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शब्द · बैंकिंग✓ स्रोत से जाँचा · 7 Oct 2026

DICGC

वह संस्था, जो bank में रखी जमा का बीमा करती है

एक लाइन में

DICGC (Deposit Insurance and Credit Guarantee Corporation) RBI की पूरी मालिकी वाली संस्था है, जो bank में रखी जमा का बीमा करती है। Bank का liquidation हो जाए, या Banking Regulation Act के तहत लगी पाबंदी से जमा निकालने पर रोक लगे, तो हर जमाकर्ता को, मूलधन और ब्याज मिलाकर, ₹5 लाख तक मिलते हैं। इसका premium bank देता है।

बीमे की सीमा₹5 लाखहर bank में; मूलधन और ब्याज मिलाकर
Premium देता हैBankपूरा premium insured bank उठाता है
पाबंदी लगे, तो भुगतान90 दिन मेंDICGC की देनदारी शुरू होने से
₹5 लाख की सीमा4 फ़रवरी 2020 सेइससे पहले ₹1 लाख थी

मतलब

DICGC यानी Deposit Insurance and Credit Guarantee Corporation। यह Deposit Insurance and Credit Guarantee Corporation Act, 1961 के तहत बना Corporation है, जो insured banks में रखी जमा का बीमा करता है।[2]

RBI के मुताबिक DICGC उसकी wholly owned subsidiary है।[3]

एक bank में हर जमाकर्ता की जमा पर, मूलधन और ब्याज मिलाकर, ₹5 लाख तक का बीमा है। यह सीमा 4 फ़रवरी 2020 से है; इससे पहले ₹1 लाख थी।[1][3]

क्या बीमे में आता है

  • कौन-से banks: सभी commercial banks, जिनमें भारत में काम कर रहे विदेशी banks की शाखाएँ, local area banks और regional rural banks शामिल हैं। इस समय सभी co-operative banks भी DICGC के बीमे में हैं। Primary cooperative societies का बीमा DICGC नहीं करता।[1]
  • कौन-सी जमा: savings, fixed, current, recurring जैसी सभी जमा।[1]
  • कौन-सी जमा नहीं: विदेशी सरकारों की जमा; केंद्र और राज्य सरकारों की जमा; inter-bank जमा; State Land Development Banks की State co-operative bank में रखी जमा; भारत के बाहर ली गई जमा; और वह रकम, जिसे DICGC ने RBI की मंज़ूरी से ख़ास तौर पर छूट दी हो।[1]
  • ब्याज भी, पर सीमा के अंदर: मूलधन ₹4,95,000 और ब्याज ₹4,000 हो, तो ₹4,99,000 का बीमा है। मूलधन ही ₹5 लाख हो, तो ब्याज बीमे में नहीं आता।[1]
  • Premium: जमा बीमे का premium पूरा insured bank उठाता है। योजना अनिवार्य है; कोई bank इससे बाहर नहीं निकल सकता।[1]

₹5 लाख की सीमा कैसे गिनी जाती है

  • एक bank, सभी शाखाएँ: एक bank की अलग-अलग शाखाओं में रखी जमा जोड़ी जाती है, और कुल ₹5 लाख तक ही मिलते हैं।[1]
  • अलग bank, अलग सीमा: एक से ज़्यादा banks में जमा हो, तो हर bank की जमा पर सीमा अलग लगती है।[1]
  • एक ही हैसियत के खाते: एक व्यक्ति के अपने नाम के सभी खाते (savings, current, FD या recurring) एक ही हैसियत और एक ही अधिकार के माने जाते हैं और जोड़े जाते हैं।[1]
  • अलग हैसियत के खाते: firm के partner, नाबालिग के guardian, company के director या trust के trustee के तौर पर, या किसी के साथ joint खाते में रखी जमा अलग हैसियत की मानी जाती है, और उस पर ₹5 लाख तक का बीमा अलग से मिलता है।[1]
  • Proprietor: sole proprietor की proprietary concern की जमा और उसकी अपनी जमा जोड़ी जाती हैं।[1]
  • Joint खाते: जिन joint खातों में नाम एक ही क्रम में हों, वे जोड़े जाते हैं। नाम का क्रम अलग हो, या लोग अलग हों, तो हर ऐसे joint खाते पर सीमा अलग लगती है।[1]
  • Bank का बकाया: bank अपना बकाया जमा में से set off कर सकता है; बीमा उसे घटाने के बाद की रकम पर मिलता है।[1][2]

पैसा कब और कैसे मिलता है

Bank का liquidation हो, तो DICGC liquidator से सूची मिलने के दो महीने के अंदर भुगतान करता है।

