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शब्द · क़र्ज़✓ स्रोत से जाँचा · 16 Oct 2026

Personal Loan

पर्सनल लोन · RBI की नज़र में व्यक्ति को दिया हर निजी क़र्ज़, घर और पढ़ाई समेत

एक लाइन में

आम बोलचाल में personal loan का मतलब बिना ज़मानत वाला छोटा क़र्ज़ समझा जाता है, पर RBI की परिभाषा में व्यक्ति को दिया गया consumer credit, education loan, घर बनाने या सुधारने का loan, और shares जैसे निवेश के लिए loan, सब personal loans हैं। RBI के नियमों में इन पर floating ब्याज बदलने पर विकल्प, हर तिमाही statement, और loan चुकाने के 30 दिन में काग़ज़ वापस न करने पर ₹5,000 रोज़ हर्जाने जैसे हक़ दिए गए हैं।

RBI की परिभाषाघर और पढ़ाई का loan भी4 जनवरी 2018 circular
काग़ज़ वापसी30 दिन मेंपूरा चुकाने / settlement के बाद
देर पर हर्जाना₹5,000 रोज़देर bank की वजह से हो तो
Floating loan statementहर तिमाहीEMI, बचे EMI, APR समेत

मतलब

RBI की परिभाषा में personal loans वे सारे loans हैं, जो व्यक्तियों को दिए जाते हैं: consumer credit, education loan, घर बनाने या सुधारने का loan, और shares / debentures जैसे financial assets में निवेश के लिए loan।[1] RBI के आचरण-संबंधी निर्देश इसी परिभाषा को अपनाते हैं।[2]

इसका मतलब आपके लिए क्या है

  • Floating दर पर विकल्प: दर बढ़े तो EMI, अवधि या prepayment में से चुनने का हक़।[2]
  • हर तिमाही हिसाब: EMI, बचे EMI और APR के साथ statement।[2]
  • काग़ज़ 30 दिन में: देरी bank की वजह से हो, तो ₹5,000 रोज़।[2]

Personal loan में आपके हक़

RBI के मुताबिक EMI वाले personal loans में floating ब्याज दर बदलने पर bank को EMI या अवधि में बदलाव तुरंत बताना है, और आपको EMI बढ़ाने, अवधि बढ़ाने, दोनों, या पूरा / आंशिक prepay करने का विकल्प देना है।

आम ग़लतफ़हमी

✕ ग़लतफ़हमी"Personal loan का मतलब सिर्फ़ बिना ज़मानत वाला loan है।"
✓ सचRBI की परिभाषा ऐसी नहीं है। RBI के 4 जनवरी 2018 के circular के मुताबिक व्यक्तियों को दिए personal loans में consumer credit (जैसे consumer durable, credit card बकाया, निजी गाड़ी का loan, gold या FD पर निजी loan), education loan, घर बनाने या सुधारने का loan, और shares / debentures में निवेश के लिए loan, सब शामिल हैं।[1]
✕ ग़लतफ़हमी"ब्याज दर बढ़ी, तो bank चुपचाप अवधि बढ़ा सकता है।"
✓ सचनहीं। RBI के मुताबिक sanction के समय ही दर बदलने का EMI / अवधि पर असर बताना है, और बाद में EMI या अवधि बढ़े, तो तुरंत बताना है। अवधि ऐसे नहीं बढ़ाई जा सकती कि बकाया घटने के बजाय बढ़ने लगे (negative amortisation)।[2]
✕ ग़लतफ़हमी"Loan चुका दिया, अब काग़ज़ bank जब चाहे लौटाए।"
✓ सचनहीं। RBI के मुताबिक पूरा चुकाने या settlement के 30 दिन के भीतर सारे असली काग़ज़ लौटाने हैं और registry में दर्ज charge हटाना है। देर bank की वजह से हो, तो ₹5,000 हर दिन का हर्जाना है।[2]

आपका अधिकार

Floating ब्याज वाले EMI loan में दर बदलने पर bank आपको तुरंत बताए और EMI, अवधि या prepayment का विकल्प दे। Loan पूरा चुकाने या settlement के 30 दिन के भीतर सारे असली काग़ज़ लौटाए और charge हटाए; देरी bank की वजह से हो, तो ₹5,000 हर दिन का हर्जाना दे।[2]

