1मतलब
DICGC यानी Deposit Insurance and Credit Guarantee Corporation। यह Deposit Insurance and Credit Guarantee Corporation Act, 1961 के तहत बना Corporation है, जो insured banks में रखी जमा का बीमा करता है।[2]
RBI के मुताबिक DICGC उसकी wholly owned subsidiary है।[3]
एक bank में हर जमाकर्ता की जमा पर, मूलधन और ब्याज मिलाकर, ₹5 लाख तक का बीमा है। यह सीमा 4 फ़रवरी 2020 से है; इससे पहले ₹1 लाख थी।[1][3]
2क्या बीमे में आता है
- कौन-से banks: सभी commercial banks, जिनमें भारत में काम कर रहे विदेशी banks की शाखाएँ, local area banks और regional rural banks शामिल हैं। इस समय सभी co-operative banks भी DICGC के बीमे में हैं। Primary cooperative societies का बीमा DICGC नहीं करता।[1]
- कौन-सी जमा: savings, fixed, current, recurring जैसी सभी जमा।[1]
- कौन-सी जमा नहीं: विदेशी सरकारों की जमा; केंद्र और राज्य सरकारों की जमा; inter-bank जमा; State Land Development Banks की State co-operative bank में रखी जमा; भारत के बाहर ली गई जमा; और वह रकम, जिसे DICGC ने RBI की मंज़ूरी से ख़ास तौर पर छूट दी हो।[1]
- ब्याज भी, पर सीमा के अंदर: मूलधन ₹4,95,000 और ब्याज ₹4,000 हो, तो ₹4,99,000 का बीमा है। मूलधन ही ₹5 लाख हो, तो ब्याज बीमे में नहीं आता।[1]
- Premium: जमा बीमे का premium पूरा insured bank उठाता है। योजना अनिवार्य है; कोई bank इससे बाहर नहीं निकल सकता।[1]
3₹5 लाख की सीमा कैसे गिनी जाती है
- एक bank, सभी शाखाएँ: एक bank की अलग-अलग शाखाओं में रखी जमा जोड़ी जाती है, और कुल ₹5 लाख तक ही मिलते हैं।[1]
- अलग bank, अलग सीमा: एक से ज़्यादा banks में जमा हो, तो हर bank की जमा पर सीमा अलग लगती है।[1]
- एक ही हैसियत के खाते: एक व्यक्ति के अपने नाम के सभी खाते (savings, current, FD या recurring) एक ही हैसियत और एक ही अधिकार के माने जाते हैं और जोड़े जाते हैं।[1]
- अलग हैसियत के खाते: firm के partner, नाबालिग के guardian, company के director या trust के trustee के तौर पर, या किसी के साथ joint खाते में रखी जमा अलग हैसियत की मानी जाती है, और उस पर ₹5 लाख तक का बीमा अलग से मिलता है।[1]
- Proprietor: sole proprietor की proprietary concern की जमा और उसकी अपनी जमा जोड़ी जाती हैं।[1]
- Joint खाते: जिन joint खातों में नाम एक ही क्रम में हों, वे जोड़े जाते हैं। नाम का क्रम अलग हो, या लोग अलग हों, तो हर ऐसे joint खाते पर सीमा अलग लगती है।[1]
- Bank का बकाया: bank अपना बकाया जमा में से set off कर सकता है; बीमा उसे घटाने के बाद की रकम पर मिलता है।[1][2]
4पैसा कब और कैसे मिलता है
Bank का liquidation हो, तो DICGC liquidator से सूची मिलने के दो महीने के अंदर भुगतान करता है।
- निकासी पर पाबंदी लगे: Banking Regulation Act, 1949 के तहत ऐसा निर्देश या आदेश आए, जो जमाकर्ताओं को अपनी जमा तक पहुँचने से रोके, तो DICGC उसी तारीख़ से भुगतान के लिए ज़िम्मेदार हो जाता है। यह नियम 1 सितंबर 2021 से लागू है।[2]
- 90 दिन का हिसाब: bank 45 दिन के अंदर जमा की सूची देता है। DICGC 30 दिन के अंदर दावों की जाँच करता है और हर जमाकर्ता से पूछता है कि वह रकम लेना चाहता है या नहीं। इसके 15 दिन के अंदर वह भुगतान करता है, सीधे या bank के ज़रिए खाते में। कुल समय 90 दिन से ज़्यादा नहीं हो सकता।[2]
