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शब्द · क़र्ज़✓ स्रोत से जाँचा · 11 Oct 2026

Loan Statement

लोन स्टेटमेंट · आपके loan खाते का हिसाब: कितना चुका, कितना बाक़ी

एक लाइन में

Loan statement आपके loan खाते का हिसाब है: अब तक कितना मूलधन और ब्याज चुका, EMI कितनी है और कितनी EMI बाक़ी हैं। RBI के निर्देशों के मुताबिक EMI वाले personal loan में bank को हर तिमाही के अंत में ऐसा statement देना या उपलब्ध कराना है।

कब मिलता हैहर तिमाहीEMI वाले personal loan में, तिमाही के अंत में
कम से कम क्या दिखे4 बातेंचुका मूलधन और ब्याज, EMI, बची EMI, APR
Digital loan मेंअपने-आपdigitally signed statement आपके registered email / SMS पर
KFS में न लिखा chargeनहींआपकी साफ़ सहमति के बिना नहीं लिया जा सकता

मतलब

Loan statement आपके loan खाते का हिसाब है: अब तक कितना मूलधन और ब्याज चुका, EMI कितनी है और कितनी EMI बाक़ी हैं। RBI के निर्देशों में loan के हिसाब से जुड़ी दो बातें हैं: loan से पहले Key Facts Statement (KFS) में पूरी अवधि का repayment schedule, और loan चलते समय हर तिमाही के अंत में statement।[1]

  • कहाँ लागू: KFS और हर तिमाही वाले statement के नियम यहाँ commercial banks के निर्देशों से लिए गए हैं।[1] Digital loan वाले नियम banks और NBFCs, दोनों के निर्देशों में हैं।[2][3]

इसका मतलब आपके लिए क्या है

  • हर तिमाही हिसाब: EMI वाले personal loan में bank को हर तिमाही के अंत में statement देना या उपलब्ध कराना है।[1]
  • कम से कम चार बातें: अब तक वसूला मूलधन और ब्याज, EMI की रक़म, बची EMI की संख्या, और पूरी अवधि की सालाना ब्याज दर या APR।[1]
  • आसान भाषा: statement सीधा-सादा और आसानी से समझ आने वाला होना चाहिए।[1]

Loan का हिसाब कैसे मिलता है

RBI के निर्देशों के मुताबिक statement सीधा-सादा और आसानी से समझ आने वाला होना चाहिए।

  • Loan से पहले, KFS: 1 अक्टूबर 2024 या बाद में मंज़ूर नए retail और MSME term loan में KFS के साथ APR का हिसाब और पूरी अवधि का repayment (amortisation) schedule मिलता है। Credit card की बकाया रक़म पर यह लागू नहीं।[1]
  • Loan चलते समय: हर तिमाही के अंत में statement, जो bank उचित माध्यम से भेजे या उपलब्ध कराए।[1]
  • Digital loan: KFS, sanction letter, शर्तें और account statements lender के letterhead पर digitally signed होकर, loan contract या लेनदेन होते ही आपके registered और verified email / SMS पर अपने-आप पहुँचने चाहिए।[2][3]

Statement में क्या जाँचें

  • EMI और बची किस्तें: floating ब्याज दर बदलने से EMI, अवधि या दोनों बदल सकते हैं; बढ़ोतरी की सूचना bank को तुरंत देनी है।[1]
  • Penal charges: जब भी penal charge लगे, उसकी सूचना और वजह bank को बतानी है।[1]
  • दूसरों के charges: insurance या legal charges जैसे जो charges bank किसी तीसरी सेवा देने वाले के लिए वसूलता है, उनकी हर भुगतान की रसीद और काग़ज़ उचित समय में देने हैं।[1]
  • KFS से बाहर का charge: KFS में न लिखी fee या charge आपकी साफ़ सहमति के बिना loan के दौरान कभी नहीं लिया जा सकता।[1]

आम ग़लतफ़हमी

✕ ग़लतफ़हमी"Loan का हिसाब सिर्फ़ loan बंद होने पर मिलता है।"
✓ सचनहीं। EMI वाले personal loan में bank को हर तिमाही के अंत में statement देना या उपलब्ध कराना है।[1]
✕ ग़लतफ़हमी"Statement में सिर्फ़ बकाया रक़म लिखी होती है।"
✓ सचकम से कम चार बातें होनी चाहिए: अब तक वसूला मूलधन और ब्याज, EMI की रक़म, बची EMI की संख्या, और पूरी अवधि की सालाना ब्याज दर या APR।[1]
✕ ग़लतफ़हमी"Penal charge लगाने की वजह bank नहीं बताता।"
✓ सचबताना होता है। RBI के निर्देशों के मुताबिक जब भी penal charge लगे, उसकी सूचना और वजह bank को borrower को बतानी है।[1]
✕ ग़लतफ़हमी"KFS में जो charge नहीं लिखा, वह बाद में भी जोड़ा जा सकता है।"
✓ सचआपकी साफ़ सहमति के बिना नहीं। KFS में न लिखी fee या charge loan के दौरान किसी भी समय नहीं लिया जा सकता।[1]

आपका अधिकार

EMI वाले personal loan में हर तिमाही के अंत में आसान भाषा का statement पाना आपका हक़ है, जिसमें अब तक चुका मूलधन और ब्याज, EMI, बची EMI और APR हों।[1]