अभी क्या करें

  • Sanction letter में दर बदलने का असर, switch के charges, और काग़ज़ लौटाने की समय-सीमा और जगह देखिए।[2]
  • हर तिमाही का statement माँगिए और EMI / बचे EMI मिलाइए।[2]
  • Loan बंद होने के बाद 30 दिन तक काग़ज़ न मिलें, तो bank से लिखित में कारण माँगिए।[2]

सवाल-जवाब

Floating rate बढ़ने पर मेरे पास क्या विकल्प हैं?RBI के मुताबिक आप चुन सकते हैं: EMI बढ़ाना, अवधि बढ़ाना या दोनों; पूरे या आंशिक prepayment का विकल्प कभी भी; और bank की नीति हो तो fixed rate पर जाना। Fixed पर जाने के और बाक़ी charges sanction letter में और bank की website पर बताए जाने चाहिए।[2]
Bank हर तिमाही क्या बताएगा?RBI के मुताबिक हर तिमाही के अंत में एक सरल statement, जिसमें अब तक वसूला मूलधन और ब्याज, EMI, बचे EMI की संख्या और पूरी अवधि का सालाना ब्याज / APR हो।[2]
काग़ज़ कहाँ से मिलेंगे?RBI के मुताबिक आप अपनी पसंद से वह शाखा चुन सकते हैं जहाँ loan चला, या bank का कोई और दफ़्तर जहाँ काग़ज़ रखे हैं। 1 दिसंबर 2023 या उसके बाद के sanction letter में काग़ज़ लौटाने की समय-सीमा और जगह लिखी होनी चाहिए।[2]
काग़ज़ खो जाएँ तो?RBI के मुताबिक bank duplicate या certified copy दिलाने में मदद करेगा, उसका ख़र्च उठाएगा और हर्जाना भी देगा; ऐसे में bank को 30 दिन और मिलते हैं, यानी हर्जाना कुल 60 दिन के बाद से गिना जाता है।[2]
ये नियम किन banks पर लागू हैं?यहाँ लिखे RBI के Responsible Business Conduct Directions commercial banks के लिए हैं।[2]

जुड़े शब्द

स्रोत

  1. RBI — XBRL Returns – Harmonization of Banking Statistics, RBI/2017-18/117, DBR.No.BP.BC.99/08.13.100/2017-18, 4 जनवरी 2018 (16 अक्टूबर 2026 को पढ़ा) ↗जारी: 04 जन 2018किस बात के लिए, दस्तावेज़ का कौन-सा हिस्सा
    • Annex, क्रम 1 Consumer Creditconsumer durable, credit card बकाया, निजी auto loan, gold / जायदाद / FD / shares पर निजी loan, professionals के निजी loan, शादी जैसे उपभोग के loan
    • Annex, क्रम 2 Personal loansव्यक्तियों को: consumer credit, education loan, घर बनाने / सुधारने का loan, financial assets में निवेश के लिए loan
  2. RBI — Reserve Bank of India (Commercial Banks – Responsible Business Conduct) Directions, 2025 (RBI/DOR/2025-26/170; DOR.MCS.REC.No.89/01-01-032/2025-26; Updated as on October 1, 2026; 16 अक्टूबर 2026 को पढ़ा) ↗जारी: 28 नव 2025किस बात के लिए, दस्तावेज़ का कौन-सा हिस्सा
    • पैरा 4(24)Personal Loans की परिभाषा 4 जनवरी 2018 के harmonised statistics circular से
    • पैरा 349(1)–(6), 350sanction पर दर बदलने का असर; EMI / अवधि बदलने की तुरंत सूचना; fixed पर जाने का विकल्प (नीति हो तो); EMI / अवधि / prepay के विकल्प; charges sanction letter और website पर; negative amortisation नहीं; हर तिमाही statement
    • पैरा 354–360पूरा चुकाने / settlement के 30 दिन में काग़ज़ वापस और charge हटाना; शाखा या दफ़्तर चुनने का हक़; sanction letter में समय और जगह; वारिसों के लिए प्रक्रिया; देरी पर ₹5,000 रोज़; काग़ज़ खोने पर ख़र्च bank का, 30 दिन और

सुधार का इतिहास

  • पन्ना बना। RBI के 4 जनवरी 2018 के circular (Harmonization of Banking Statistics) और Responsible Business Conduct Directions (170MD, 1 अक्टूबर 2026 तक updated) से जाँचा।

पन्ना बना: 16 अक्तू 2026 · आख़िरी जाँच: 16 अक्तू 2026
यह सामान्य जानकारी है, कानूनी या वित्तीय सलाह नहीं।

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