शब्द · पैसे की बुनियाद✓ स्रोत से जाँचा · 17 Oct 2026
Monetary Policy
मौद्रिक नीति · RBI का ब्याज दरों और पैसे की उपलब्धता से दाम स्थिर रखने का काम
एक लाइन में
Monetary Policy (मौद्रिक नीति) RBI का वह काम है, जिसमें वह ब्याज दरों (मुख्य रूप से Repo Rate) और bank व्यवस्था में पैसे की उपलब्धता के ज़रिए दाम स्थिर रखने की कोशिश करता है, विकास का ध्यान रखते हुए। 2016 से भारत में यह 'flexible inflation targeting' ढाँचे में चलती है: target 4% CPI महँगाई, और Repo Rate छह सदस्यों वाली MPC तय करती है।
मुख्य मक़सददाम की स्थिरताgrowth का ध्यान रखते हुए
क़ानूनी आधारRBI Act (2016 का संशोधन)धारा 45ZA, 45ZB
Monetary Policy यानी मौद्रिक नीति। RBI के मुताबिक RBI को monetary policy चलाने की ज़िम्मेदारी मिली है, जिसका मुख्य मक़सद दाम की स्थिरता है, विकास (growth) का ध्यान रखते हुए। मई 2016 में RBI Act में संशोधन करके इसे flexible inflation targeting का क़ानूनी ढाँचा दिया गया।[1]
2इसका मतलब आपके लिए क्या है
आपकी EMI और जमा:Repo Rate का बदलाव पूरे financial system तक पहुँचाने की कोशिश होती है, जिससे loan और जमा की दरों पर असर पड़ सकता है।[1]
महँगाई पर नज़र: नीति का लक्ष्य 4% CPI महँगाई है।[1]
3Monetary policy कैसे काम करती है
MPCRepo Rate तय
Transmission→LAF से
बाज़ार की दरेंWACR, loan, जमा
असर→aggregate demand
मांग और महँगाईtarget 4%
RBI के मुताबिक operating target 'weighted average call rate (WACR)' है; RBI liquidity संभालकर इसे Repo Rate के पास रखता है, ताकि Repo Rate का बदलाव पूरी financial system में पहुँचे और मांग पर असर डाले।
4आम ग़लतफ़हमी
✕ ग़लतफ़हमी"Monetary policy सरकार बनाती है, RBI सिर्फ़ लागू करता है।"
✓ सचनहीं। RBI के मुताबिक महँगाई का target केंद्र सरकार RBI से सलाह करके तय करती है, पर उस target के लिए Repo Rate RBI की Monetary Policy Committee तय करती है।[1]
✕ ग़लतफ़हमी"MPC में Governor अकेले फ़ैसला करते हैं।"
✓ सचनहीं। RBI के मुताबिक MPC में छह सदस्य हैं, हर सदस्य का एक वोट है; बराबरी होने पर ही Governor का दूसरा (casting) वोट होता है। हर सदस्य अपने वोट की वजह लिखकर देता है।[1]
5परीक्षा के लिए
याद रखने लायक़: flexible inflation targeting (2016); धारा 45ZA (target), 45ZB (MPC); MPC के 6 सदस्य, quorum 4, साल में कम-से-कम 4 बैठक; minutes 14वें दिन; operating target WACR; MPR हर छह महीने। बाक़ी शब्द परीक्षा के लिए पन्ने पर।[1]
6सवाल-जवाब
Monetary policy आसान भाषा में क्या है?जब महँगाई ज़्यादा हो, तो RBI ब्याज दर बढ़ाकर उधार महँगा कर सकता है, ताकि ख़र्च और मांग थोड़ी ठंडी हो; और जब ज़रूरत हो, तो दरें घटा सकता है। (यह समझाने का उदाहरण है; हर फ़ैसला MPC हालात देखकर करती है।)[1]
MPC में कौन होते हैं?RBI के मुताबिक: RBI Governor (अध्यक्ष), monetary policy देखने वाले Deputy Governor, RBI के Central Board का नामित एक अधिकारी, और केंद्र सरकार के नियुक्त तीन बाहरी सदस्य (चार साल के लिए)।[1]
MPC के फ़ैसले कब और कैसे पता चलते हैं?RBI के मुताबिक बैठकों का साल भर का कार्यक्रम पहले घोषित होता है; हर बैठक के बाद resolution जारी होता है, और 14वें दिन शाम 5 बजे minutes, जिनमें हर सदस्य का वोट और उसकी वजह होती है।[1]
Monetary Policy Report क्या है?RBI के मुताबिक RBI हर छह महीने में यह report जारी करता है, जिसमें पिछले छह महीने की महँगाई, आगे का अनुमान, growth और महँगाई के projections, और अर्थव्यवस्था का आकलन होता है।[1]
अभी नीति क्या है?RBI के 7 अक्टूबर 2026 के resolution के मुताबिक MPC ने सर्वसम्मति से Repo Rate 25 basis points बढ़ाकर 5.50% किया (SDF 5.25%, MSF और Bank Rate 5.75%), और stance बदलकर 'calibrated tightening' किया।[2]
शुरुआत; The Monetary Policy Frameworkमुख्य मक़सद दाम की स्थिरता, growth का ध्यान; मई 2016 का संशोधन, flexible inflation targeting; धारा 45ZA, 45ZB; operating target WACR; transmission
The Monetary Policy Committeeछह सदस्य, कौन-कौन; बाहरी सदस्य चार साल; साल में कम-से-कम 4 बैठक; quorum 4; एक वोट, बराबरी पर Governor का casting वोट; लिखित वजह
The Monetary Policy Processकार्यक्रम पहले से; resolution; 14वें दिन शाम 5 बजे minutes; हर छह महीने Monetary Policy Report
पन्ना बना: 17 अक्तू 2026 · आख़िरी जाँच: 17 अक्तू 2026
यह सामान्य जानकारी है, कानूनी या वित्तीय सलाह नहीं।
यह पन्ना: https://seedhamatlab.com/shabdkosh/monetary-policy/ · आख़िरी जाँच: 17 अक्तू 2026 छपी हुई प्रति पुरानी हो सकती है। ताज़ा पन्ना site पर देख लीजिए।