अभी क्या करें

  • Loan लेते समय मिला KFS और उसका repayment schedule सँभालकर रखिए।[1]
  • हर तिमाही का statement KFS के schedule से मिलाइए: कितनी EMI बचीं, कितना मूलधन चुका।[1]
  • Statement में कोई ऐसा charge दिखे, जो KFS में नहीं था, तो bank से उसकी वजह पूछिए।[1]
  • Digital loan की शिकायत का 30 दिन में जवाब न मिले, या जवाब से आप संतुष्ट न हों, तो RBI के CMS portal पर शिकायत कीजिए।[2][3]

सवाल-जवाब

हर तिमाही वाला statement किन loan पर है?RBI ने यह नियम 'EMI वाले personal loans पर floating ब्याज दर के reset' वाले हिस्से में रखा है, जो 1 जनवरी 2024 से नए और पुराने personal loans पर लागू है। ये नियम हर अंतराल की बराबर किस्त वाले personal loans पर भी लागू हैं, चाहे loan बाहरी benchmark से जुड़ा हो या अंदरूनी benchmark से। 'Personal loan' का मतलब RBI ने अपने 2018 के एक अलग दस्तावेज़ (XBRL returns) से लिया है।
पूरे loan का repayment schedule कहाँ मिलेगा?1 अक्टूबर 2024 या बाद में मंज़ूर नए retail और MSME term loan में bank Key Facts Statement (KFS) देता है। इसमें APR का हिसाब और पूरी अवधि का repayment (amortisation) schedule होता है। Credit card की बकाया रक़म पर यह नियम लागू नहीं।
Bank ने insurance या legal charge वसूला, तो उसका सबूत?Bank जो charges किसी तीसरी सेवा देने वाले के लिए असल ख़र्च के हिसाब से वसूलता है, जैसे insurance या legal charges, उनकी हर भुगतान की रसीद और काग़ज़ उसे उचित समय में देने हैं। ये charges APR में भी जुड़ते हैं।
Digital loan का statement कैसे आता है?RBI के निर्देशों के मुताबिक KFS, sanction letter, शर्तें और account statements जैसे काग़ज़ lender के letterhead पर digitally signed होकर, loan contract या लेनदेन होते ही आपके registered और verified email / SMS पर अपने-आप पहुँचने चाहिए। यह नियम banks और NBFCs, दोनों पर है।
Digital loan की शिकायत का जवाब न मिले, तो?Lender शिकायत पूरी या आंशिक रूप से ठुकरा दे, जवाब से आप संतुष्ट न हों, या 30 दिन में जवाब न मिले, तो RBI के CMS portal (cms.rbi.org.in) पर Reserve Bank - Integrated Ombudsman Scheme के तहत, जहाँ यह लागू हो, शिकायत की जा सकती है।

जुड़े शब्द

स्रोत

  1. RBI — Reserve Bank of India (Commercial Banks – Responsible Business Conduct) Directions, 2025 (RBI/DOR/2025-26/170; DOR.MCS.REC.No.89/01-01-032/2025-26; Updated as on October 1, 2026; small finance, payments और local area banks पर लागू नहीं), PDF ↗जारी: 28 नव 2025 · लागू: 28 नव 2025किस बात के लिए, दस्तावेज़ का कौन-सा हिस्सा
    • पैरा 348, 348(3)1 अक्टूबर 2024 से नए retail और MSME term loan में KFS; APR का हिसाब और repayment schedule; credit card पर नहीं
    • पैरा 348(4)तीसरे पक्ष के charges APR में; हर भुगतान की रसीद और काग़ज़
    • पैरा 348(5)KFS में न लिखा charge साफ़ सहमति के बिना नहीं
    • पैरा 349, 349(6)1 जनवरी 2024 से; हर तिमाही के अंत में statement; चार बातें; आसान भाषा
    • पैरा 349(1)EMI / अवधि बढ़ने की सूचना तुरंत
    • पैरा 350; 4(24)बराबर किस्त वाले सभी personal loans; personal loan की परिभाषा XBRL returns (2018) से
    • पैरा 351(7)penal charge लगे, तो सूचना और वजह
  2. RBI — Reserve Bank of India (Commercial Banks – Credit Facilities) Directions, 2025 (RBI/DOR/2025-26/154; DOR.CRE.REC.73/07-01-001/2025-26; Updated as on October 1, 2026), PDF ↗जारी: 28 नव 2025 · लागू: 28 नव 2025किस बात के लिए, दस्तावेज़ का कौन-सा हिस्सा
    • पैरा 9(3)digital loan: digitally signed KFS, sanction letter, account statements अपने-आप email / SMS पर
    • पैरा 12(4)30 दिन में जवाब नहीं या असंतोष: CMS portal
  3. RBI — Reserve Bank of India (Non-Banking Financial Companies – Credit Facilities) Directions, 2025 (RBI/DOR/2025-26/347; DOR.CRE.REC.No.266/07-01-008/2025-26; updated as on July 15, 2026) ↗जारी: 28 नव 2025 · लागू: 28 नव 2025किस बात के लिए, दस्तावेज़ का कौन-सा हिस्सा
    • पैरा 9(3)NBFC के digital loan में भी यही नियम
    • पैरा 12(4)NBFC के digital loan की शिकायत: 30 दिन, फिर CMS

सुधार का इतिहास

  • पन्ना बना। RBI के Responsible Business Conduct Directions, 2025 (commercial banks) और Credit Facilities Directions, 2025 (commercial banks और NBFCs) से जाँचा।

पन्ना बना: 11 अक्तू 2026 · आख़िरी जाँच: 11 अक्तू 2026
यह सामान्य जानकारी है, कानूनी या वित्तीय सलाह नहीं।

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