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शब्द · बैंकिंग✓ स्रोत से जाँचा · 8 Oct 2026

Hague Apostille Convention

1961 का अंतरराष्ट्रीय समझौता, जिसने विदेशी दस्तावेज़ों के legalisation की जगह Apostille रखा

एक लाइन में

Hague Apostille Convention 5 अक्टूबर 1961 का अंतरराष्ट्रीय समझौता है। इसका पूरा नाम Convention Abolishing the Requirement of Legalisation for Foreign Public Documents है। इसके सदस्य देश एक-दूसरे के public documents पर दूतावास का legalisation नहीं माँगते; उसकी जगह सिर्फ़ एक certificate लगता है, जिसे Apostille कहते हैं। भारत में यह Convention 14 जुलाई 2005 से लागू है।

कब बना19615 अक्टूबर 1961 को The Hague में; 24 जनवरी 1965 से लागू
सदस्य130Contracting Parties; HCCH की सूची, 30 जून 2026 तक
भारत में लागू14 जुलाई 2005भारत का accession 26 अक्टूबर 2004 को जमा हुआ
भारत में ApostilleMEAविदेश मंत्रालय भारत की Competent Authority है

मतलब

Hague Apostille Convention 5 अक्टूबर 1961 को The Hague में हुआ अंतरराष्ट्रीय समझौता है। इसका पूरा नाम Convention Abolishing the Requirement of Legalisation for Foreign Public Documents है, और यह 24 जनवरी 1965 से लागू है।[1][2]

इसका मक़सद विदेशी public documents के लिए diplomatic या consular legalisation की ज़रूरत ख़त्म करना है। HCCH के शब्दों में, यह लंबे और महँगे legalisation की जगह एक ही Apostille certificate रखता है, जो वहीं की Competent Authority जारी करती है, जहाँ दस्तावेज़ बना है।[1][5]

कैसे काम करता है

Apostille उसी देश की Competent Authority जारी करती है, जहाँ से दस्तावेज़ आया है। जिस देश में दस्तावेज़ देना है, वह सदस्य हो, तो उसका दूतावास वाला legalisation नहीं लगता।

  • Legalisation क्या था: वह औपचारिकता, जिसमें जिस देश में दस्तावेज़ पेश होना है, उसके diplomatic या consular agents दस्तख़त की सच्चाई, दस्तख़त करने वाले की हैसियत, और seal या stamp की पहचान प्रमाणित करते हैं।[1]
  • छूट: हर सदस्य देश उन दस्तावेज़ों को legalisation से छूट देता है, जिन पर Convention लागू होता है और जो उसके यहाँ पेश होने हैं।[1]
  • सिर्फ़ एक certificate: अब सिर्फ़ एक औपचारिकता माँगी जा सकती है: वह certificate, जो उस देश की competent authority जारी करती है, जहाँ से दस्तावेज़ आया है।[1]
  • कहाँ लगता है: दस्तावेज़ पर ही, या उससे जुड़े पन्ने (allonge) पर। उसका शीर्षक French में होता है: "Apostille (Convention de La Haye du 5 octobre 1961)"।[1]
  • कौन माँग सकता है: जिसने दस्तावेज़ पर दस्तख़त किए हैं, या दस्तावेज़ का कोई भी bearer।[1]
  • दूतावास की भूमिका: हर सदस्य देश को यह देखना होता है कि जहाँ Convention छूट देता है, वहाँ उसके diplomatic या consular agents legalisation न करें।[1]

Apostille क्या प्रमाणित करता है

  • तीन बातें: दस्तख़त की सच्चाई; दस्तख़त करने वाले की हैसियत; और जहाँ लागू हो, दस्तावेज़ पर लगी seal या stamp की पहचान।[1]
  • Content नहीं: HCCH के मुताबिक Apostille का इकलौता असर यही तीन बातें हैं; वह दस्तावेज़ के content को प्रमाणित नहीं करता।[6]
  • Apostille पर और मुहर नहीं: Apostille पर लगे दस्तख़त, seal और stamp को किसी और प्रमाणन की ज़रूरत नहीं होती।[1]

