सूचना डेस्क · भारत

सीधा मतलब | Seedha Matlab

Contact
शब्द · भुगतान✓ स्रोत से जाँचा · 8 Oct 2026

Wallet

Prepaid Payment Instrument (PPI) · पहले पैसा भरकर चलने वाला भुगतान का साधन

एक लाइन में

Wallet एक Prepaid Payment Instrument (PPI) है: भुगतान का वह साधन, जिसमें पहले पैसा भरा जाता है, और फिर उसी जमा रक़म से सामान और सेवाओं की ख़रीद या पैसा भेजने जैसा भुगतान होता है। PPI bank और गैर-bank कंपनियाँ RBI की मंज़ूरी से जारी करती हैं, और इसकी रक़म पर ब्याज नहीं मिलता।

Small PPI में₹10,000 तकसिर्फ़ ख़रीद; पैसा भेजना या cash निकालना नहीं
Full-KYC PPI में₹2 लाख तककिसी भी समय इससे ज़्यादा रक़म नहीं रह सकती
रक़म पर ब्याजनहींPPI जारी करने वाला balance पर ब्याज नहीं दे सकता
ठगी 3 दिन में बताईनुक़सान शून्यगैर-bank PPI में, जब चूक न आपकी हो, न कंपनी की

मतलब

Wallet, Prepaid Payment Instrument (PPI) का एक रूप है। RBI के मुताबिक PPI वह साधन है, जिसमें जमा रक़म के बदले सामान और सेवाओं की ख़रीद, financial services और पैसा भेजने जैसी सुविधाएँ मिलती हैं।[1]

  • रूप: PPI card, wallet या ऐसे किसी भी रूप में जारी हो सकता है; काग़ज़ के voucher के रूप में नहीं।[1]
  • कौन जारी करता है: bank और गैर-bank संस्थाएँ, Payment and Settlement Systems Act, 2007 के तहत RBI की मंज़ूरी या authorisation लेकर। इसके बिना कोई संस्था PPI का payment system नहीं चला सकती।[1]
  • जो RBI के दायरे में नहीं: Closed System PPI, यानी वह साधन, जो सिर्फ़ जारी करने वाली संस्था का अपना सामान और सेवाएँ ख़रीदने में चलता है। RBI इसे न regulate करता है, न supervise।[1]

PPI के प्रकार

  • Small PPI: पूरे KYC के बिना, थोड़ी जानकारी पर मिलता है: OTP से जाँचा हुआ mobile number, और नाम और किसी OVD या ऐसे ही दस्तावेज़ के पहचान number का self-declaration।[1]
  • Small PPI की सीमा: किसी भी समय ₹10,000 से ज़्यादा नहीं रह सकते; महीने में ₹10,000 और वित्त वर्ष में ₹1,20,000 तक ही भरे जा सकते हैं।[1]
  • Small PPI से क्या नहीं होता: यह सिर्फ़ सामान और सेवाओं की ख़रीद के लिए है; इससे पैसा भेजना या cash निकालना मना है।[1]
  • 24 महीने: जिस Small PPI में cash से पैसा भरा जा सकता है, उसे जारी होने के 24 महीने के अंदर Full-KYC PPI में बदलना होता है; वरना उसमें और पैसा नहीं भर सकता, पर बची रक़म इस्तेमाल की जा सकती है।[1]
  • Full-KYC PPI: ग्राहक का KYC पूरा होने पर मिलता है; यह V-CIP से भी हो सकता है। इसमें किसी भी समय ₹2,00,000 तक रह सकते हैं, और इससे ख़रीद, पैसा भेजना और cash निकालना हो सकता है।[1]
  • Gift PPI: हर gift instrument ज़्यादा से ज़्यादा ₹10,000 का; दोबारा नहीं भरा जा सकता; cash निकालना या पैसा भेजना मना।[1]
  • PPI-MTS: metro, bus, rail, toll और parking जैसे भुगतान के लिए; KYC की जाँच के बिना मिल सकता है; इसमें ₹3,000 तक रह सकते हैं।[1]

