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शब्द · क़र्ज़✓ स्रोत से जाँचा · 12 Oct 2026

Fixed vs Floating Rate

तय दर बनाम बदलने वाली दर · loan की ब्याज दर के दो प्रकार

एक लाइन में

Fixed rate loan में ब्याज दर loan की पूरी अवधि के लिए तय रहती है; floating rate loan में दर अवधि के दौरान तय नहीं रहती, क्योंकि वह एक benchmark और spread से बनती है। Commercial bank floating loan का spread मनमर्ज़ी से नहीं बदल सकता, और reset पर fixed rate का विकल्प देना lender की मर्ज़ी है।

Fixed rate loanपूरी अवधि तयRBI की परिभाषा
Floating दरBenchmark + spreadbenchmark loan contract में लिखा
Spread के बाक़ी हिस्से3 साल में एक बारबाहरी benchmark वाला bank loan; घटाना पहले भी
Floating से fixedLender की मर्ज़ीcharges sanction letter और website पर

मतलब

RBI के निर्देशों में fixed rate loan वह है, जिसकी ब्याज दर loan की पूरी अवधि के लिए तय रहती है। Floating rate loan की दर अवधि के दौरान तय नहीं रहती।[1]

  • दोनों विकल्प: commercial bank हर तरह का loan fixed या floating दर पर दे सकता है।[1]
  • Hybrid: कुछ loans में दर कुछ हिस्से पर fixed और कुछ पर floating होती है; floating हिस्से पर floating दर के नियम लागू होते हैं।[1]

इसका मतलब आपके लिए क्या है

  • Floating में बदलाव: EMI वाले personal loans में benchmark बदलने का असर EMI, अवधि या दोनों पर पड़ सकता है; loan मंज़ूर करते समय bank या NBFC को यह बताना होता है।[2][3]
  • काग़ज़ में लिखा: 1 अक्टूबर 2024 या उसके बाद मंज़ूर retail और MSME term loans के KFS में लिखा होता है कि दर fixed है, floating या hybrid।[2][3]

Floating दर कैसे बनती है

Fixed rate loan में दर loan की पूरी अवधि के लिए तय रहती है।

  • Benchmark + spread: floating दर reference benchmark में spread जोड़कर बनती है; कौन-सा benchmark, यह loan contract का हिस्सा होता है।[1]
  • एक category, एक benchmark: bank एक loan category में एक ही बाहरी benchmark अपनाता है; उसी category में कई benchmark नहीं चल सकते।[1]
  • KFS में हिसाब: floating loan के KFS में benchmark की दर (B), spread (S), अंतिम दर (R = B + S), reset कितने महीने में, और दर 0.25% बदलने पर किस्त व किस्तों की संख्या पर असर लिखा होता है।[2][3]
  • MCLR वाले loan: reset एक साल या उससे कम में; सही अवधि loan contract में लिखी होती है।[1]

Spread कब बदल सकता है

ये नियम commercial bank के हैं:[1]

  • बाहरी benchmark वाले loan: spread bank तय करता है, पर credit risk premium तभी बदल सकता है, जब आपके credit assessment में बड़ा बदलाव हो, जैसा loan contract में तय है। Operating cost समेत spread के बाक़ी हिस्से 3 साल में एक बार बदल सकते हैं।[1]
  • छूट, शर्त के साथ: bank customer बनाए रखने के लिए किसी loan category में spread के बाक़ी हिस्से 3 साल से पहले घटा सकता है: उचित आधार पर, बिना भेदभाव, और अपनी policy के मुताबिक।[1]
  • MCLR वाले loan: मौजूदा borrower का spread सिर्फ़ उसकी credit risk profile बिगड़ने पर बढ़ सकता है, और उसके लिए पूरी risk profile review ज़रूरी है। यह नियम consortium / multiple banking वाले loans पर लागू नहीं।[1]

Floating से fixed पर जाना

  • Lender की मर्ज़ी: EMI वाले personal loans में दर reset होने पर bank या NBFC, अपनी policy के मुताबिक, fixed rate पर जाने का विकल्प दे सकता है। Policy यह भी बता सकती है कि पूरी अवधि में कितनी बार switch कर सकेंगे।[2][3]
  • Charges पहले से: floating से fixed पर जाने के सारे charges sanction letter में, और बदलने पर भी, साफ़ बताने हैं, और website पर दिखाने हैं।[2][3]
  • Application में ही: bank को loan application के समय fixed ↔ floating बदलने का conversion charge, और interest reset clause है या नहीं, बताना है।[2]

आम ग़लतफ़हमी

✕ ग़लतफ़हमी"Floating loan में bank जब चाहे अपना हिस्सा (spread) बढ़ा सकता है।"
✓ सचनहीं। Commercial bank के बाहरी benchmark वाले loan में credit risk premium सिर्फ़ आपके credit assessment में बड़े बदलाव पर, contract के मुताबिक, बदल सकता है; spread के बाक़ी हिस्से 3 साल में एक बार।[1]
✕ ग़लतफ़हमी"Floating से fixed पर जाना मेरा हक़ है।"
✓ सचनहीं। Reset के समय fixed rate का विकल्प देना bank या NBFC की मर्ज़ी है, उनकी policy के मुताबिक। जहाँ विकल्प है, वहाँ उसके charges पहले से बताने होते हैं।[2][3]
✕ ग़लतफ़हमी"Hybrid loan पर floating के नियम नहीं लगते।"
✓ सचलगते हैं। जिस loan में दर कुछ हिस्से पर fixed और कुछ पर floating हो, उसके floating हिस्से पर floating दर के नियम लागू होते हैं।[1]

