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शब्द · क़र्ज़✓ स्रोत से जाँचा · 16 Oct 2026

Penal Charges

पीनल चार्ज · loan की शर्त टूटने पर लगने वाला तय charge, ब्याज में जोड़ा गया 'penal interest' नहीं

एक लाइन में

Loan की ज़रूरी शर्त टूटने पर, जैसे किस्त समय पर न भरने पर, bank जो penalty लेता है, RBI के मुताबिक वह 'penal charges' के रूप में ही ली जा सकती है; ब्याज दर में जोड़े गए 'penal interest' के रूप में नहीं। इन charges पर आगे ब्याज नहीं लग सकता, और इनकी रक़म और वजह loan agreement और KFS में पहले से लिखी होनी चाहिए।

Penal interestनहींसिर्फ़ penal charges
Charge पर ब्याजनहींcapitalisation मना
किस रक़म परसिर्फ़ बकाया हिस्से परdefault वाली रक़म
पहले से बतानाAgreement और KFS मेंwebsite पर भी

मतलब

RBI के मुताबिक loan की ज़रूरी शर्तें (material terms and conditions) टूटने पर, जैसे किस्त default होने पर, ली गई penalty 'penal charges' कहलाती है। यह ब्याज दर में जोड़ी नहीं जा सकती, और इस पर आगे ब्याज नहीं लगता।[1]

इसका मतलब आपके लिए क्या है

  • ब्याज दर नहीं बढ़ेगी: देरी पर penalty अलग charge है, दर में जोड़ नहीं।[1]
  • Charge पर ब्याज नहीं: और पुराने penal charge पर नया penal charge नहीं।[1]
  • पहले से लिखा: रक़म और वजह agreement और KFS में।[1]

Penal charges कैसे लगते हैं

RBI के मुताबिक जब भी शर्त टूटने का reminder भेजा जाए, उसमें लागू penal charges बताए जाएँ; और जब भी penal charge लगे, उसकी वजह भी बताई जाए।

आम ग़लतफ़हमी

✕ ग़लतफ़हमी"किस्त देर से भरी, तो bank ब्याज दर 2% बढ़ा देगा।"
✓ सचऐसा नहीं हो सकता। RBI के मुताबिक penalty सिर्फ़ 'penal charges' के रूप में ली जा सकती है, ब्याज दर में जोड़ा गया 'penal interest' नहीं; और bank ब्याज दर में कोई अतिरिक्त हिस्सा नहीं जोड़ सकता।[1] बकाया ब्याज या EMI पर ब्याज सिर्फ़ तय (contracted) दर से लग सकता है।[1]
✕ ग़लतफ़हमी"Penal charge पर भी ब्याज चढ़ता रहेगा।"
✓ सचनहीं। RBI के मुताबिक penal charges का capitalisation नहीं होगा, यानी उन पर आगे ब्याज नहीं गिना जाएगा; और पुराने बकाया penal charges पर नए penal charges भी नहीं लगेंगे।[1]
✕ ग़लतफ़हमी"Bank जितना चाहे penal charge ले सकता है।"
✓ सचRBI ने कोई ऊपरी सीमा तय नहीं की है, पर charges उचित, शर्त टूटने के अनुपात में और एक loan श्रेणी में भेदभाव के बिना होने चाहिए; RBI के मुताबिक इनका मक़सद कमाई बढ़ाना नहीं है। व्यक्तियों के ग़ैर-कारोबारी loans पर penal charges, बाक़ी borrowers से ज़्यादा नहीं हो सकते।[1]

आपका अधिकार

Penal charges की रक़म और वजह loan agreement और KFS में पहले से लिखी होनी चाहिए। Reminder में लागू penal charges बताए जाएँ, और charge लगे तो उसकी वजह भी। ये charges सिर्फ़ default वाली रक़म पर, उचित और बिना भेदभाव के हों, और इन पर ब्याज न लगे।[1]

अभी क्या करें

  • अपने loan agreement और KFS में penal charges की रक़म और वजह देखिए।[1]
  • Loan statement में ब्याज दर अचानक बढ़ी दिखे, तो bank से पूछिए कि कहीं penalty दर में तो नहीं जोड़ी गई।[1]
  • हर penal charge की वजह bank से लिखित में लीजिए।[1]

सवाल-जवाब

Penal charges कहाँ लिखे मिलेंगे?RBI के मुताबिक इनकी रक़म और वजह loan agreement और KFS में पहले से साफ़ लिखी होनी चाहिए, और bank की website पर 'Interest rates and Service Charges' में भी। Sanction letter में सिर्फ़ website का हवाला देना काफ़ी नहीं।[1]
Penal charge किस रक़म पर लगता है?RBI के मुताबिक भुगतान में default पर penal charge सिर्फ़ उस रक़म पर लग सकता है, जो default में है, और bank की नीति के हिसाब से, बिना भेदभाव के।[1]
ये नियम कब से और किन loans पर?RBI के मुताबिक 1 अप्रैल 2024 से लिए गए नए loans पर, और पुराने loans पर 30 जून 2024 से। ये cash credit और overdraft समेत सभी credit facilities पर लागू हैं; credit card, ECB, trade credit और कुछ ख़ास श्रेणियों पर नहीं।[1]

जुड़े शब्द

स्रोत

  1. RBI — Reserve Bank of India (Commercial Banks – Responsible Business Conduct) Directions, 2025 (RBI/DOR/2025-26/170; DOR.MCS.REC.No.89/01-01-032/2025-26; Updated as on October 1, 2026; 16 अक्टूबर 2026 को पढ़ा) ↗जारी: 28 नव 2025किस बात के लिए, दस्तावेज़ का कौन-सा हिस्सा
    • पैरा 351 (शुरुआत)नए loans पर 1.4.2024 से, पुराने पर 30.6.2024 से; CC / OD समेत सभी credit facilities; credit card, ECB, trade credit आदि पर नहीं
    • पैरा 351(1) और Notes (ii), (iii)penal charges, penal interest नहीं; capitalisation नहीं; बकाया ब्याज पर सिर्फ़ contracted दर; default वाली रक़म पर ही, बिना भेदभाव; penal पर penal नहीं
    • पैरा 351(2), (3), (4) और Notesब्याज दर में अतिरिक्त हिस्सा नहीं; board-approved नीति; उचित और अनुपात में; ऊपरी सीमा तय नहीं, पर कमाई का ज़रिया नहीं
    • पैरा 351(5), (6), (7)व्यक्तियों के ग़ैर-कारोबारी loans पर बाक़ियों से ज़्यादा नहीं; agreement, KFS और website पर; reminder में और लगाने पर वजह बताना

सुधार का इतिहास

  • पन्ना बना। RBI के Responsible Business Conduct Directions (170MD, 1 अक्टूबर 2026 तक updated), पैरा 351 से जाँचा।

पन्ना बना: 16 अक्तू 2026 · आख़िरी जाँच: 16 अक्तू 2026
यह सामान्य जानकारी है, कानूनी या वित्तीय सलाह नहीं।

यह पन्ना: https://seedhamatlab.com/shabdkosh/penal-charges/ · आख़िरी जाँच: 16 अक्तू 2026
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