Full-KYC PPI की सीमाएँ

  • Register किए beneficiary को: महीने में ₹2,00,000 तक, हर beneficiary पर। Issuer जोखिम देखकर इससे कम सीमा रख सकता है।[1]
  • बाक़ी सबको: महीने में ₹10,000 तक।[1]
  • Cash निकालना: गैर-bank के जारी PPI से एक बार में ₹2,000 तक और महीने में कुल ₹10,000 तक, सभी channel मिलाकर। Bank के जारी PPI से PoS machine पर भी यही सीमा है।[1]
  • Cash से भरना: किसी भी PPI में cash से महीने में ₹50,000 तक ही भरा जा सकता है, PPI की कुल सीमा के अंदर।[1]
  • अपनी सीमा: issuer को holder को अपनी funds transfer सीमा ख़ुद तय करने का विकल्प देना होता है।[1]

पैसा भरना और रखना

Wallet से पैसा कटने वाले लेनदेन Two Factor Authentication (2FA) से ही हो सकते हैं। Small PPI से सिर्फ़ ख़रीद हो सकती है; पैसा भेजना और cash निकालना Full-KYC PPI में ही है।

  • किससे भरता है: cash, bank खाते से debit, credit या debit card, दूसरे PPI और regulated संस्थाओं के दूसरे payment instruments से; सिर्फ़ रुपये में।[1]
  • ब्याज नहीं: PPI जारी करने वाला PPI के balance पर कोई ब्याज नहीं दे सकता।[1]
  • गैर-bank issuer की रक़म: उसे बकाया balance किसी scheduled commercial bank के escrow account में रखना होता है।[1]
  • कंपनी का नाम: PPI के brand नाम के साथ उस company का नाम साफ़ दिखना चाहिए, जिसे RBI से मंज़ूरी या authorisation मिला है।[1]
  • Refund: fail, return, reject या cancel हुए लेनदेन का पैसा तुरंत उसी PPI में लौटना चाहिए, जिससे भुगतान हुआ था।[1]

UPI और card से जुड़ाव

  • Wallet: wallet के रूप वाले PPI की आपसी interoperability UPI के ज़रिए होती है; card के रूप वाले PPI card network से जुड़े होते हैं।[1]
  • Full-KYC में ज़रूरी: Full-KYC PPI के holders को interoperability देना issuer के लिए ज़रूरी है।[1]
  • UPI भुगतान: issuer सिर्फ़ अपने Full-KYC PPI के holders को UPI भुगतान की सुविधा दे सकता है।[1]

वैधता और पैसा वापस

  • कम से कम एक साल: हर PPI की validity आख़िरी बार पैसा भरने की तारीख़ से कम से कम एक साल होनी चाहिए।[1]
  • पहले चेतावनी: validity ख़त्म होने से पहले के 45 दिनों में issuer को SMS, e-mail या किसी और तरीक़े से, आपकी चुनी भाषा में, चेताना होता है।[1]
  • ख़त्म होने के बाद: गैर-bank PPI में validity ख़त्म होने के बाद कभी भी refund माँगा जा सकता है; रक़म bank खाते में दी जाती है।[1]
  • Inactive: जिस PPI में लगातार एक साल कोई financial transaction न हो, उसे issuer notice भेजकर inactive कर देता है; वह जाँच और due diligence के बाद ही दोबारा चालू होता है।[1]
  • बंद करना: Small PPI कभी भी बंद किया जा सकता है; रक़म उसी स्रोत में लौट सकती है, जहाँ से PPI भरा गया था, या KYC पूरा करने पर bank खाते में जा सकती है।[1]
  • Scheme बंद हो: PPI की scheme बंद हो रही हो या RBI उसे बंद करने को कहे, तो holders बची रक़म वापस ले सकते हैं।[1]