  • निकासी पर पाबंदी लगे: Banking Regulation Act, 1949 के तहत ऐसा निर्देश या आदेश आए, जो जमाकर्ताओं को अपनी जमा तक पहुँचने से रोके, तो DICGC उसी तारीख़ से भुगतान के लिए ज़िम्मेदार हो जाता है। यह नियम 1 सितंबर 2021 से लागू है।[2]
  • 90 दिन का हिसाब: bank 45 दिन के अंदर जमा की सूची देता है। DICGC 30 दिन के अंदर दावों की जाँच करता है और हर जमाकर्ता से पूछता है कि वह रकम लेना चाहता है या नहीं। इसके 15 दिन के अंदर वह भुगतान करता है, सीधे या bank के ज़रिए खाते में। कुल समय 90 दिन से ज़्यादा नहीं हो सकता।[2]
  • अवधि कब बढ़ती है: RBI को bank के विलय या पुनर्गठन की scheme तय करने के लिए ज़रूरी लगे, तो DICGC की देनदारी शुरू होने की तारीख़ 90 दिन तक आगे बढ़ाई जा सकती है। भुगतान से पहले RBI पाबंदी हटा दे और bank बिना रोक के जमा लौटाने की हालत में हो, तो DICGC भुगतान के लिए ज़िम्मेदार नहीं रहता।[2]
  • Liquidation हो: liquidator को काम सँभालने के तीन महीने के अंदर जमा की सूची देनी होती है, और DICGC सूची मिलने के दो महीने के अंदर भुगतान करता है।[2] RBI के FAQs के मुताबिक DICGC रकम liquidator को देता है, और liquidator जमाकर्ताओं को।[1]
  • विलय या पुनर्गठन हो: DICGC जमा की पूरी रकम या बीमे की सीमा, जो कम हो, और scheme में जमाकर्ता को मिली रकम के बीच का फ़र्क़ देता है।[1]

आम ग़लतफ़हमी

✕ ग़लतफ़हमी"Bank डूब गया, तो सारा पैसा गया।"
✓ सचग़लत। RBI के FAQs के मुताबिक हर जमाकर्ता की जमा पर, मूलधन और ब्याज मिलाकर, ₹5 लाख तक का बीमा है।[1]
✕ ग़लतफ़हमी"एक ही bank की अलग-अलग शाखाओं में पैसा रखूँ, तो हर शाखा में ₹5 लाख सुरक्षित हैं।"
✓ सचग़लत। एक bank की सभी शाखाओं में रखी जमा जोड़ी जाती है, और कुल ₹5 लाख तक ही मिलते हैं। अलग-अलग banks में रखी जमा पर सीमा अलग-अलग लगती है।[1]
✕ ग़लतफ़हमी"₹5 लाख सिर्फ़ मूलधन पर है; ब्याज इसके ऊपर मिलेगा।"
✓ सचग़लत। सीमा मूलधन और ब्याज, दोनों को मिलाकर है। मूलधन ही ₹5 लाख हो, तो ब्याज बीमे में नहीं आता, क्योंकि वह सीमा के ऊपर की रकम है।[1]
✕ ग़लतफ़हमी"जमा बीमे के लिए ग्राहक को premium देना पड़ता है।"
✓ सचनहीं। RBI के FAQs के मुताबिक जमा बीमे का premium पूरा insured bank उठाता है।[1]

आपका अधिकार

Insured bank में, एक ही हैसियत में रखी आपकी जमा पर, मूलधन और ब्याज मिलाकर, ₹5 लाख तक का बीमा है।[1]
  • 90 दिन: Banking Regulation Act के तहत लगी पाबंदी से जमा निकालने पर रोक लगे, तो DICGC को कुल 90 दिन के अंदर भुगतान करना है; यह अवधि सिर्फ़ ऊपर बताए हालात में बढ़ती है।[2]
  • कोई premium नहीं: बीमे का premium bank उठाता है।[1]

अभी क्या करें

  • जान लीजिए कि आपका bank insured है या नहीं; DICGC insured banks को शाखा में लगाने के लिए leaflets देता है, और शक हो तो शाखा के अधिकारी से पूछा जा सकता है।[1]
  • एक bank में अपनी सभी शाखाओं और खातों की जमा जोड़कर देखिए; ₹5 लाख की सीमा इसी जोड़ पर लगती है।[1]
  • Bank में जमा निकालने पर पाबंदी लगे, तो DICGC के पूछने पर बताइए कि आप रकम लेना चाहते हैं; भुगतान उन्हीं जमाकर्ताओं को होता है, जो यह रज़ामंदी जताते हैं।[2]
  • Bank का आप पर कोई बकाया हो, तो याद रखिए कि बीमे की रकम उसे घटाकर गिनी जाती है।[1]

