सरफ़ेसी क़ानून · loan NPA होने पर bank को अदालत गए बिना गिरवी संपत्ति पर कार्रवाई का हक़, और borrower के बचाव
एक लाइन में
SARFAESI Act, 2002 के तहत ज़मानत (security) वाला loan NPA हो जाए, तो bank अदालत गए बिना borrower को 60 दिन का notice देकर, फिर गिरवी संपत्ति पर क़ब्ज़ा लेकर उसे बेच सकता है। Borrower notice पर आपत्ति कर सकता है, bank को 15 दिन में जवाब देना है; और नीलामी का notice छपने से पहले पूरा बकाया व ख़र्च चुका दे, तो संपत्ति नहीं बेची जा सकती।
पहली शर्तखाता NPA होधारा 13(2)
Notice की अवधि60 दिनपूरा बकाया चुकाने के लिए
आपत्ति का जवाब15 दिन मेंन मानने की वजह; धारा 13(3A)
DRT में अर्ज़ी45 दिन मेंकार्रवाई से; धारा 17
1मतलब
SARFAESI Act, 2002 bank जैसे secured creditor को अधिकार देता है कि ज़मानत वाला loan NPA होने पर वह अदालत या tribunal के बिना ज़मानत लागू कर सके। साथ ही यह borrower को notice, आपत्ति, बकाया चुकाकर संपत्ति बचाने और DRT में जाने का रास्ता देता है।[1]
2इसका मतलब आपके लिए क्या है
60 दिन का मौक़ा: notice के बाद बकाया चुकाने का समय।[1]
आख़िरी मौक़ा: नीलामी notice छपने से पहले पूरा बकाया चुकाएँ, तो बिक्री रुकती है।[1]
3SARFAESI कार्रवाई कैसे होती है
Loan NPAज़मानत वाला
Notice→धारा 13(2)
60 दिन का noticeरक़म और संपत्ति का ब्यौरा
60 दिन बाद→बकाया न चुका
क़ब्ज़ा / बिक्रीधारा 13(4)
धारा 13(3) के मुताबिक notice में बकाया रक़म और उन संपत्तियों का ब्यौरा होना चाहिए, जिन पर bank कार्रवाई करना चाहता है।
4आम ग़लतफ़हमी
✕ ग़लतफ़हमी"Bank किसी भी loan पर सीधे घर पर क़ब्ज़ा कर सकता है।"
✓ सचनहीं। धारा 13(2) के मुताबिक पहले खाता NPA होना चाहिए, और bank को लिखित notice देकर 60 दिन में पूरा बकाया चुकाने का मौक़ा देना है; उसके बाद ही धारा 13(4) की कार्रवाई।[1]
✕ ग़लतफ़हमी"एक बार notice आ गया, तो संपत्ति बचाने का कोई रास्ता नहीं।"
✓ सचहै। धारा 13(8) के मुताबिक नीलामी, tender या बिक्री का public notice छपने से पहले किसी भी समय पूरा बकाया और सारे ख़र्च चुका दें, तो bank संपत्ति नहीं बेच सकता।[1]
✕ ग़लतफ़हमी"SARFAESI हर loan पर लागू है।"
✓ सचनहीं। धारा 31 के मुताबिक यह खेती की ज़मीन पर बनी security, ₹1 लाख तक के financial asset की security, और उन मामलों पर लागू नहीं, जहाँ बकाया मूलधन और ब्याज के 20% से कम हो; pledge और कुछ और मामलों पर भी नहीं।[1]
5आपका अधिकार
Bank धारा 13(4) की कार्रवाई से पहले 60 दिन का लिखित notice दे, जिसमें बकाया और संपत्ति का ब्यौरा हो। आपकी आपत्ति न माने, तो 15 दिन में वजह बताए। नीलामी notice छपने से पहले पूरा बकाया और ख़र्च चुका दें, तो संपत्ति नहीं बिकेगी। कार्रवाई के 45 दिन में आप DRT जा सकते हैं।[1]
6अभी क्या करें
SARFAESI notice आए, तो तारीख़ नोट कीजिए: 60 दिन चुकाने के, और आपत्ति लिखित में दीजिए।[1]
कार्रवाई (जैसे क़ब्ज़ा) हो, तो 45 दिन के भीतर DRT का रास्ता किसी जानकार की मदद से देखिए।[1]
7सवाल-जवाब
Notice पर आपत्ति कैसे?धारा 13(3A) के मुताबिक notice मिलने पर borrower आपत्ति या representation दे सकता है। Bank उस पर विचार करेगा, और न माने तो 15 दिन में न मानने की वजह बताएगा। इस जवाब के आधार पर अभी DRT नहीं जा सकते।[1]
Bank ने क़ब्ज़ा ले लिया, अब क्या?धारा 17 के मुताबिक borrower समेत कोई भी प्रभावित व्यक्ति, धारा 13(4) की कार्रवाई के 45 दिन के भीतर, तय fee के साथ Debts Recovery Tribunal (DRT) में अर्ज़ी दे सकता है। DRT कार्रवाई क़ानून के ख़िलाफ़ पाए, तो उसे अवैध घोषित कर क़ब्ज़ा वापस दिला सकता है।[1]
Bank और क्या कर सकता है?धारा 13(4) के मुताबिक: ज़मानत की संपत्ति पर क़ब्ज़ा, lease / assignment / बिक्री; कुछ शर्तों पर कारोबार का प्रबंधन लेना; manager नियुक्त करना; और जिससे borrower को पैसा मिलना है, उससे सीधे bank को भुगतान करवाना।[1]
बिक्री से बचा पैसा किसका?धारा 13(7) के मुताबिक मिली रक़म पहले ख़र्चों में, फिर bank के बकाये में जाती है; बचा हिस्सा उसके हक़दार व्यक्ति को मिलता है।[1]
धारा 13(1), (2), (3), (3A)अदालत के बिना enforcement; NPA पर 60 दिन का लिखित notice; notice में रक़म और संपत्ति; आपत्ति, 15 दिन में न मानने की वजह, उस पर DRT नहीं
धारा 13(4), (7), (8)क़ब्ज़ा, बिक्री, management, manager, देनदार से भुगतान; रक़म का क्रम; नीलामी notice छपने से पहले पूरा बकाया + ख़र्च दें तो बिक्री नहीं
धारा 17(1), (3)45 दिन में DRT, fee के साथ; अवैध पाए तो क़ब्ज़ा वापस
धारा 31(b), (h), (i), (j)pledge, ₹1 लाख तक, खेती की ज़मीन, बकाया 20% से कम: लागू नहीं
10सुधार का इतिहास
पन्ना बना। India Code पर SARFAESI Act, 2002 की धारा 13, 17 और 31 के पाठ से जाँचा।