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शब्द · क़र्ज़✓ स्रोत से जाँचा · 17 Oct 2026

IBC

Insolvency and Bankruptcy Code, 2016 · क़र्ज़ न चुका पाने वाली कंपनियों और लोगों के मामलों को तय समय में सुलझाने का क़ानून

एक लाइन में

IBC यानी Insolvency and Bankruptcy Code, 2016। प्रस्तावना के मुताबिक यह कंपनियों, partnership firms और व्यक्तियों के पुनर्गठन (reorganisation) और insolvency resolution से जुड़े क़ानूनों को एक जगह लाता है, ताकि मामले तय समय में निपटें और संपत्ति की क़ीमत ज़्यादा-से-ज़्यादा बचे। कंपनी के मामले में क़र्ज़ न चुकाने (default) पर NCLT के पास 'corporate insolvency resolution process' (CIRP) शुरू करने की अर्ज़ी दी जा सकती है।

क़ानूनAct No. 31 of 201628 मई 2016
कंपनी के लिए न्यूनतम default₹1 करोड़धारा 4
CIRP की समय-सीमा180 दिनएक बार 90 दिन तक बढ़ सकती है
Adjudicating Authority (कंपनी)NCLTधारा 60

मतलब

IBC यानी Insolvency and Bankruptcy Code, 2016। Insolvency का मतलब है क़र्ज़ न चुका पाने की हालत। Code की प्रस्तावना के मुताबिक यह कंपनियों, partnership firms और व्यक्तियों के पुनर्गठन और insolvency resolution से जुड़े क़ानूनों को एक जगह लाता और बदलता है, ताकि मामले तय समय में निपटें, संपत्ति की क़ीमत ज़्यादा-से-ज़्यादा बचे, उद्यम और क़र्ज़ की उपलब्धता बढ़े, और सभी पक्षों के हितों में संतुलन रहे।[1]

Insolvency process कैसे चलती है

धारा 14 के मुताबिक insolvency commencement की तारीख़ पर NCLT moratorium का आदेश देता है: कंपनी के ख़िलाफ़ मुक़दमे, उसकी संपत्ति बेचना और SARFAESI समेत security interest की वसूली उस दौरान रुकती है।

आम ग़लतफ़हमी

✕ ग़लतफ़हमी"IBC में मामला सालों खिंच सकता है, कोई सीमा नहीं।"
✓ सचधारा 12 के मुताबिक CIRP अर्ज़ी मंज़ूर होने से 180 दिन में पूरा होना है; committee of creditors के 66% वोट पर NCLT एक बार, ज़्यादा-से-ज़्यादा 90 दिन बढ़ा सकता है; और insolvency commencement से 330 दिन में अनिवार्य रूप से पूरा होना है (मुक़दमेबाज़ी का समय मिलाकर)।[1]
✕ ग़लतफ़हमी"छोटे-से default पर भी कंपनी IBC में चली जाती है।"
✓ सचनहीं। धारा 4 के मुताबिक कंपनियों वाला हिस्सा तभी लागू होता है, जब default कम-से-कम ₹1 करोड़ का हो।[1]

परीक्षा के लिए

याद रखने लायक़: IBC 2016 (Act No. 31, 28.5.2016); कंपनी के लिए न्यूनतम default ₹1 करोड़ (धारा 4); धारा 7 financial creditor, धारा 10 कंपनी ख़ुद; CIRP 180 दिन + एक बार 90 दिन, कुल 330 दिन अनिवार्य (धारा 12); moratorium धारा 14; NCLT धारा 60; IBBI धारा 188। इस तरह के बाक़ी शब्द परीक्षा के लिए पन्ने पर हैं।[1]

सवाल-जवाब

IBC आसान भाषा में क्या है?जब कोई कंपनी अपना क़र्ज़ नहीं चुका पाती, तो उसे बचाने (resolution) या आख़िर में बंद करके (liquidation) क़र्ज़ देने वालों में बाँटने का तय-समय वाला तरीक़ा। IBC व्यक्तियों और partnership firms के लिए भी है।[1]
CIRP कौन शुरू कर सकता है?धारा 7 के मुताबिक financial creditor (अकेले या दूसरों के साथ), default होने पर; और धारा 10 के मुताबिक default करने वाली कंपनी ख़ुद (corporate applicant)। Operational creditor के लिए Code में अलग धारा है।[1]
NCLT का क्या रोल है?धारा 60 के मुताबिक कंपनियों (और उनके personal guarantors) के insolvency और liquidation मामलों में Adjudicating Authority वह National Company Law Tribunal है, जिसके इलाक़े में कंपनी का registered office है।[1]
IBBI क्या है?धारा 188 के मुताबिक Insolvency and Bankruptcy Board of India, जिसका मुख्यालय National Capital Region में है। धारा 196 के मुताबिक यह insolvency professionals, उनकी agencies और information utilities को register और regulate करता है।[1]

जुड़े शब्द

स्रोत

  1. India Code — The Insolvency and Bankruptcy Code, 2016 (Act No. 31 of 2016; प्रस्तावना, धारा 4, 7, 10, 12, 14, 60, 188 और 196 का पाठ; 17 अक्टूबर 2026 को पढ़ा) ↗किस बात के लिए, दस्तावेज़ का कौन-सा हिस्सा
    • प्रस्तावनाAct No. 31 of 2016, 28.5.2016; corporate persons, partnership firms, व्यक्ति; तय समय; संपत्ति की क़ीमत; IBBI की स्थापना
    • धारा 4Part II न्यूनतम default ₹1 करोड़
    • धारा 7, 10financial creditor की अर्ज़ी; corporate applicant की अर्ज़ी
    • धारा 12180 दिन; CoC 66% वोट; एक बार 90 दिन तक; 330 दिन अनिवार्य
    • धारा 14moratorium: मुक़दमे, संपत्ति transfer, SARFAESI समेत security interest की वसूली पर रोक
    • धारा 60, 188, 196NCLT Adjudicating Authority; IBBI, मुख्यालय NCR; IBBI के काम

सुधार का इतिहास

  • पन्ना बना। India Code पर Insolvency and Bankruptcy Code, 2016 की प्रस्तावना और धारा 4, 7, 10, 12, 14, 60, 188, 196 के पाठ से जाँचा।

पन्ना बना: 17 अक्तू 2026 · आख़िरी जाँच: 17 अक्तू 2026
यह सामान्य जानकारी है, कानूनी या वित्तीय सलाह नहीं।

यह पन्ना: https://seedhamatlab.com/shabdkosh/ibc/ · आख़िरी जाँच: 17 अक्तू 2026
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