सवाल-जवाब

DICGC क्या है?DICGC यानी Deposit Insurance and Credit Guarantee Corporation। यह Deposit Insurance and Credit Guarantee Corporation Act, 1961 के तहत बना Corporation है। RBI की press release के मुताबिक यह RBI की wholly owned subsidiary है।
कौन-से banks DICGC के बीमे में आते हैं?RBI के FAQs के मुताबिक सभी commercial banks, जिनमें भारत में काम कर रहे विदेशी banks की शाखाएँ, local area banks और regional rural banks शामिल हैं। FAQs के मुताबिक इस समय सभी co-operative banks भी DICGC के बीमे में हैं। Primary cooperative societies का बीमा DICGC नहीं करता।
कौन-सी जमा का बीमा होता है?Savings, fixed, current, recurring जैसी सभी जमा का। इनका नहीं: विदेशी सरकारों की जमा; केंद्र और राज्य सरकारों की जमा; inter-bank जमा; State Land Development Banks की State co-operative bank में रखी जमा; भारत के बाहर ली गई जमा; और वह रकम, जिसे DICGC ने RBI की मंज़ूरी से ख़ास तौर पर छूट दी हो।
बीमे की सीमा कितनी है?RBI के FAQs के मुताबिक एक bank में हर जमाकर्ता का, एक ही हैसियत और एक ही अधिकार (same right and same capacity) में रखी जमा पर, मूलधन और ब्याज मिलाकर, ₹5,00,000 तक का बीमा है। यह रकम bank के liquidation या licence रद्द होने की तारीख़ को, या विलय या पुनर्गठन की scheme लागू होने की तारीख़ को देखी जाती है।
₹5 लाख की सीमा कब से है?RBI की press release के मुताबिक DICGC ने 4 फ़रवरी 2020 से सीमा ₹1 लाख से बढ़ाकर ₹5 लाख की, भारत सरकार की मंज़ूरी से। Act की धारा 16 के मुताबिक यह सीमा DICGC केंद्र सरकार की पहले से ली गई मंज़ूरी से बढ़ा सकता है।
ब्याज भी बीमे में आता है?हाँ, पर सीमा के अंदर। RBI के FAQs की मिसाल: मूलधन ₹4,95,000 और ब्याज ₹4,000 हो, तो ₹4,99,000 का बीमा है। मूलधन ही ₹5 लाख हो, तो ब्याज बीमे में नहीं आता।
एक ही bank में कई खाते हों, तो?एक व्यक्ति के अपने नाम के सभी खाते (savings, current, fixed या recurring), उस bank की सभी शाखाओं में, जोड़े जाते हैं, और कुल ₹5 लाख तक का बीमा मिलता है।
अलग हैसियत में रखे खातों का क्या?RBI के FAQs के मुताबिक किसी firm के partner, नाबालिग के guardian, company के director या trust के trustee के तौर पर, या किसी के साथ joint खाते में रखी जमा अलग हैसियत और अलग अधिकार की मानी जाती है, और उस पर ₹5 लाख तक का बीमा अलग से मिलता है। पर sole proprietor की proprietary concern की जमा और उसकी अपनी जमा जोड़ी जाती हैं।
Joint खातों में सीमा कैसे लगती है?जिन joint खातों में नाम एक ही क्रम में हों, वे एक ही हैसियत के माने जाते हैं और जोड़े जाते हैं। नाम का क्रम अलग हो (जैसे A, B और B, A), या लोग अलग हों, तो हर ऐसे joint खाते पर ₹5 लाख तक का बीमा अलग से मिलता है।
दो अलग banks में जमा हो, तो?हर bank की जमा पर सीमा अलग लगती है। दोनों banks एक ही दिन बंद हों, तब भी दोनों की जमा का बीमा अलग-अलग गिना जाता है।
Bank का मुझ पर बकाया हो, तो?RBI के FAQs के मुताबिक bank को cut-off तारीख़ पर अपना बकाया जमा में से set off करने का अधिकार है; बीमा इस बकाये को घटाने के बाद की रकम पर मिलता है।
Bank का liquidation हो, तो पैसा कैसे मिलता है?Act की धारा 17 के मुताबिक liquidator को, काम सँभालने के तीन महीने के अंदर, हर जमाकर्ता की जमा की सूची DICGC को देनी होती है, और DICGC सूची मिलने के दो महीने के अंदर भुगतान करता है। RBI के FAQs के मुताबिक DICGC रकम liquidator को देता है, और liquidator जमाकर्ताओं को।
Bank बंद नहीं हुआ, पर जमा निकालने पर पाबंदी लग गई, तो?Act की धारा 18A (1 सितंबर 2021 से लागू) के मुताबिक Banking Regulation Act, 1949 के तहत ऐसा निर्देश या आदेश आए, जो जमाकर्ताओं को अपनी जमा तक पहुँचने से रोके, तो DICGC उसी तारीख़ से भुगतान के लिए ज़िम्मेदार हो जाता है। Bank 45 दिन के अंदर जमा की सूची देता है; DICGC 30 दिन के अंदर दावों की जाँच करता है और हर जमाकर्ता से पूछता है कि वह रकम लेना चाहता है या नहीं; और इसके 15 दिन के अंदर भुगतान करता है। कुल समय 90 दिन से ज़्यादा नहीं हो सकता।
क्या 90 दिन की यह अवधि बढ़ सकती है?धारा 18A के मुताबिक RBI को bank के विलय या पुनर्गठन की scheme तय करने के लिए ज़रूरी लगे, तो DICGC की देनदारी शुरू होने की तारीख़ 90 दिन तक आगे बढ़ाई जा सकती है। और DICGC के भुगतान से पहले RBI पाबंदी हटा दे और bank बिना रोक के जमा लौटाने की हालत में हो, तो DICGC भुगतान के लिए ज़िम्मेदार नहीं रहता।
कैसे पता चले कि मेरा bank insured है?RBI के FAQs के मुताबिक DICGC insured banks को शाखा में लगाने के लिए छपे leaflets देता है, जिनमें जमाकर्ताओं को मिलने वाली सुरक्षा की जानकारी होती है। शक हो, तो शाखा के अधिकारी से पूछिए।
क्या कोई bank इस बीमे से बाहर निकल सकता है?नहीं। RBI के FAQs के मुताबिक जमा बीमा योजना अनिवार्य है, और कोई bank इससे बाहर नहीं निकल सकता। Bank लगातार तीन अवधियों का premium न दे, तो DICGC उसका registration रद्द कर सकता है; तब इसकी सूचना अख़बारों से दी जाती है।