किन दस्तावेज़ों पर लागू

  • अदालत के दस्तावेज़: अदालत या tribunal से जुड़ी authority या अधिकारी के दस्तावेज़, जैसे public prosecutor, clerk of a court या process-server के।[1]
  • सरकारी और notarial: administrative documents और notarial acts।[1]
  • निजी दस्तावेज़ पर लगा official certificate: जैसे registration दर्ज करने वाला certificate, या दस्तख़त का official या notarial authentication।[1]
  • कौन तय करता है: कोई दस्तावेज़ public है या नहीं, यह उस जगह का क़ानून तय करता है, जहाँ दस्तावेज़ बना है।[6]
  • लागू नहीं: diplomatic या consular agents के बनाए दस्तावेज़; और वे administrative documents, जो सीधे commercial या customs के काम से जुड़े हों।[1]
  • भारत में: MEA के मुताबिक Apostille निजी दस्तावेज़ों (जन्म, मृत्यु या विवाह के certificate, Affidavit, Power of Attorney) और पढ़ाई के दस्तावेज़ों (degree, diploma, matriculation और secondary स्तर के certificate) पर किया जाता है।[7]

भारत और यह Convention

  • कब से: भारत का accession 26 अक्टूबर 2004 को जमा हुआ, और Convention भारत के लिए 14 जुलाई 2005 से लागू है।[2]
  • कौन जारी करता है: भारत की Competent Authority Ministry of External Affairs (विदेश मंत्रालय, MEA) है; HCCH के पन्ने पर क़ीमत ₹50 दर्ज है।[4]
  • भारत आने वाले दस्तावेज़: MEA के मुताबिक किसी सदस्य देश के apostilled दस्तावेज़ को भारत में इस्तेमाल करने के लिए और attestation या legalization नहीं माँगा जाना चाहिए; उसे सभी कामों के लिए legalized दस्तावेज़ माना जाना चाहिए।[7]
  • पाँच देशों की आपत्ति: Belgium, Finland, Germany, Netherlands और Spain ने भारत के accession पर तय छह महीने के अंदर आपत्ति की थी।[3]
  • चार ने वापस ली: Belgium (9 जनवरी 2008), Spain (12 फ़रवरी 2008), Netherlands (16 सितंबर 2008) और Finland (5 अक्टूबर 2009)।[3]
  • Germany: Germany की आपत्ति (21 अप्रैल 2005) के वापस होने की कोई तारीख़ HCCH के उस पन्ने पर दर्ज नहीं है।[3]
  • जो देश सदस्य नहीं: MEA के मुताबिक उनके लिए normal attestation किया जाता है।[7]

सदस्य और नए तरीक़े

  • कितने: HCCH की status table के मुताबिक इस Convention के 130 Contracting Parties हैं।[2]
  • नया देश कैसे जुड़ता है: accession से। वह सिर्फ़ उन सदस्य देशों के साथ लागू होता है, जिन्होंने छह महीने के अंदर आपत्ति नहीं की।[1]
  • Register: हर Competent Authority जारी किए गए certificates का register या card index रखती है, और किसी भी interested person के कहने पर ब्योरे मिलाकर जाँचती है।[1]
  • e-Apostille: digital रूप में जारी हुआ official Apostille। उसे सिर्फ़ electronic होने की वजह से ठुकराया नहीं जा सकता; वह काग़ज़ वाले Apostille जितना ही मान्य है।[5]

