विलफुल डिफॉल्टर · क्षमता होते हुए भी जानबूझकर क़र्ज़ न चुकाने वाला, ₹25 लाख या ज़्यादा बकाया पर
एक लाइन में
RBI के मुताबिक wilful defaulter वह borrower या guarantor है, जिसने ₹25 लाख या ज़्यादा बकाये में जानबूझकर चूक की हो: जैसे चुकाने की क्षमता होते हुए न चुकाना, loan का पैसा दूसरी जगह लगाना या निकाल लेना, या ज़मानत की संपत्ति bank की मंज़ूरी के बिना बेच देना। किसी को wilful defaulter घोषित करने से पहले bank को show-cause notice, जवाब का मौक़ा और personal hearing देनी होती है।
बकाया₹25 लाख या ज़्यादापैरा 3(1)(xix)
Show-cause का जवाब21 दिनसारे सबूत बताने होंगे
Review Committee को15 दिन में लिखित जवाबफिर personal hearing
नाम हटने के बाद1 साल नया loan नहींनए काम के लिए 5 साल
1मतलब
RBI के मुताबिक wilful default तब है, जब borrower भुगतान में चूक करे और साथ में कोई ख़ास बात हो: चुकाने की क्षमता होते हुए न चुकाना, पैसा दूसरी जगह लगाना या निकाल लेना, ज़मानत की संपत्ति बिना मंज़ूरी बेचना, या क्षमता होते हुए equity न डालना। ₹25 लाख या ज़्यादा बकाये पर ऐसा borrower या guarantor 'wilful defaulter' कहलाता है।[1]
2इसका मतलब आपके लिए क्या है
सीधे ठप्पा नहीं: पहले show-cause, सबूत, जवाब और hearing।[1]
Guarantor भी: साधन होते हुए guarantee न निभाए, तो guarantor भी wilful defaulter हो सकता है।[1]
लंबा असर: नाम हटने के बाद भी 1 साल नया loan नहीं।[1]
3घोषित करने की प्रक्रिया
Identification Committeeसबूत देखे, show-cause दे
21 दिन→आपका जवाब
Review Committeeलिखित जवाब + hearing
15 दिन→लिखित representation
Reasoned orderलिखित, आपको भेजा जाए
RBI के मुताबिक चूक 'wilful' तभी मानी जाती है जब वह जानबूझकर, सोची-समझी हो, और borrower के track record को देखकर तय हो, किसी एक-दो घटना से नहीं।
4आम ग़लतफ़हमी
✕ ग़लतफ़हमी"Loan नहीं चुकाया, तो bank सीधे wilful defaulter घोषित कर देगा।"
✓ सचनहीं। RBI के मुताबिक पहले Identification Committee सबूत देखती है और show-cause notice देती है, जिसके साथ सारे सबूत आपको बताए जाते हैं; आप 21 दिन में जवाब देते हैं। फिर Review Committee के सामने 15 दिन में लिखित representation और personal hearing का मौक़ा मिलता है, और अंत में लिखित, कारण सहित आदेश।[1]
✕ ग़लतफ़हमी"हर default wilful default है।"
✓ सचनहीं। RBI के मुताबिक default के साथ कोई ख़ास बात होनी चाहिए: चुकाने की क्षमता होते हुए न चुकाना, पैसा दूसरी जगह लगाना (diversion), निकाल लेना (siphoning), ज़मानत की संपत्ति बिना मंज़ूरी बेचना, या वादे के बावजूद क्षमता होते हुए equity न डालना।[1]
✕ ग़लतफ़हमी"इस सुनवाई में मैं वकील ले जा सकता हूँ।"
✓ सचनहीं। RBI के मुताबिक यह bank की अंदरूनी प्रक्रिया है, इसलिए इसमें वकील के ज़रिए प्रतिनिधित्व का हक़ नहीं है।[1]
5आपका अधिकार
Wilful defaulter घोषित करने से पहले bank को show-cause notice के साथ सारे सबूत बताने हैं और 21 दिन में जवाब का मौक़ा देना है; फिर Review Committee के सामने 15 दिन में लिखित representation और personal hearing का मौक़ा; और अंत में कारण सहित लिखित आदेश, जिसमें committee के सदस्यों की पहचान हो।[1]
