1मतलब
CFCFRMS यानी Citizen Financial Cyber Fraud Reporting and Management System। यह गृह मंत्रालय के I4C के तहत 2021 में शुरू हुआ, ताकि पैसों की ठगी की तुरंत report हो सके और रक़म ठगों के हाथ में जाने से रोकी जा सके।[2]
इसे I4C ने ख़ुद बनाया है। यह पुलिस को banks और financial intermediaries से जोड़ता है।[1]
2इसका मतलब आपके लिए क्या है
- आप इस तक दो रास्तों से पहुँचते हैं: 1930 पर call करके, या cybercrime.gov.in पर report करके।[3]
- देर मत कीजिए: रक़म तभी रोकी जा सकती है, जब तक ठग उसे digital system से बाहर न निकाल ले।[1]
- Call के बाद काम पूरा नहीं होता: SMS या mail से मिले Log-in ID या acknowledgement number से 24 घंटे के अंदर cybercrime.gov.in पर शिकायत पूरी करना ज़रूरी है।[3]
3कैसे काम करता है
रक़म आगे किसी और bank में जा चुकी हो, तो ticket उस bank को चला जाता है।
गृह मंत्रालय ने 17 जून 2021 को इसका क्रम बताया था। तब helpline का नंबर 155260 था;[1] अब 1930 है।[2]
- ठगी का शिकार helpline पर call करता है। Call संबंधित राज्य की पुलिस उठाती है।
- पुलिस का operator ठगी वाले लेनदेन का ब्योरा और call करने वाले की बुनियादी जानकारी लेकर CFCFRMS पर ticket बनाता है।
- Ticket संबंधित bank, wallet या merchant तक जाता है: आपके bank तक, और उस bank या wallet तक जहाँ पैसा गया है।
- आपको SMS से acknowledgement number मिलता है, और 24 घंटे के अंदर cybercrime.gov.in पर ठगी का पूरा ब्योरा देने को कहा जाता है।
- Bank को ticket अपने dashboard पर दिखता है। वह अपने system में ब्योरा जाँचता है।
- रक़म अभी बची है, तो bank उसे रोक देता है, यानी ठग उसे निकाल नहीं सकता। रक़म किसी और bank में जा चुकी है, तो ticket उस bank को चला जाता है। यही क्रम आगे के bank के साथ दोहराया जाता है।
30 जून 2026 तक CFCFRMS से 32.80 लाख से ज़्यादा शिकायतों में ₹11,158 करोड़ से ज़्यादा बचाए गए हैं।[2]
4कौन क्या करता है
- आप: 1930 पर call करते हैं या cybercrime.gov.in पर report करते हैं, और फिर 24 घंटे के अंदर portal पर शिकायत पूरी करते हैं।[3]
- Bank, financial intermediary या payment wallet: ये भी इन्हीं रास्तों से पैसों की ठगी की report कर सकते हैं।[3]
- पुलिस अधिकारी: शिकायत मिलने पर मामले को जाँचता है, और जाँच के बाद संबंधित bank, financial intermediary या payment wallet को रक़म रोकने के लिए कहता है।[3]
- I4C: यह system चलाता है।[2] वह ख़ुद जाँच एजेंसी नहीं है; जाँच राज्य या केंद्र शासित प्रदेश की पुलिस करती है।[4]
- खाते पर lien या freeze: I4C के मुताबिक यह फ़ैसला जाँच अधिकारी लेता है, या bank के अधिकारी RBI के नियमों के तहत लेते हैं; I4C नहीं।[4]
5आम ग़लतफ़हमी
6आपका अधिकार
- गृह मंत्रालय ने NCRP-CFCFRMS के लिए एक SOP जारी किया है। इसमें शिकायत पर कार्रवाई, bank से तालमेल, शिकायत निवारण, lien हटाने और ठगी की रक़म सही दावेदार को लौटाने का ढाँचा तय किया गया है।[2]
- हर मामले में पुलिस, bank, payment wallet या financial intermediary क़ानून के मुताबिक कार्रवाई करते हैं।[3]
7अभी क्या करें
- 1930 अपने phone में save कर लीजिए।
- ठगी हो जाए, तो तुरंत 1930 पर call कीजिए या cybercrime.gov.in पर report कीजिए।[3]