आम ग़लतफ़हमी

✕ ग़लतफ़हमी"Apostille हर देश में चलता है।"
✓ सचनहीं। Convention सिर्फ़ उन दस्तावेज़ों पर लागू होता है, जो एक Contracting State में बने हों और दूसरे Contracting State में पेश होने हों। MEA के मुताबिक जो देश सदस्य नहीं हैं, उनके लिए normal attestation होता है।[1][7]
✕ ग़लतफ़हमी"दो देश सदस्य हैं, तो उनके बीच Apostille ज़रूर चलेगा।"
✓ सचज़रूरी नहीं। Article 12 के मुताबिक बाद में जुड़ने वाले देश का accession सिर्फ़ उन सदस्य देशों के साथ लागू होता है, जिन्होंने छह महीने के अंदर आपत्ति नहीं की। भारत के accession पर पाँच देशों ने आपत्ति की थी।[1][3]
✕ ग़लतफ़हमी"Apostille दस्तावेज़ में लिखी बातों को सही साबित करता है।"
✓ सचनहीं। HCCH के मुताबिक Apostille का इकलौता असर यह है कि वह दस्तख़त की सच्चाई, दस्तख़त करने वाले की हैसियत, और seal या stamp की पहचान प्रमाणित करता है। वह दस्तावेज़ के content को प्रमाणित नहीं करता।[6]
✕ ग़लतफ़हमी"Apostille के बाद भी दूतावास की मुहर लगवानी पड़ती है।"
✓ सचनहीं। Article 2 के मुताबिक हर सदस्य देश ऐसे दस्तावेज़ों को legalisation से छूट देता है। MEA के मुताबिक किसी सदस्य देश के apostilled दस्तावेज़ को भारत में इस्तेमाल करने के लिए और attestation या legalization नहीं माँगा जाना चाहिए।[1][7]
✕ ग़लतफ़हमी"HCCH Apostille जारी करता है या जाँचता है।"
✓ सचनहीं। HCCH के मुताबिक उसके Permanent Bureau को Apostille जारी करने या जाँचने का अधिकार नहीं है। यह काम सिर्फ़ सदस्य देशों की Competent Authorities करती हैं।[5]
✕ ग़लतफ़हमी"e-Apostille काग़ज़ वाले Apostille से कमज़ोर है।"
✓ सचनहीं। HCCH के मुताबिक e-Apostille को सिर्फ़ इस वजह से नहीं ठुकराया जा सकता कि वह electronic रूप में जारी हुआ है; वह काग़ज़ वाले Apostille जितना ही मान्य है।[5]

आपका अधिकार

किसी सदस्य देश के apostilled दस्तावेज़ को भारत में इस्तेमाल करने के लिए और attestation या legalization नहीं माँगा जाना चाहिए।[7]
  • कोई भी bearer: Apostille वह व्यक्ति माँग सकता है, जिसने दस्तावेज़ पर दस्तख़त किए हैं, या दस्तावेज़ का कोई भी bearer।[1]
  • जाँच का हक़: कोई भी interested person जारी करने वाली authority से जँचवा सकता है कि Apostille के ब्योरे उसके register से मिलते हैं या नहीं।[1]

अभी क्या करें

  • जिस देश में दस्तावेज़ देना है, उसे HCCH की status table में देखिए: वह Contracting Party है या नहीं।[2]
  • वह देश सदस्य न हो, तो Apostille नहीं, normal attestation लगता है।[7]
  • Germany में दस्तावेज़ देना हो, तो पहले उसके दूतावास से पूछ लीजिए; HCCH के पन्ने पर भारत के accession पर उसकी आपत्ति के वापस होने की तारीख़ दर्ज नहीं है।[3]
  • Apostille पर शक हो, तो उसे जारी करने वाले देश की Competent Authority से जँचवाइए; HCCH ख़ुद Apostille नहीं जाँचता।[1][5]

