नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट, 1881 · cheque, promissory note और bill of exchange का क़ानून
एक लाइन में
NI Act यानी Negotiable Instruments Act, 1881 (Act No. 26 of 1881)। यह promissory note, bill of exchange और cheque का क़ानून है, जो 1 मार्च 1882 से लागू है। Cheque bounce होने पर सज़ा का नियम (धारा 138) भी इसी क़ानून में है।
Act No.26 of 1881India Code
लागू1 मार्च 1882धारा 1
Negotiable instrument3 तरह केpromissory note, bill of exchange, cheque (धारा 13)
Cheque bounceधारा 1382 साल तक जेल या cheque की दोगुनी रक़म तक जुर्माना
1मतलब
NI Act यानी Negotiable Instruments Act, 1881।[1] धारा 13(1) के मुताबिक negotiable instrument का मतलब promissory note, bill of exchange या cheque है, जो order या bearer को देय हो।[1]
परिभाषाएँ: promissory note (धारा 4), bill of exchange (धारा 5), cheque (धारा 6)।[1]
Cheque bounce: सज़ा का नियम धारा 138 में, शिकायत के नियम धारा 142 में।[1]
2Cheque bounce होने पर क्या होता है
Cheque लौटाखाते में पैसा कम
पाने वाला→धारा 138(b)
30 दिन में noticebank से जानकारी मिलने के बाद
लिखने वाला→धारा 138(c), 142(1)(b)
15 दिन में भुगतान नहींतो एक महीने में शिकायत
धारा 138 के मुताबिक किसी क़र्ज़ या देनदारी के लिए दिया cheque खाते में पैसा कम होने से लौट आए, तो पाने वाला bank से जानकारी मिलने के 30 दिन के अंदर लिखित notice देता है। Notice मिलने के 15 दिन में भुगतान न हो, तो अपराध बनता है, और धारा 142(1)(b) के मुताबिक उसके बाद एक महीने के अंदर शिकायत की जा सकती है।
3आम ग़लतफ़हमी
✕ ग़लतफ़हमी"NI Act सिर्फ़ cheque का क़ानून है।"
✓ सचनहीं। धारा 13(1) के मुताबिक negotiable instrument का मतलब promissory note, bill of exchange या cheque है, जो order या bearer को देय हो; तीनों की परिभाषा धारा 4, 5 और 6 में है।[1]
✕ ग़लतफ़हमी"Cheque bounce का case किसी भी शहर की court में किया जा सकता है।"
✓ सचनहीं। धारा 142(2) में तय है कि case किस court में चलेगा। जैसे, अगर cheque किसी खाते के ज़रिए collection के लिए दिया गया हो, तो case उस court में चलता है, जिसके इलाक़े में पाने वाले के खाते वाली bank branch है।[1]
4सवाल-जवाब
NI Act का पूरा नाम क्या है?The Negotiable Instruments Act, 1881 (धारा 1)।[1]
Cheque की क़ानूनी परिभाषा क्या है?धारा 6 के मुताबिक cheque एक bill of exchange है, जो किसी तय banker पर लिखा जाता है और माँगने पर ही देय होता है; इसमें truncated cheque की electronic image और electronic रूप वाला cheque भी शामिल है।[1]
Promissory note क्या होता है?धारा 4 के मुताबिक यह एक लिखित दस्तावेज़ है (bank-note या currency-note नहीं), जिसमें बनाने वाला बिना शर्त, किसी तय व्यक्ति को, उसके आदेश पर, या दस्तावेज़ रखने वाले (bearer) को तय रक़म देने का वादा करता है और उस पर दस्तख़त करता है।[1]
Cheque bounce पर सज़ा क्या है?धारा 138 के मुताबिक दो साल तक की जेल, या cheque की रक़म के दोगुने तक जुर्माना, या दोनों। यह तभी लागू होता है, जब cheque छह महीने के अंदर (या उसकी validity में, जो पहले हो) bank में दिया गया हो, notice 30 दिन में दिया गया हो, और notice मिलने के 15 दिन में भुगतान न हुआ हो।[1]
क्या court अंतरिम मुआवज़ा दिलवा सकता है?हाँ। धारा 143A के मुताबिक धारा 138 का case सुन रहा court cheque लिखने वाले को शिकायतकर्ता को अंतरिम मुआवज़ा देने का आदेश दे सकता है। यह cheque की रक़म के 20% से ज़्यादा नहीं हो सकता, और आदेश के 60 दिन के अंदर, या court की दी गई ज़्यादा से ज़्यादा 30 दिन की और मोहलत में देना होता है।[1]
क्या cheque bounce के case में समझौता हो सकता है?धारा 147 के मुताबिक इस Act के तहत हर सज़ा वाला अपराध compoundable है, यानी इसमें समझौता हो सकता है।[1]
शिकायत कौन कर सकता है?धारा 142(1)(a) के मुताबिक court सिर्फ़ cheque पाने वाले (payee) या holder in due course की लिखित शिकायत पर ही धारा 138 के अपराध पर कार्रवाई करता है, और 142(1)(c) के मुताबिक यह case Metropolitan Magistrate या Judicial Magistrate First Class से नीचे की court में नहीं चलता।[1]
धारा 4, 5, 6promissory note, bill of exchange, cheque
धारा 13(1)negotiable instrument
धारा 138cheque bounce; सज़ा; 6 महीने, 30 दिन, 15 दिन
धारा 142शिकायत; एक महीना; court; इलाक़ा
धारा 143Aअंतरिम मुआवज़ा, 20% तक
धारा 147compoundable
7सुधार का इतिहास
पन्ना बना। India Code पर The Negotiable Instruments Act, 1881 के पाठ (पाठ पर 'As on' तारीख़ नहीं है; 2018 तक के संशोधन शामिल) की धारा 1, 4, 5, 6, 13(1), 138, 142, 143A और 147 से जाँचा।