1मतलब
Loan settlement को RBI के निर्देशों में compromise settlement कहा गया है: borrower के साथ बातचीत से तय ऐसा इंतज़ाम, जिसमें bank के सारे दावे नक़द में पूरी तरह निपटा दिए जाते हैं। इसमें bank बकाये का कुछ हिस्सा छोड़ सकता है, और उतने दावे से हाथ खींच लेता है।[1]
- किसके नियम: ये नियम commercial banks के हैं; small finance, payments और local area banks पर ये निर्देश लागू नहीं।[1][2] NBFC के लिए RBI के अलग निर्देश हैं।[3]
- Write-off अलग चीज़: technical write-off सिर्फ़ bank के खातों का हिसाब है; इसमें borrower पर दावा नहीं छूटता।[1]
2इसका मतलब आपके लिए क्या है
- हक़ नहीं: settlement borrower का अधिकार नहीं; bank इसे अपने व्यापारिक फ़ैसले से करता है।[1]
- Credit report पर असर: चुकाने में असमर्थता की वजह से मूलधन या ब्याज में छूट मिली हो, तो bank credit bureau को खाता 'settled' बताता है।[2]
- नया loan: settlement के बाद वही bank एक cooling period तक आपको नया loan नहीं देगा; खेती के क़र्ज़ को छोड़कर यह कम से कम 12 महीने है।[1]
3Settlement कैसे होता है
Settlement borrower का हक़ नहीं; bank अपने व्यापारिक फ़ैसले से करता है।
- Bank की policy: हर bank की Board से मंज़ूर policy में settlement की प्रक्रिया होती है, और यह भी कि किस तरह के क़र्ज़ में कितनी छूट दी जा सकती है, गिरवी संपत्ति की आज की वसूली-योग्य क़ीमत देखकर।[1]
- मंज़ूरी कौन दे: loan मंज़ूर करने वाले से कम से कम एक स्तर ऊपर का अधिकारी या समिति। जो अधिकारी loan मंज़ूर करने में शामिल था, वह उसी खाते का settlement मंज़ूर करने में किसी भी रूप में शामिल नहीं हो सकता।[1]
- 3 महीने की सीमा: तय settlement रक़म चुकाने का समय 3 महीने से ज़्यादा हो, तो उसे restructuring माना जाता है। आंशिक (part) settlement भी restructuring है।[1]
- लंबित केस: bank ने किसी न्यायिक मंच पर वसूली का केस किया है और वह लंबित है, तो settlement पर वहाँ से consent decree लेना ज़रूरी है।[1]
4Credit report में क्या दिखता है
- रिपोर्ट होता है: bank, settlement वाले मामले और settlement की वजह, credit bureau (CIC) को तय format में भेजता है।[2]
- 'Settled' कब: सिर्फ़ तब, जब चुकाने में असमर्थता की वजह से मूलधन, ब्याज या दोनों में छूट दी गई हो।[2]
- 'Disputed' कब: ग़लत debit या विवादित charges वाले मामले 'settled' नहीं, 'disputed' दिखाए जाते हैं।[2]
5आम ग़लतफ़हमी
6आपका अधिकार
7अभी क्या करें
- Settlement से पहले देखिए कि तय रक़म कितने समय में चुकानी है: 3 महीने से ज़्यादा हुआ, तो यह restructuring माना जाएगा।[1]
- Settlement के बाद अपनी credit report देखिए कि खाता सही status ('settled' या 'disputed') में दिखा है।[2]
- वसूली का केस किसी न्यायिक मंच पर लंबित है, तो settlement पर consent decree होना चाहिए।[1]
8सवाल-जवाब
9जुड़े शब्द
10स्रोत
- RBI — Reserve Bank of India (Commercial Banks – Resolution of Stressed Assets) Directions, 2025 (RBI/DOR/2025-26/165; DOR.STR.REC.84/21.04.048/2025-26; updated as on October 1, 2026; small finance, payments और local area banks पर लागू नहीं), PDF ↗किस बात के लिए, दस्तावेज़ का कौन-सा हिस्सा
- पैरा 3लागू किस पर: commercial banks
- पैरा 6(2)compromise settlement: नक़द में पूरा निपटारा; बकाये का कुछ हिस्सा छोड़ना
- पैरा 6(12), 90, 913 महीने से ज़्यादा में भुगतान, या आंशिक settlement = restructuring
- पैरा 6(18), 92technical write-off में दावा नहीं छूटता
- पैरा 12policy: छूट, गिरवी की क़ीमत; एक स्तर ऊपर मंज़ूरी; loan मंज़ूर करने वाला शामिल नहीं
- पैरा 88settlement borrower का अधिकार नहीं, bank का फ़ैसला
- पैरा 96cooling period: कम से कम 12 महीने; खेती के क़र्ज़ में policy
- पैरा 98, 99fraud / wilful defaulter: आपराधिक कार्रवाई और penal measures जारी
- पैरा 101, 102लंबित केस में consent decree; Lok Adalat की सीमाएँ
- RBI — Reserve Bank of India (Commercial Banks – Credit Information Reporting) Directions, 2025 (RBI/DOR/2025-26/156; DOR.FIN.REC.No.75/20.16.056/2025-26; Updated as on July 01, 2026; small finance, payments और local area banks पर लागू नहीं), PDF ↗किस बात के लिए, दस्तावेज़ का कौन-सा हिस्सा
- पैरा 3लागू किस पर: commercial banks
- पैरा 12(2)settlement और उसकी वजह credit bureau को
- पैरा 12(4)'settled' सिर्फ़ असमर्थता से छूट पर; ग़लत debit / विवादित charge 'disputed'
- RBI — Master Directions की सूची, www.rbi.org.in ↗किस बात के लिए, दस्तावेज़ का कौन-सा हिस्सा
- NBFC का हिस्साNBFC के अलग Resolution of Stressed Assets और Credit Information Reporting Directions, 2025 (12 अक्टूबर 2026 को देखी)
11सुधार का इतिहास
- पन्ना बना। RBI के Commercial Banks – Resolution of Stressed Assets Directions, 2025 (1 अक्टूबर 2026 तक updated) और Commercial Banks – Credit Information Reporting Directions, 2025 (1 जुलाई 2026 तक updated) से जाँचा।
पन्ना बना: 12 अक्तू 2026 · आख़िरी जाँच: 12 अक्तू 2026
यह सामान्य जानकारी है, कानूनी या वित्तीय सलाह नहीं।
यह पन्ना: https://seedhamatlab.com/shabdkosh/loan-settlement/ · आख़िरी जाँच: 12 अक्तू 2026
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