1मतलब
CIBIL एक Credit Information Company (CIC) है। RBI के निर्देशों में CIC उन कंपनियों को कहा गया है, जिन्हें Credit Information Companies (Regulation) Act, 2005 (CICRA) की धारा 5 के तहत registration का certificate मिला है। RBI के पास पंजीकृत चार CIC की सूची में इसका नाम TransUnion CIBIL Limited है, और इसके certificate की तारीख़ 5 मार्च 2012 है।[1]
RBI की 2014 की एक committee report में इसका नाम Credit Information Bureau (India) Ltd. (CIBIL) लिखा है। Report के मुताबिक यह कंपनी अगस्त 2000 में बनी, और इसने अप्रैल 2004 में credit bureau का काम शुरू किया।[2]
2इसका मतलब आपके लिए क्या है
- CIBIL अकेली नहीं है: RBI के पास चार CIC पंजीकृत हैं: CRIF, Equifax, Experian और TransUnion CIBIL।[1] हर bank को सभी CIC का सदस्य बनना है, और अपने borrowers की credit information सभी CIC को भेजनी है।[3]
- Score का पैमाना सबका एक: हर CIC credit score को 300 से 900 के पैमाने पर रखती है।[1]
- साल में एक मुफ़्त पूरी report: माँगने पर और पहचान की पुष्टि के बाद, हर CIC को साल में एक बार पूरी Credit Report, credit score समेत, मुफ़्त देनी है। यह उन लोगों के लिए है, जिनका credit score उस CIC के पास है।[1]
- Report देखी जाए, तो आपको ख़बर: जब कोई Specified User आपकी report देखे, तो CIC आपको SMS या email से alert भेजेगी, अगर आपका mobile number या email उसके पास है।[1]
3जानकारी कैसे चलती है
Bank आपकी जानकारी सिर्फ़ CIBIL को नहीं, सभी CIC को भेजता है।
- Bank, NBFC और ऐसी दूसरी संस्थाएँ अपने borrowers की credit information CIC को भेजती हैं।[1]
- हर bank सभी CIC का सदस्य होता है, और अपने borrowers की जानकारी सभी CIC को भेजता है।[3]
- Bank को अपनी loan policy में CIC से report लेने का इंतज़ाम रखना है।[3]
4CIBIL कब और कैसे बनी
- 1999: भारत में Credit Information Bureau बनाने की संभावना देखने के लिए एक Working Group बना।[2]
- अगस्त 2000: Credit Information Bureau (India) Ltd. (CIBIL) बनी।[2]
- अप्रैल 2004 और मई 2006: इसने पहले credit bureau का, और फिर commercial bureau का काम शुरू किया।[2]
- 2005: Credit Information Companies (Regulation) Act बना।[2]
- अप्रैल 2009: CIBIL को in-principle approval मिला, क्योंकि यह क़ानून बनने से पहले से CIC का काम कर रही थी।[2]
- 2012: इसे registration का certificate मिला।[2] RBI के निर्देशों में इसकी तारीख़ 5 मार्च 2012 लिखी है।[1]
- 300 से 900 का पैमाना: 2014 की report के मुताबिक उस समय CIBIL का score 300 से 900 के पैमाने पर था, और बाक़ी CIC के तरीक़े अलग थे। Committee ने सुझाया कि बाक़ी CIC भी यही पैमाना अपनाएँ।[2] आज RBI के निर्देशों में हर CIC के लिए यही पैमाना है।[1]
5आम ग़लतफ़हमी
6आपका अधिकार
- CIC को आपको बताना है कि शिकायत पर क्या किया गया। शिकायत ख़ारिज हो, तो उसकी वजह भी बतानी है।[1]
- मुआवज़ा शिकायत सुलझने के 5 working दिन के भीतर आपके bank खाते में आना चाहिए।[1]
- CIC मुआवज़ा ग़लत तरीक़े से न दे, तो आप RBI Ombudsman के पास जा सकते हैं।[1]
7अभी क्या करें
- साल में एक बार सिर्फ़ CIBIL से नहीं, हर CIC की अपनी website से मुफ़्त report लीजिए। CIC को इसका link अपने homepage पर ही दिखाना है।[1]
- Report में ग़लती दिखे, तो शिकायत उस bank के पास या CIC के पास दर्ज कीजिए। ग़लती एक से ज़्यादा संस्थाओं की जानकारी में हो, तो शिकायत CIC के पास दर्ज कीजिए।[3]
- शिकायत में अपना contact, email और bank खाते या UPI ID का ब्योरा सही भरिए; मुआवज़ा उसी में आता है।[1]
8सवाल-जवाब
9जुड़े शब्द
पूरा लेख: CIBIL रिपोर्ट में गलत entry? शिकायत 30 दिन में न निपटे तो ₹100 रोज़ मुआवज़ा
10स्रोत
- RBI — Reserve Bank of India (Credit Information Companies) Directions, 2025 (RBI/DOR/2025-26/378; Updated as on July 01, 2026) ↗किस बात के लिए, दस्तावेज़ का कौन-सा हिस्सा
- पैरा 4(2)CIC की परिभाषा; पंजीकृत चार CIC की सूची; TransUnion CIBIL Limited; certificate की तारीख़ 5 मार्च 2012
- पैरा 4(3)bank, NBFC जैसी संस्थाएँ CIC को जानकारी भेजती हैं
- पैरा 21(7)score 300 से 900; साल में एक मुफ़्त पूरी report, score समेत; homepage पर link
- पैरा 25(2)ग़लत data वही संस्था ठीक करती है, जिसने भेजा था
- पैरा 37(i)report देखे जाने पर SMS / email alert
- पैरा 41(1), (3), (5), (6), (7)30 दिन बाद ₹100 रोज़; क्या किया गया, यह बताना; शिकायत में खाते का ब्योरा; 5 working दिन; RBI Ombudsman
- RBI — Report of the Committee to Recommend Data Format for Furnishing of Credit Information to Credit Information Companies ↗किस बात के लिए, दस्तावेज़ का कौन-सा हिस्सा
- पैरा 1.31999 का Working Group; CIBIL अगस्त 2000 में बनी; अप्रैल 2004 और मई 2006 में काम शुरू
- पैरा 1.4 और 1.5CICRA 2005 में बना; अप्रैल 2009 में in-principle approval; 2012 में certificate
- पैरा 5.5 और 5.6उस समय चारों CIC के score के पैमाने; 300 से 900 वाला सुझाव
- RBI — Reserve Bank of India (Commercial Banks – Credit Information Reporting) Directions, 2025 (RBI/DOR/2025-26/156; Updated as on July 01, 2026) ↗किस बात के लिए, दस्तावेज़ का कौन-सा हिस्सा
- पैरा 6 और 10(1)bank सभी CIC का सदस्य; सभी CIC को जानकारी भेजना
- पैरा 20bank की loan policy में CIC से report लेने का इंतज़ाम
- पैरा 36(1) और 36(5)शिकायत bank या CIC के पास; एक से ज़्यादा संस्थाओं वाली शिकायत CIC के पास
11सुधार का इतिहास
- पन्ना बना। RBI के Credit Information Companies Directions, 2025, Commercial Banks – Credit Information Reporting Directions, 2025 और RBI की 2014 की committee report से जाँचा।
पन्ना बना: 07 अक्तू 2026 · आख़िरी जाँच: 07 अक्तू 2026
यह सामान्य जानकारी है, कानूनी या वित्तीय सलाह नहीं।