ का कौन-सा हिस्सा
- पैरा 64internet banking एक remote / online लेनदेन
- पैरा 66SMS alert ज़रूरी; 24x7 report; Reply से आपत्ति; complaint number; mobile number न हो, तो
- पैरा 67 और 68शून्य देनदारी के दो हालात; लापरवाही में नुक़सान; 4 से 7 working दिन और Table 1 की सीमा
- पैरा 69 और 707 working दिन के बाद bank की नीति; देनदारी का सार
- पैरा 71, 72 और 73working दिन की गिनती; 10 working दिन में रक़म वापस; 90 दिन; ब्याज का नुक़सान नहीं
- पैरा 75साबित करने का भार bank पर
- RBI — BE(A)WARE: A Booklet on Modus Operandi of Financial Fraudsters (पुस्तिका पर तारीख़ नहीं है; पन्ना संख्या पुस्तिका की है) ↗किस बात के लिए, दस्तावेज़ का कौन-सा हिस्सा
- Part A, 1 (पन्ना 3)phishing website और link; PIN, OTP, password की चोरी; official website पर ख़ुद जाना; https और ताला; spelling
- Part C (पन्ना 26)safe internet banking: public device पर virtual keyboard; काम के बाद log out; password बदलना; e-mail और net banking का password अलग; cyber cafe से बचना
- Part C (पन्ना 27)ठगी के बाद: card block, खाते से debit रुकवाना, Net banking और Mobile banking जाँचना; 1930 या cybercrime.gov.in
13सुधार का इतिहास
- पन्ना बना। RBI के Digital Banking Channels Authorisation Directions, 2025 (1 जनवरी 2026 से लागू), Responsible Business Conduct Directions, 2025 (1 अक्टूबर 2026 तक update) और RBI की BE(A)WARE पुस्तिका से जाँचा।
पन्ना बना: 08 अक्तू 2026 · आख़िरी जाँच: 08 अक्तू 2026
यह सामान्य जानकारी है, कानूनी या वित्तीय सलाह नहीं।