आपका अधिकार

Commercial bank के बाहरी benchmark वाले floating loan में credit risk premium तभी बदल सकता है, जब आपके credit assessment में बड़ा बदलाव हो, जैसा contract में तय है; और spread के बाक़ी हिस्से 3 साल में एक बार ही बदल सकते हैं (घटाना इससे पहले भी हो सकता है)।[1]

अभी क्या करें

  • Loan लेने से पहले KFS में देखिए: दर fixed है, floating या hybrid; floating हो, तो benchmark, spread और reset की अवधि।[2][3]
  • Sanction letter में देखिए कि floating से fixed पर जाने का charge क्या है, और policy में कितनी बार switch की छूट है।[2][3]
  • Floating दर बढ़े, तो bank से पूछिए कि बदलाव benchmark में हुआ है या spread में।[1]

सवाल-जवाब

कौन-सा बेहतर है, fixed या floating?इन निर्देशों में किसी एक को बेहतर नहीं बताया गया है। Fixed दर पूरी अवधि तय रहती है। Floating दर benchmark के साथ बदलती है, और उसका असर EMI, अवधि या दोनों पर पड़ सकता है।
Benchmark rate क्या है?वह reference दर, जिससे loan की ब्याज दर तय होती है। बाहरी benchmark में RBI का policy Repo Rate, FBIL के 3 और 6 महीने के Treasury Bill yield, या FBIL की कोई और दर आती है; internal benchmark (जैसे MCLR) bank ख़ुद तय करता है।
KFS में "25 bps" वाला हिस्सा क्या है?Floating loan के KFS में लिखा होता है कि दर (R) में 0.25% (25 bps) बदलाव होने पर आपकी किस्त (EPI) और किस्तों की संख्या कितनी बदलेगी।
MCLR वाले loan की दर कितनी बार बदलती है?MCLR वाले loan में reset की अवधि एक साल या उससे कम होती है, और सही अवधि loan contract में लिखी होती है।
NBFC के floating loan पर?NBFC को भी KFS में दर का type, benchmark, spread और reset बताना है, और वह reset पर अपनी policy से fixed का विकल्प दे सकती है। Spread पर रोक वाले नियम commercial bank के निर्देशों के हैं।

जुड़े शब्द

स्रोत

  1. RBI — Reserve Bank of India (Commercial Banks – Interest Rates on Advances) Directions, 2025 (RBI/DOR/2025-26/161; DOR.CRE.REC.80./13.03.000/2025-26; small finance, payments और local area banks पर लागू नहीं), PDF ↗जारी: 28 नव 2025 · लागू: 28 नव 2025किस बात के लिए, दस्तावेज़ का कौन-सा हिस्सा
    • पैरा 3लागू किस पर: commercial banks
    • पैरा 5(3)–(7), Chapter III-Abenchmark; बाहरी benchmark; fixed / floating की परिभाषा; internal benchmark, जिसमें MCLR
    • पैरा 6(3)–(5)fixed या floating, दोनों; दर = benchmark + spread; benchmark contract में
    • पैरा 27एक loan category में एक ही बाहरी benchmark
    • पैरा 31, 33spread: MCLR में credit risk बिगड़ने पर ही; बाहरी benchmark में 3 साल में एक बार
    • पैरा 36MCLR reset एक साल या कम; contract में
    • पैरा 45(4)(v)hybrid loan का floating हिस्सा floating नियमों से
  2. RBI — Reserve Bank of India (Commercial Banks – Responsible Business Conduct) Directions, 2025 (RBI/DOR/2025-26/170; DOR.MCS.REC.No.89/01-01-032/2025-26; Updated as on October 1, 2026; small finance, payments और local area banks पर लागू नहीं), PDF ↗जारी: 28 नव 2025 · लागू: 28 नव 2025किस बात के लिए, दस्तावेज़ का कौन-सा हिस्सा
    • पैरा 327application में fixed ↔ floating conversion charge और reset clause
    • पैरा 348, Annex XIII1 अक्टूबर 2024 से retail / MSME term loan का KFS: दर का type; B, S, R, reset, 25 bps; switching charge
    • पैरा 349(1), (2), (4)EMI / अवधि पर असर; fixed का विकल्प bank की मर्ज़ी; charges sanction letter और website पर
  3. RBI — Reserve Bank of India (Non-Banking Financial Companies – Responsible Business Conduct) Directions, 2025 (RBI/DOR/2025-26/362; DOR.MCS.REC.No.281/01-01-039/2025-26; Updated as on July 1, 2026; HFC पर भी लागू), PDF ↗जारी: 28 नव 2025 · लागू: 28 नव 2025किस बात के लिए, दस्तावेज़ का कौन-सा हिस्सा
    • पैरा 29, Annex INBFC के KFS में भी दर का type, floating का ब्योरा, switching charge
    • पैरा 31(1), (2), (4)NBFC: EMI / अवधि पर असर; fixed का विकल्प policy से; charges पहले से

सुधार का इतिहास

  • पन्ना बना। RBI के Commercial Banks – Interest Rates on Advances Directions, 2025, Commercial Banks – Responsible Business Conduct Directions, 2025 (1 अक्टूबर 2026 तक updated) और NBFC – Responsible Business Conduct Directions, 2025 (1 जुलाई 2026 तक updated) से जाँचा।

पन्ना बना: 12 अक्तू 2026 · आख़िरी जाँच: 12 अक्तू 2026
यह सामान्य जानकारी है, कानूनी या वित्तीय सलाह नहीं।

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