सवाल-जवाब

Hague Apostille Convention का मतलब क्या है?यह 5 अक्टूबर 1961 को The Hague में हुआ अंतरराष्ट्रीय समझौता है। इसका पूरा नाम Convention Abolishing the Requirement of Legalisation for Foreign Public Documents है। इसका मक़सद विदेशी public documents के लिए diplomatic या consular legalisation की ज़रूरत ख़त्म करना है।
Legalisation क्या होता है?Convention के Article 2 के मुताबिक legalisation वह औपचारिकता है, जिसमें जिस देश में दस्तावेज़ पेश होना है, उसके diplomatic या consular agents यह प्रमाणित करते हैं: दस्तख़त की सच्चाई, दस्तख़त करने वाले की हैसियत, और जहाँ लागू हो, दस्तावेज़ पर लगी seal या stamp की पहचान।
Convention ने legalisation की जगह क्या रखा?Article 3 के मुताबिक अब सिर्फ़ एक औपचारिकता माँगी जा सकती है: एक certificate, जो उस देश की competent authority जारी करती है, जहाँ से दस्तावेज़ आया है। इसी certificate को Apostille कहते हैं।
यह Convention किन दस्तावेज़ों पर लागू होता है?Article 1 के मुताबिक public documents पर। इनमें गिने गए हैं: अदालत या tribunal से जुड़ी authority या अधिकारी के दस्तावेज़; administrative documents; notarial acts; और वे official certificates, जो निजी हैसियत में दस्तख़त किए गए दस्तावेज़ों पर लगाए जाते हैं, जैसे registration दर्ज करने वाला certificate या दस्तख़त का notarial authentication।
किन दस्तावेज़ों पर यह लागू नहीं होता?Article 1 के मुताबिक दो तरह के दस्तावेज़ों पर: जो diplomatic या consular agents ने बनाए हों; और वे administrative documents, जो सीधे commercial या customs के काम से जुड़े हों।
Apostille क्या प्रमाणित करता है?Article 5 के मुताबिक तीन बातें: दस्तख़त की सच्चाई, दस्तख़त करने वाले की हैसियत, और जहाँ लागू हो, seal या stamp की पहचान। HCCH के Outline के मुताबिक Apostille दस्तावेज़ के content को प्रमाणित नहीं करता।
Apostille कौन जारी करता है?Article 6 के मुताबिक हर सदस्य देश अपनी competent authorities तय करता है। HCCH के पन्ने के मुताबिक भारत की Competent Authority Ministry of External Affairs (विदेश मंत्रालय) है, और वहाँ दर्ज क़ीमत ₹50 है।
Apostille कौन माँग सकता है?Article 5 के मुताबिक वह व्यक्ति, जिसने दस्तावेज़ पर दस्तख़त किए हैं, या दस्तावेज़ का कोई भी bearer।
भारत इस Convention का सदस्य कब से है?HCCH की status table के मुताबिक भारत का accession 26 अक्टूबर 2004 को जमा हुआ और Convention भारत के लिए 14 जुलाई 2005 से लागू है। MEA भी लिखता है कि भारत 2005 से सदस्य है।
किन देशों ने भारत के accession पर आपत्ति की थी?HCCH के पन्ने के मुताबिक Belgium, Finland, Germany, Netherlands और Spain ने तय छह महीने के अंदर आपत्ति की थी। बाद में चार देशों ने आपत्ति वापस ली: Belgium (9 जनवरी 2008), Spain (12 फ़रवरी 2008), Netherlands (16 सितंबर 2008) और Finland (5 अक्टूबर 2009)। Germany की आपत्ति (21 अप्रैल 2005) के वापस होने की कोई तारीख़ उस पन्ने पर दर्ज नहीं है।
आपत्ति का क्या असर होता है?Article 12 के मुताबिक accession सिर्फ़ उन सदस्य देशों के साथ लागू होता है, जिन्होंने आपत्ति नहीं की। HCCH के पन्ने पर लिखा है कि आपत्ति करने वाले देशों और भारत के बीच Convention लागू नहीं होगा; जिन देशों ने आपत्ति वापस ली, उनके साथ वह वापसी की तारीख़ से लागू हुआ।
कितने देश सदस्य हैं?HCCH की status table (30 जून 2026 तक update) के मुताबिक इस Convention के 130 Contracting Parties हैं। पूरी सूची उसी table में है।
जो देश सदस्य नहीं है, उसके लिए क्या होता है?MEA के मुताबिक उन सभी देशों के लिए, जो Hague Convention के सदस्य नहीं हैं और जहाँ Apostille नहीं माना जाता, normal attestation किया जाता है।
Apostille असली है या नहीं, यह कैसे जाँचा जाता है?Article 7 के मुताबिक हर Competent Authority जारी किए गए certificates का register या card index रखती है। किसी भी interested person के कहने पर वह जाँचती है कि certificate के ब्योरे register से मिलते हैं या नहीं।
e-Apostille क्या है?HCCH के मुताबिक e-Apostille digital रूप में जारी हुआ official Apostille है, जो electronically बनता और sign होता है। उसे सिर्फ़ electronic होने की वजह से ठुकराया नहीं जा सकता, और सभी Contracting Parties को उसे मानना होता है।