सुरक्षा के नियम

  • दो जाँच: wallet से पैसा कटने वाले लेनदेन, cash निकालने समेत, Two Factor Authentication से ही हो सकते हैं। Gift PPI और PPI-MTS में यह ज़रूरी नहीं है; toll (NETC) और e-mandate के भुगतान के लिए RBI के अलग निर्देश हैं।[1]
  • हर लेनदेन का alert: alert में कटी या जमा हुई रक़म के साथ बचा balance भी बताना होता है।[1]
  • Beneficiary: नया beneficiary जुड़ने पर alert आना चाहिए, और एक दिन में जुड़ने वाले beneficiary की संख्या पर सीमा होती है।[1]
  • Cooling period: PPI खुलने, पैसा भरने या beneficiary जोड़ने के बाद पैसा भेजने और cash निकालने पर issuer को कुछ समय की रोक रखनी होती है।[1]
  • अपनी cap: issuer को ग्राहक को लेनदेन की संख्या और रक़म पर अपनी cap तय करने का विकल्प देना होता है।[1]

ठगी हो जाए

ये नियम गैर-bank के जारी PPI के हैं। Bank के जारी PPI पर RBI के bank वाले निर्देश लागू होते हैं।[1]

  • Issuer की चूक: ग्राहक की देनदारी शून्य, चाहे उसने बताया हो या नहीं।[1]
  • किसी तीसरे की चूक, तीन दिन के अंदर बताया: शून्य।[1]
  • चार से सात दिन में बताया: लेनदेन की रक़म या ₹10,000 प्रति लेनदेन, जो कम हो।[1]
  • सात दिन के बाद बताया: issuer की Board की मंज़ूर नीति के मुताबिक।[1]
  • ग्राहक की लापरवाही: जैसे payment credentials किसी को बता देना; तब issuer को बताने तक का पूरा नुक़सान ग्राहक का, और बताने के बाद का issuer का।[1]
  • दिन कैसे गिनते हैं: जिस दिन issuer की सूचना मिली, उस दिन को छोड़कर।[1]
  • 10 दिन में वापसी: सूचना मिलने के 10 दिन के अंदर issuer को वह रक़म PPI में वापस (shadow reversal) डालनी होती है।[1]
  • 90 दिन: शिकायत का हल और ग्राहक की देनदारी 90 दिन के अंदर तय होनी चाहिए; न हो पाए, तो तय रक़म ग्राहक को देनी होती है। देनदारी साबित करने का भार issuer पर है।[1]

शिकायत कहाँ करें

  • पहले issuer से: उसे complaint number और शिकायत track करने की सुविधा देनी होती है। कार्रवाई जल्दी, हो सके तो 48 घंटे में, शुरू होनी चाहिए, और शिकायत 30 दिन के अंदर हल करने की कोशिश होनी चाहिए।[1]
  • संपर्क कहाँ मिलेगा: customer care और nodal officer का संपर्क website, wallet app और card पर साफ़ लिखा होना चाहिए।[1]
  • फिर RBI Ombudsman: 30 दिन में जवाब न मिले या जवाब से संतुष्ट न हों, तो CMS portal पर शिकायत की जा सकती है। PPI जारी करने वाली गैर-bank कंपनियाँ scheme में आती हैं।[2]