जुड़े शब्द

स्रोत

  1. RBI — FAQs: A Guide to the Deposit Insurance and Credit Guarantee Corporation (DICGC) (पन्ने पर तारीख़ 25 नवंबर 2008 है; पाठ में ₹5 लाख की मौजूदा सीमा है) ↗किस बात के लिए, दस्तावेज़ का कौन-सा हिस्सा
    • Q1कौन-से banks insured हैं
    • Q2कौन-सी जमा का बीमा होता है, और किनका नहीं
    • Q3₹5,00,000 की सीमा; मूलधन और ब्याज; कौन-सी तारीख़
    • Q4bank insured है या नहीं, यह कैसे जानें
    • Q5, Q7एक bank की सभी शाखाएँ और खाते जोड़े जाते हैं
    • Q6ब्याज की मिसाल
    • Q8, Q9अलग banks की जमा का बीमा अलग
    • Q10एक ही और अलग हैसियत; joint खातों में नाम का क्रम
    • Q11bank का बकाया घटाकर
    • Q12premium bank देता है
    • Q13, Q14liquidation और विलय में भुगतान; liquidator के ज़रिए
    • Q15, Q16योजना अनिवार्य; premium न देने पर registration रद्द
  2. India Code — The Deposit Insurance and Credit Guarantee Corporation Act, 1961 (Act No. 47 of 1961) ↗किस बात के लिए, दस्तावेज़ का कौन-सा हिस्सा
    • धारा 2, 3Corporation; "deposit" और "insured bank" की परिभाषा
    • धारा 16DICGC की देनदारी; सीमा बढ़ाने का अधिकार; set off
    • धारा 17liquidation: तीन महीने में सूची; दो महीने में भुगतान
    • धारा 18Aपाबंदी लगने पर भुगतान: 45, 30 और 15 दिन; कुल 90 दिन
  3. RBI — DICGC increases the insurance coverage for depositors in all insured banks to ₹5 lakh, press release 2019-2020/1878, 4 फ़रवरी 2020 ↗जारी: 04 फ़र 2020किस बात के लिए, दस्तावेज़ का कौन-सा हिस्सा
    • पूरी releaseसीमा ₹1 लाख से ₹5 लाख, 4 फ़रवरी 2020 से; DICGC RBI की wholly owned subsidiary

सुधार का इतिहास

  • पन्ना बना। RBI के DICGC वाले FAQs, Deposit Insurance and Credit Guarantee Corporation Act, 1961 (India Code) और RBI की 4 फ़रवरी 2020 की press release से जाँचा।

पन्ना बना: 07 अक्तू 2026 · आख़िरी जाँच: 07 अक्तू 2026
यह सामान्य जानकारी है, कानूनी या वित्तीय सलाह नहीं।