- अवधि कब बढ़ती है: RBI को bank के विलय या पुनर्गठन की scheme तय करने के लिए ज़रूरी लगे, तो DICGC की देनदारी शुरू होने की तारीख़ 90 दिन तक आगे बढ़ाई जा सकती है। भुगतान से पहले RBI पाबंदी हटा दे और bank बिना रोक के जमा लौटाने की हालत में हो, तो DICGC भुगतान के लिए ज़िम्मेदार नहीं रहता।[2]
- Liquidation हो: liquidator को काम सँभालने के तीन महीने के अंदर जमा की सूची देनी होती है, और DICGC सूची मिलने के दो महीने के अंदर भुगतान करता है।[2] RBI के FAQs के मुताबिक DICGC रकम liquidator को देता है, और liquidator जमाकर्ताओं को।[1]
- विलय या पुनर्गठन हो: DICGC जमा की पूरी रकम या बीमे की सीमा, जो कम हो, और scheme में जमाकर्ता को मिली रकम के बीच का फ़र्क़ देता है।[1]
5आम ग़लतफ़हमी
6आपका अधिकार
- 90 दिन: Banking Regulation Act के तहत लगी पाबंदी से जमा निकालने पर रोक लगे, तो DICGC को कुल 90 दिन के अंदर भुगतान करना है; यह अवधि सिर्फ़ ऊपर बताए हालात में बढ़ती है।[2]
- कोई premium नहीं: बीमे का premium bank उठाता है।[1]
7अभी क्या करें
- जान लीजिए कि आपका bank insured है या नहीं; DICGC insured banks को शाखा में लगाने के लिए leaflets देता है, और शक हो तो शाखा के अधिकारी से पूछा जा सकता है।[1]
- एक bank में अपनी सभी शाखाओं और खातों की जमा जोड़कर देखिए; ₹5 लाख की सीमा इसी जोड़ पर लगती है।[1]
- Bank में जमा निकालने पर पाबंदी लगे, तो DICGC के पूछने पर बताइए कि आप रकम लेना चाहते हैं; भुगतान उन्हीं जमाकर्ताओं को होता है, जो यह रज़ामंदी जताते हैं।[2]
- Bank का आप पर कोई बकाया हो, तो याद रखिए कि बीमे की रकम उसे घटाकर गिनी जाती है।[1]
8सवाल-जवाब
9जुड़े शब्द
10स्रोत
- RBI — FAQs: A Guide to the Deposit Insurance and Credit Guarantee Corporation (DICGC) (पन्ने पर तारीख़ 25 नवंबर 2008 है; पाठ में ₹5 लाख की मौजूदा सीमा है) ↗किस बात के लिए, दस्तावेज़ का कौन-सा हिस्सा
- Q1कौन-से banks insured हैं
- Q2कौन-सी जमा का बीमा होता है, और किनका नहीं
- Q3₹5,00,000 की सीमा; मूलधन और ब्याज; कौन-सी तारीख़
- Q4bank insured है या नहीं, यह कैसे जानें
- Q5, Q7एक bank की सभी शाखाएँ और खाते जोड़े जाते हैं
- Q6ब्याज की मिसाल
- Q8, Q9अलग banks की जमा का बीमा अलग
- Q10एक ही और अलग हैसियत; joint खातों में नाम का क्रम
- Q11bank का बकाया घटाकर
- Q12premium bank देता है
- Q13, Q14liquidation और विलय में भुगतान; liquidator के ज़रिए
- Q15, Q16योजना अनिवार्य; premium न देने पर registration रद्द
- India Code — The Deposit Insurance and Credit Guarantee Corporation Act, 1961 (Act No. 47 of 1961) ↗किस बात के लिए, दस्तावेज़ का कौन-सा हिस्सा
- धारा 2, 3Corporation; "deposit" और "insured bank" की परिभाषा
- धारा 16DICGC की देनदारी; सीमा बढ़ाने का अधिकार; set off
- धारा 17liquidation: तीन महीने में सूची; दो महीने में भुगतान
- धारा 18Aपाबंदी लगने पर भुगतान: 45, 30 और 15 दिन; कुल 90 दिन
- RBI — DICGC increases the insurance coverage for depositors in all insured banks to ₹5 lakh, press release 2019-2020/1878, 4 फ़रवरी 2020 ↗किस बात के लिए, दस्तावेज़ का कौन-सा हिस्सा
- पूरी releaseसीमा ₹1 लाख से ₹5 लाख, 4 फ़रवरी 2020 से; DICGC RBI की wholly owned subsidiary
11सुधार का इतिहास
- पन्ना बना। RBI के DICGC वाले FAQs, Deposit Insurance and Credit Guarantee Corporation Act, 1961 (India Code) और RBI की 4 फ़रवरी 2020 की press release से जाँचा।
पन्ना बना: 07 अक्तू 2026 · आख़िरी जाँच: 07 अक्तू 2026
यह सामान्य जानकारी है, कानूनी या वित्तीय सलाह नहीं।