High Court (उच्च न्यायालय) संविधान के तहत राज्यों के लिए बनी अदालत है। संविधान के मुताबिक हर राज्य के लिए एक High Court होता है, वह अपने इलाक़े की सभी अदालतों और tribunals की देखरेख करता है, और लोगों के अधिकारों के लिए writ जारी कर सकता है।
हर राज्य के लिएएक High Courtअनुच्छेद 214
दो या ज़्यादा राज्यएक साझा High Courtसंसद क़ानून से बना सकती है (अनु. 231)
Writअनुच्छेद 226अधिकारों और दूसरे मक़सद के लिए
Judge की उम्र62 साल तकअनुच्छेद 217(1)
1मतलब
High Court (उच्च न्यायालय) संविधान के तहत राज्यों के लिए बनी अदालत है। संविधान के Part VI के Chapter V में High Courts के प्रावधान हैं, और अनुच्छेद 214 के मुताबिक हर राज्य के लिए एक High Court होगा।[1]
बनावट: एक Chief Justice और उतने दूसरे Judges, जितने राष्ट्रपति ज़रूरी समझें।[1]
Court of record: ऐसी अदालत की सारी शक्तियाँ, अपनी अवमानना (contempt) की सज़ा देने की शक्ति समेत।[1]
साझा High Court: संसद क़ानून बनाकर दो या ज़्यादा राज्यों के लिए एक High Court बना सकती है।[1]
2Writ की शक्ति
आपका मामलाअधिकार या किसी authority का आदेश
अर्ज़ी→अनुच्छेद 226
High Courtजिसके इलाक़े में मामला
High Court जारी करता है→निर्देश, आदेश या writ
Writ / आदेशकिसी व्यक्ति, authority या सरकार को
संविधान के अनुच्छेद 226 के मुताबिक हर High Court अपने इलाक़े में किसी भी व्यक्ति या authority को, ज़रूरत हो तो सरकार को भी, निर्देश, आदेश या writ जारी कर सकता है: Part III के अधिकार लागू करवाने के लिए और किसी दूसरे मक़सद के लिए भी।
किसे: किसी भी व्यक्ति या authority को, ज़रूरत हो तो सरकार को भी।[1]
किसलिए: Part III के अधिकार लागू करवाने के लिए, और किसी दूसरे मक़सद के लिए।[1]
कौन-से writ: habeas corpus, mandamus, prohibition, quo warranto और certiorari जैसे।[1]
3निचली अदालतों की देखरेख
Superintendence: अपने इलाक़े की सभी अदालतों और tribunals पर।[1]
क्या कर सकता है: उनसे returns मँगाना, उनकी कार्यवाही के नियम और forms तय करना।[1]
4आम ग़लतफ़हमी
✕ ग़लतफ़हमी"High Court सिर्फ़ बड़े अपराधों के मुक़दमे सुनता है।"
✓ सचनहीं। संविधान के अनुच्छेद 226 के मुताबिक High Court Part III के अधिकार लागू करवाने और दूसरे मक़सद के लिए भी writ जारी कर सकता है, और अनुच्छेद 227 के मुताबिक अपने इलाक़े की सभी अदालतों और tribunals की देखरेख करता है।[1]
✕ ग़लतफ़हमी"High Court सरकार को आदेश नहीं दे सकता।"
✓ सचदे सकता है। अनुच्छेद 226 के मुताबिक High Court अपने इलाक़े में किसी भी व्यक्ति या authority को, ज़रूरत हो तो किसी सरकार को भी, निर्देश, आदेश या writ जारी कर सकता है।[1]
✕ ग़लतफ़हमी"हर राज्य का अपना अलग High Court होना ज़रूरी है।"
✓ सचज़रूरी नहीं। अनुच्छेद 214 हर राज्य के लिए High Court की बात करता है, पर अनुच्छेद 231 के मुताबिक संसद क़ानून बनाकर दो या ज़्यादा राज्यों के लिए, या राज्यों और एक Union territory के लिए, एक साझा High Court बना सकती है।[1]
5अभी क्या करें
अगर किसी authority के आदेश से आपके अधिकार पर असर पड़ा हो, तो जान लीजिए कि संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत High Court में writ का रास्ता है।[1]
6सवाल-जवाब
High Court क्या है?संविधान के Part VI के Chapter V ('The High Courts in the States') में High Courts के प्रावधान हैं। अनुच्छेद 214 के मुताबिक हर राज्य के लिए एक High Court होगा।[1]
High Court में कौन होते हैं?अनुच्छेद 216 के मुताबिक हर High Court में एक Chief Justice और उतने दूसरे Judges होते हैं, जितने राष्ट्रपति समय-समय पर ज़रूरी समझकर नियुक्त करें।[1]
'Court of record' का क्या मतलब है?अनुच्छेद 215 के मुताबिक हर High Court एक court of record है और उसके पास ऐसी अदालत की सारी शक्तियाँ हैं, जिनमें अपनी अवमानना (contempt) की सज़ा देने की शक्ति भी शामिल है।[1]
High Court writ कब जारी करता है?अनुच्छेद 226 के मुताबिक Part III के अधिकार लागू करवाने के लिए और किसी दूसरे मक़सद के लिए। इनमें habeas corpus, mandamus, prohibition, quo warranto और certiorari जैसे writ शामिल हैं।[1]
किस High Court में जाएँ?अनुच्छेद 226 के मुताबिक High Court अपने इलाक़े में यह शक्ति इस्तेमाल करता है; और जिस इलाक़े में मामले की वजह (cause of action) पूरी या आंशिक रूप से बनी, वहाँ का High Court भी यह शक्ति इस्तेमाल कर सकता है, चाहे सरकार या authority का मुख्यालय कहीं और हो।[1]
High Court और निचली अदालतों का क्या रिश्ता है?अनुच्छेद 227 के मुताबिक हर High Court अपने इलाक़े की सभी अदालतों और tribunals की देखरेख (superintendence) करता है; वह उनसे returns मँगा सकता है और उनकी कार्यवाही के नियम और forms तय कर सकता है।[1]
High Court के Judge कितनी उम्र तक पद पर रहते हैं?अनुच्छेद 217(1) के मुताबिक, additional या acting Judge को छोड़कर, 62 साल की उम्र तक।[1]