6अभी क्या करें
Show-cause notice मिले, तो 21 दिन के भीतर लिखित जवाब दीजिए और सबूत माँगिए।[1]
Review Committee की personal hearing का मौक़ा लीजिए; न आने पर फ़ैसला रिकॉर्ड के आधार पर होता है।[1]
Guarantee देने से पहले समझिए कि साधन होते हुए भुगतान न करने पर guarantor भी wilful defaulter हो सकता है।[1]
7सवाल-जवाब
Guarantor कब wilful defaulter होता है?RBI के मुताबिक जब guarantee माँगे जाने पर, पर्याप्त साधन होते हुए भी, guarantor भुगतान न करे; या ज़मानत की संपत्ति lender की मंज़ूरी के बिना बेच दे; या क्षमता होते हुए equity डालने का वादा पूरा न करे।[1]
Wilful defaulter घोषित होने पर क्या होता है?RBI के मुताबिक उसे या उससे जुड़ी किसी इकाई को कोई नया loan नहीं मिलता; सूची से नाम हटने के बाद भी 1 साल तक नया loan नहीं, और नए काम (new venture) के लिए 5 साल तक loan नहीं। Bank हालात देखकर आपराधिक कार्रवाई पर भी विचार कर सकता है, और board-approved नीति के मुताबिक फ़ोटो छाप सकता है।[1]
Bank कब जाँच करता है?RBI के मुताबिक ₹25 लाख या ज़्यादा बकाये वाले सभी NPA खातों में wilful default की जाँच होनी है; पहली जाँच में wilful default दिखे, तो NPA होने के 6 महीने के भीतर प्रक्रिया पूरी करनी है।[1]
Independent या nominee director का क्या?RBI के मुताबिक whole-time director के अलावा किसी director को तभी wilful defaulter माना जाएगा, जब साबित हो कि चूक उसकी सहमति या मिलीभगत से हुई, या board की कार्यवाही से पता था और उसने आपत्ति दर्ज नहीं की।[1]
ये नियम किस पर लागू हैं?RBI के मुताबिक ये निर्देश commercial banks पर लागू हैं, small finance, local area, payments और regional rural banks पर नहीं; पर wilful defaulters को आगे loan न देने वाली रोक RBI से नियंत्रित सभी संस्थाओं पर लागू है।[1]
Introduction, पैरा 2(1), 2(2)प्राकृतिक न्याय के साथ पारदर्शी प्रक्रिया; commercial banks पर, SFB / LAB / PB / RRB पर नहीं; आगे loan की रोक सभी RBI-regulated संस्थाओं पर
पैरा 3(1)(xviii), (xix)wilful default के लक्षण (borrower और guarantor); wilful defaulter: ₹25 लाख या ज़्यादा; कंपनी हो तो promoters / directors
पैरा 5(1)–(14)track record से; जानबूझकर; Identification Committee; show-cause, 21 दिन, सारे सबूत बताना; Review Committee को 15 दिन में लिखित; personal hearing; वकील का हक़ नहीं; reasoned order; non-whole-time director की शर्तें
पैरा 6(1), 6(2)₹25 लाख+ के सभी NPA खातों की जाँच; NPA होने के 6 महीने में प्रक्रिया
पैरा 7(1), 7(2), 7(3)आपराधिक कार्रवाई पर विचार; फ़ोटो छापने की नीति; नया loan नहीं; नाम हटने के 1 साल बाद तक नहीं; new venture 5 साल नहीं
10सुधार का इतिहास
पन्ना बना। RBI के Treatment of Wilful Defaulters and Large Defaulters Directions (166MD) से जाँचा।
पन्ना बना: 16 अक्तू 2026 · आख़िरी जाँच: 16 अक्तू 2026
यह सामान्य जानकारी है, कानूनी या वित्तीय सलाह नहीं।
यह पन्ना: https://seedhamatlab.com/shabdkosh/wilful-defaulter/ · आख़िरी जाँच: 16 अक्तू 2026 छपी हुई प्रति पुरानी हो सकती है। ताज़ा पन्ना site पर देख लीजिए।