- Call के बाद मिला acknowledgement number सँभालकर रखिए, और 24 घंटे के अंदर portal पर शिकायत पूरी कीजिए।[3]
8सवाल-जवाब
9जुड़े शब्द
पूरा लेख: Online fraud हो गया, पैसा कट गया? अभी क्या करें
10स्रोत
- गृह मंत्रालय (PIB) — National Helpline 155260 and Reporting Platform, press release, 17 जून 2021 (Release ID 1727990) ↗किस बात के लिए, दस्तावेज़ का कौन-सा हिस्सा
- पैरा 1, 2helpline और reporting platform चालू; soft launch 1 अप्रैल 2021 को; तब नंबर 155260
- पैरा 3system I4C ने ख़ुद बनाया; पुलिस को banks और financial intermediaries से जोड़ता है
- पैरा 4रक़म तभी रुक सकती है जब तक ठग उसे digital system से बाहर न निकाल ले
- क्रम 1–6call राज्य की पुलिस उठाती है; operator ticket बनाता है; ticket bank, wallet, merchant को; SMS से acknowledgement number; bank ब्योरा जाँचकर रक़म रोकता है, या ticket अगले bank को
- आख़िरी पैरापैसा पाँच अलग banks में घुमाए जाने के बाद भी रोका गया
- गृह मंत्रालय (PIB) — Cyber Crime Mitigation Centre, लोकसभा में लिखित उत्तर, 28 जुलाई 2026 (Release ID 2290366; बिंदु ऊपर से गिने गए हैं) ↗किस बात के लिए, दस्तावेज़ का कौन-सा हिस्सा
- पहला पैरापुलिस राज्य का विषय है; अपराध की जाँच राज्यों और UT की एजेंसियाँ करती हैं
- बिंदु 3CFCFRMS, I4C के तहत 2021 में शुरू; तुरंत report और रक़म ठगों तक जाने से रोकने के लिए; I4C चलाता है; 1930
- बिंदु 330 जून 2026 तक 32.80 लाख से ज़्यादा शिकायतों में ₹11,158 करोड़ से ज़्यादा बचाए गए
- SOP वाला पैराNCRP-CFCFRMS का SOP और उसका दायरा; Money Restoration Module और Grievance Redressal Module अप्रैल 2026 से चालू
- National Cyber Crime Reporting Portal — Citizen Financial Cyber Frauds Reporting and Management System: Steps for reporting of financial cyber frauds (दस्तावेज़ पर तारीख़ नहीं है) ↗किस बात के लिए, दस्तावेज़ का कौन-सा हिस्सा
- शीर्षकनाम: Citizen Financial Cyber Frauds Reporting and Management System
- बिंदु iठगी का शिकार 1930 पर call कर सकता है या cybercrime.gov.in पर report कर सकता है
- बिंदु iibank, financial intermediary या payment wallet भी इन्हीं रास्तों से report कर सकते हैं
- बिंदु ivLog-in ID या acknowledgement number से 24 घंटे के अंदर portal पर शिकायत पूरी करना ज़रूरी
- बिंदु vपुलिस अधिकारी जाँचकर bank, financial intermediary या wallet को रक़म रोकने के लिए कहता है
- बिंदु viहर मामले में पुलिस, bank, payment wallet या financial intermediary क़ानून के मुताबिक कार्रवाई करते हैं
- I4C — Public Notice No. 22003/208/CPGRAMS/2025-I4C, 22 जनवरी 2026 ↗किस बात के लिए, दस्तावेज़ का कौन-सा हिस्सा
- पैरा 3(ii)I4C जाँच एजेंसी नहीं; जाँच राज्य/UT की पुलिस करती है
- पैरा 3(iii)खाते पर lien या freeze I4C नहीं करता; फ़ैसला जाँच अधिकारी या bank अधिकारी का
11सुधार का इतिहास
- पन्ना बना। गृह मंत्रालय के press release (17 जून 2021), लोकसभा उत्तर (28 जुलाई 2026), cybercrime.gov.in के दस्तावेज़ और I4C के Public Notice (22 जनवरी 2026) से जाँचा।
पन्ना बना: 07 अक्तू 2026 · आख़िरी जाँच: 07 अक्तू 2026
यह सामान्य जानकारी है, कानूनी या वित्तीय सलाह नहीं।