आम ग़लतफ़हमी

✕ ग़लतफ़हमी"Wallet में रखे पैसे पर bank खाते की तरह ब्याज मिलता है।"
✓ सचनहीं। RBI के निर्देशों के मुताबिक PPI जारी करने वाला PPI के balance पर कोई ब्याज नहीं दे सकता।[1]
✕ ग़लतफ़हमी"Wallet में जितना चाहें, उतना पैसा रख सकते हैं।"
✓ सचनहीं। Small PPI में किसी भी समय ₹10,000 से ज़्यादा, और Full-KYC PPI में ₹2,00,000 से ज़्यादा रक़म नहीं रह सकती।[1]
✕ ग़लतफ़हमी"बिना KYC वाले wallet से भी किसी को पैसे भेज सकते हैं।"
✓ सचनहीं। Small PPI सिर्फ़ सामान और सेवाओं की ख़रीद के लिए है; उससे पैसा भेजना या cash निकालना मना है। RBI के निर्देशों में साफ़ लिखा है कि KYC के बिना कोई remittance नहीं होगा।[1]
✕ ग़लतफ़हमी"Wallet की validity ख़त्म हो गई, तो बचा पैसा गया।"
✓ सचनहीं। गैर-bank PPI में validity ख़त्म होने के बाद कभी भी refund माँगा जा सकता है; रक़म bank खाते में दी जाती है। Validity ख़त्म होने से पहले के 45 दिनों में issuer को आपको चेताना भी होता है।[1]
✕ ग़लतफ़हमी"Wallet से हुई ठगी का पूरा नुक़सान हमेशा ग्राहक का है।"
✓ सचनहीं। गैर-bank PPI में चूक issuer की हो, तो ग्राहक की देनदारी शून्य है। चूक किसी तीसरे की हो और आप तीन दिन के अंदर बता दें, तब भी शून्य है। पर payment credentials ख़ुद बता देने जैसी लापरवाही में, बताने तक का पूरा नुक़सान ग्राहक का है।[1]
✕ ग़लतफ़हमी"Wallet कंपनी की शिकायत RBI Ombudsman नहीं सुनता।"
✓ सचसुनता है। RBI के निर्देशों के मुताबिक bank और गैर-bank, दोनों के जारी किए PPI के ग्राहक Reserve Bank - Integrated Ombudsman Scheme का सहारा ले सकते हैं।[1] Scheme के FAQ में भी PPI जारी करने वाली गैर-bank कंपनियाँ गिनाई गई हैं।[2]

आपका अधिकार

गैर-bank PPI में unauthorised लेनदेन की चूक न आपकी हो, न issuer की, और आप तीन दिन के अंदर issuer को बता दें, तो आपकी देनदारी शून्य है।[1]
  • Charges पहले से पता: issuer को PPI देते समय सभी charges और fees, और validity की शर्तें साफ़ और सरल भाषा में बतानी होती हैं।[1]
  • Statement: कम से कम पिछले 6 महीने का account statement और कम से कम 10 लेनदेन की history मिलनी चाहिए।[1]
  • 24x7 सूचना: गैर-bank issuer को unauthorised लेनदेन बताने के लिए 24x7 रास्ता देना होता है, और शिकायत मिलते ही complaint number के साथ जवाब भेजना होता है।[1]
  • Agent fee नहीं ले सकता: issuer के agent ग्राहक से सेवा के लिए सीधे कोई fee नहीं ले सकते, और ली गई रक़म की रसीद देनी होती है।[1]

अभी क्या करें

  • देखिए कि wallet के brand नाम के साथ उस company का नाम लिखा है, जिसे RBI से मंज़ूरी मिली है।[1]
  • लेनदेन के alert पढ़िए; हर alert में बचा balance भी आता है।[1]
  • कोई अनजान लेनदेन दिखे, तो तुरंत issuer को बताइए; बताने में जितनी देर होगी, नुक़सान का जोखिम उतना बढ़ेगा।[1]
  • Wallet app में पैसा भेजने की अपनी सीमा ख़ुद तय कर लीजिए।[1]
  • Complaint number सँभालकर रखिए; 30 दिन में हल न मिले, तो CMS portal पर RBI Ombudsman से शिकायत कीजिए।[2]