जुड़े शब्द

स्रोत

  1. HCCH — Convention of 5 October 1961 Abolishing the Requirement of Legalisation for Foreign Public Documents (पूरा पाठ) ↗किस बात के लिए, दस्तावेज़ का कौन-सा हिस्सा
    • Article 1किन public documents पर लागू; किन पर नहीं
    • Article 2legalisation से छूट; legalisation का मतलब
    • Article 3 और 4सिर्फ़ एक certificate; कहाँ लगता है; शीर्षक French में
    • Article 5कौन माँग सकता है; Apostille क्या प्रमाणित करता है
    • Article 6 और 7competent authorities; register और जाँच
    • Article 9दूतावास legalisation न करें, यह देश की ज़िम्मेदारी
    • Article 12accession; छह महीने में आपत्ति; किन देशों के साथ लागू
  2. HCCH — Status table, Convention #12 (site पर "Last update: 30-VI-2026") ↗किस बात के लिए, दस्तावेज़ का कौन-सा हिस्सा
    • ऊपर का हिस्सा24 जनवरी 1965 से लागू; 130 Contracting Parties
    • Indiaaccession 26 अक्टूबर 2004; लागू 14 जुलाई 2005
  3. HCCH — India के accession पर आपत्तियाँ (Declaration / reservation / notification) ↗किस बात के लिए, दस्तावेज़ का कौन-सा हिस्सा
    • Objectionपाँच देशों की आपत्ति; चार की वापसी की तारीख़ें; Germany की वापसी दर्ज नहीं
  4. HCCH — India: Competent Authority (Art. 6) (site पर "last updated on: 05 September 2024") ↗किस बात के लिए, दस्तावेज़ का कौन-सा हिस्सा
    • AuthorityMinistry of External Affairs of the Government of India; Price: Indian Rs. 50.00
  5. HCCH — Apostille Section ↗किस बात के लिए, दस्तावेज़ का कौन-सा हिस्सा
    • परिचयConvention का मक़सद: legalisation की जगह एक Apostille certificate
    • e-Apostilleselectronic होने की वजह से ठुकराया नहीं जा सकता; काग़ज़ जितना मान्य
    • NoticePermanent Bureau Apostille न जारी करता है, न जाँचता है
  6. HCCH — Outline: HCCH 1961 Apostille Convention (PDF) ↗किस बात के लिए, दस्तावेज़ का कौन-सा हिस्सा
    • Scopepublic document कौन-सा है, यह उस जगह का क़ानून तय करता है जहाँ दस्तावेज़ बना
    • EffectApostille content को प्रमाणित नहीं करता
  7. विदेश मंत्रालय (MEA) — Attestation / Apostille, Consular Services (site पर "Last Updated On: 29 Sep 2026") ↗किस बात के लिए, दस्तावेज़ का कौन-सा हिस्सा
    • Apostilleभारत 2005 से सदस्य; किन दस्तावेज़ों पर; apostilled दस्तावेज़ पर भारत में और attestation नहीं
    • Normal Attestationजो देश Convention के सदस्य नहीं

सुधार का इतिहास

  • पन्ना बना। HCCH की site पर Convention के पाठ, status table (30 जून 2026 तक update), भारत से जुड़े notifications और Competent Authority के पन्ने, और विदेश मंत्रालय (MEA) के Attestation / Apostille पन्ने से जाँचा।

पन्ना बना: 08 अक्तू 2026 · आख़िरी जाँच: 08 अक्तू 2026
यह सामान्य जानकारी है, कानूनी या वित्तीय सलाह नहीं।