सवाल-जवाब

Wallet का मतलब क्या है?Wallet, Prepaid Payment Instrument (PPI) का एक रूप है। RBI के मुताबिक PPI वह साधन है, जिसमें जमा रक़म के बदले सामान और सेवाओं की ख़रीद, financial services और पैसा भेजने जैसी सुविधाएँ मिलती हैं। PPI card, wallet या ऐसे किसी भी रूप में जारी हो सकता है।
PPI कौन जारी कर सकता है?RBI के निर्देशों के मुताबिक bank और गैर-bank संस्थाएँ, Payment and Settlement Systems Act, 2007 के तहत RBI की मंज़ूरी या authorisation लेकर। इसके बिना कोई संस्था PPI का payment system नहीं चला सकती। गैर-bank संस्था भारत में बनी company होनी चाहिए।
Small PPI और Full-KYC PPI में क्या फ़र्क़ है?Small PPI थोड़ी जानकारी पर मिलता है, उसमें ₹10,000 तक ही रह सकते हैं, और वह सिर्फ़ सामान और सेवाओं की ख़रीद के लिए है। Full-KYC PPI ग्राहक का KYC पूरा होने पर मिलता है, उसमें ₹2,00,000 तक रह सकते हैं, और उससे ख़रीद, पैसा भेजना और cash निकालना हो सकता है।
Small PPI लेने के लिए क्या देना होता है?RBI के निर्देशों के मुताबिक कम से कम: OTP से जाँचा हुआ mobile number, और अपने नाम और किसी OVD या ऐसे ही दस्तावेज़ के पहचान number का self-declaration।
Small PPI में कितना पैसा भर सकते हैं?महीने में ₹10,000 तक, और वित्त वर्ष में कुल ₹1,20,000 तक। किसी भी समय उसमें ₹10,000 से ज़्यादा नहीं रह सकते।
Full-KYC wallet से कितना पैसा भेज सकते हैं?RBI के निर्देशों के मुताबिक पहले से register किए beneficiary को महीने में ₹2,00,000 तक, हर beneficiary पर; बाक़ी सब मामलों में महीने में ₹10,000 तक। Issuer जोखिम देखकर इससे कम सीमा रख सकता है।
क्या wallet से cash निकाल सकते हैं?सिर्फ़ Full-KYC PPI से। गैर-bank के जारी PPI से एक बार में ₹2,000 तक और महीने में कुल ₹10,000 तक, सभी channel मिलाकर। Bank के जारी PPI से cash निकाला जा सकता है; PoS machine पर एक बार में ₹2,000 और महीने में ₹10,000 की सीमा है।
क्या wallet की रक़म पर ब्याज मिलता है?नहीं। RBI के निर्देशों के मुताबिक PPI जारी करने वाला PPI के balance पर कोई ब्याज नहीं दे सकता।
Wallet की validity कितनी होती है?RBI के निर्देशों के मुताबिक हर PPI की validity आख़िरी बार पैसा भरने की तारीख़ से कम से कम एक साल होनी चाहिए। Validity ख़त्म होने से पहले के 45 दिनों में issuer को SMS, e-mail या किसी और तरीक़े से, आपकी चुनी भाषा में, चेताना होता है।
Validity ख़त्म होने पर बचा पैसा कैसे मिलेगा?गैर-bank PPI में validity ख़त्म होने के बाद कभी भी issuer से refund माँगा जा सकता है; रक़म bank खाते में दी जाती है। गैर-bank issuer बची रक़म को कम से कम तीन साल तक अपने Profit & Loss account में नहीं डाल सकता।
Wallet एक साल तक इस्तेमाल न हो, तो क्या होता है?RBI के निर्देशों के मुताबिक जिस PPI में लगातार एक साल कोई financial transaction न हो, उसे issuer holder को notice भेजकर inactive कर देता है। वह जाँच और due diligence के बाद ही दोबारा चालू होता है।
Wallet बंद करने पर बचा पैसा कहाँ जाता है?Small PPI कभी भी बंद किया जा सकता है; रक़म उसी स्रोत में लौट सकती है, जहाँ से PPI भरा गया था, या KYC पूरा करने पर bank खाते में जा सकती है। Full-KYC PPI में भी issuer को PPI बंद करके balance transfer करने का विकल्प देना होता है।
Wallet से unauthorised लेनदेन हो जाए, तो नुक़सान किसका?गैर-bank PPI के लिए RBI के निर्देश: चूक issuer की हो, तो ग्राहक की देनदारी शून्य। चूक किसी तीसरे की हो और आप तीन दिन के अंदर बता दें, तो शून्य; चार से सात दिन में बताएँ, तो लेनदेन की रक़म या ₹10,000, जो कम हो; सात दिन के बाद, issuer की Board की नीति के मुताबिक। लापरवाही आपकी हो, तो बताने तक का पूरा नुक़सान आपका। Bank के जारी PPI पर RBI के bank वाले निर्देश लागू होते हैं।
ठगी बताने के बाद पैसा कब तक लौटता है?RBI के निर्देशों के मुताबिक गैर-bank issuer को सूचना मिलने के 10 दिन के अंदर वह रक़म PPI में वापस (shadow reversal) डालनी होती है। शिकायत का हल और ग्राहक की देनदारी 90 दिन के अंदर तय होनी चाहिए; न हो पाए, तो तय रक़म ग्राहक को देनी होती है। ग्राहक की देनदारी साबित करने का भार issuer पर है।
Wallet कंपनी की शिकायत कहाँ करें?पहले उसी कंपनी से; उसे complaint number और शिकायत track करने की सुविधा देनी होती है, और शिकायत 30 दिन के अंदर हल करने की कोशिश करनी होती है। 30 दिन में जवाब न मिले या जवाब से संतुष्ट न हों, तो CMS portal पर RBI Ombudsman को शिकायत की जा सकती है।
क्या wallet UPI से जुड़ सकता है?RBI के निर्देशों के मुताबिक wallet के रूप वाले PPI की interoperability UPI के ज़रिए होती है, और Full-KYC PPI के holders को यह सुविधा देना issuer के लिए ज़रूरी है। Issuer सिर्फ़ अपने Full-KYC PPI के holders को UPI भुगतान की सुविधा दे सकता है।
Gift PPI के क्या नियम हैं?RBI के निर्देशों के मुताबिक हर gift instrument ज़्यादा से ज़्यादा ₹10,000 का हो सकता है, उसे दोबारा नहीं भरा जा सकता, और उससे cash निकालना या पैसा भेजना मना है।

जुड़े शब्द

स्रोत

  1. RBI — Master Directions on Prepaid Payment Instruments (PPIs) (RBI/DPSS/2021-22/82; Updated as on September 30, 2026) ↗जारी: 27 अग 2021किस बात के लिए, दस्तावेज़ का कौन-सा हिस्सा
    • पैरा 1.5, 1.7bank और गैर-bank; RBI की मंज़ूरी के बिना नहीं
    • पैरा 2.1, 2.8PPI की परिभाषा; Closed System PPI; दो प्रकार
    • पैरा 4.2गैर-bank संस्था भारत में बनी company
    • पैरा 7.3 से 7.7company का नाम; ब्याज नहीं; पैसा भरने के तरीक़े; cash ₹50,000; card या wallet का रूप
    • पैरा 7.12KYC के बिना remittance नहीं
    • पैरा 9.1Small PPI: जानकारी, सीमाएँ, 24 महीने, बंद करना
    • पैरा 9.2Full-KYC PPI: ₹2 लाख, पैसा भेजने और cash की सीमाएँ
    • पैरा 10.1, 10.2Gift PPI और PPI-MTS
    • पैरा 11.4, 11.6UPI और card network से interoperability
    • पैरा 12.3गैर-bank issuer की रक़म escrow account में
    • पैरा 13validity, चेतावनी, refund, inactive PPI
    • पैरा 14.3fail हुए लेनदेन का refund उसी PPI में
    • पैरा 15.32FA, alert, cooling period, अपनी सीमा
    • पैरा 16शर्तें और charges बताना; शिकायत की व्यवस्था; statement; Ombudsman
    • पैरा 17unauthorised लेनदेन में ग्राहक की देनदारी; 10 दिन; 90 दिन; सबूत का भार
  2. RBI — Frequently Asked Questions: Reserve Bank - Integrated Ombudsman Scheme, 2026 (37 सवाल) ↗किस बात के लिए, दस्तावेज़ का कौन-सा हिस्सा
    • Q13PPI जारी करने वाली गैर-bank कंपनियाँ scheme में
    • Q9 और Q17पहले संस्था से शिकायत; 30 दिन; CMS portal

सुधार का इतिहास

  • पन्ना बना। RBI के Master Directions on Prepaid Payment Instruments (30 सितंबर 2026 तक update) और Reserve Bank - Integrated Ombudsman Scheme, 2026 के FAQ से जाँचा।

पन्ना बना: 08 अक्तू 2026 · आख़िरी जाँच: 08 अक्तू 2026
यह सामान्य जानकारी है, कानूनी या वित्तीय सलाह नहीं।