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शब्द · क़र्ज़✓ स्रोत से जाँचा · 16 Oct 2026

EBLR

ईबीएलआर · बाहरी benchmark, जैसे RBI का repo rate, से जुड़ी loan की ब्याज दर

एक लाइन में

EBLR का मतलब है loan की ऐसी floating ब्याज दर, जो bank के बाहर तय होने वाले benchmark से जुड़ी हो, जैसे RBI का repo rate, या FBIL के छापे 3 और 6 महीने के Treasury Bill yield। RBI के मुताबिक सभी floating rate personal / retail loans (घर, गाड़ी वग़ैरह) और MSME loans external benchmark से जुड़े होने चाहिए, और ब्याज दर कम-से-कम हर तीन महीने में reset होनी चाहिए।

किन loans पर ज़रूरीFloating retail और MSMEघर, गाड़ी वग़ैरह; पैरा 25
Resetकम-से-कम हर 3 महीनेपैरा 38
Credit risk premiumसिर्फ़ बड़े बदलाव परआपकी साख में; पैरा 33
बाक़ी spread3 साल में एक बारघटाया पहले भी जा सकता है

मतलब

EBLR (External Benchmark Lending Rate) floating ब्याज दर का वह तरीक़ा है, जिसमें दर bank के बाहर तय होने वाले benchmark, जैसे RBI के repo rate, से जुड़ी होती है, और उस पर bank अपना spread जोड़ता है।[1]

इसका मतलब आपके लिए क्या है

  • बदलाव जल्दी पहुँचता है: दर कम-से-कम हर तीन महीने में reset।[1]
  • Spread पर रोक: credit risk premium सिर्फ़ आपकी साख बदलने पर; बाक़ी spread तीन साल में एक बार।[1]
  • पुराने loan वालों के लिए रास्ता: MCLR से EBLR पर जाना foreclosure नहीं।[1]

EBLR कैसे चलता है

RBI के मुताबिक bank एक loan श्रेणी में एक ही external benchmark अपनाएगा; एक ही श्रेणी में कई benchmark नहीं चल सकते। Spread bank तय करता है, पर उसमें बदलाव के नियम RBI ने तय किए हैं।

आम ग़लतफ़हमी

✕ ग़लतफ़हमी"Repo rate घटा, तो मेरी EMI उसी दिन घट जाएगी।"
✓ सचज़रूरी नहीं। RBI के मुताबिक external benchmark वाली ब्याज दर कम-से-कम तीन महीने में एक बार reset होती है; आपके loan की reset तारीख़ loan की शर्तों पर निर्भर है।[1]
✕ ग़लतफ़हमी"Bank जब चाहे spread बढ़ा सकता है।"
✓ सचनहीं। RBI के मुताबिक credit risk premium तभी बदल सकता है, जब loan contract में तय तरीक़े से आपकी साख (credit assessment) में बड़ा बदलाव हो; operating cost समेत spread के बाक़ी हिस्से तीन साल में एक बार ही बदले जा सकते हैं। ग्राहक बनाए रखने के लिए bank इन्हें पहले घटा ज़रूर सकता है।[1]
✕ ग़लतफ़हमी"पुराने MCLR loan से EBLR पर जाने के लिए loan बंद करना पड़ेगा।"
✓ सचनहीं। RBI के मुताबिक यह बदलाव foreclosure नहीं माना जाता। जिन borrowers को बिना pre-payment charge floating loan चुकाने का हक़ है, वे बिना charge / fee EBLR पर जा सकते हैं, सिर्फ़ उचित administrative / legal ख़र्च लग सकता है, और उन्हें उसी तरह के नए loan वाली दर मिलेगी।[1]

आपका अधिकार

Floating rate retail या MSME loan external benchmark से जुड़ा हो, और उसकी दर कम-से-कम हर तीन महीने में reset हो। Bank credit risk premium आपकी साख में बड़े बदलाव के बिना नहीं बढ़ा सकता, और बाक़ी spread तीन साल में एक बार से ज़्यादा नहीं बदल सकता।[1]

अभी क्या करें

  • Loan agreement में देखिए कि आपका loan किस benchmark से जुड़ा है, और reset कब-कब होता है।[1]
  • पुराना MCLR / Base Rate loan है, तो bank से EBLR पर जाने की शर्तें पूछिए।[1]

सवाल-जवाब

External benchmark कौन-से हो सकते हैं?RBI के मुताबिक: RBI का policy repo rate; FBIL के छापे भारत सरकार के 3 महीने और 6 महीने के Treasury Bill yield; या FBIL का छापा कोई और benchmark market interest rate।[1]
MCLR और EBLR में क्या फ़र्क़ है?RBI के मुताबिक MCLR bank का internal benchmark है, जो bank की funds की लागत, CRR, operating cost और tenor premium से बनता है, और bank हर महीने तय तारीख़ पर छापता है; MCLR loan का reset एक साल या उससे कम में होता है। EBLR बाहरी benchmark से जुड़ा है और कम-से-कम हर तीन महीने में reset होता है।[1]
MCLR वाला मेरा पुराना loan क्या अपने-आप EBLR पर जाएगा?नहीं। RBI के मुताबिक MCLR / Base Rate / BPLR वाले पुराने loans चुकाने या renewal तक वैसे ही चलते हैं। आप EBLR पर जाने का विकल्प ले सकते हैं; बिना pre-payment charge वाले borrowers के लिए यह बिना charge है, बाक़ियों के लिए आपसी सहमति से।[1]
ये नियम किन banks पर लागू हैं?RBI के मुताबिक ये निर्देश commercial banks पर लागू हैं; small finance, payments और local area banks पर नहीं।[1]

जुड़े शब्द

स्रोत

  1. RBI — Reserve Bank of India (Commercial Banks – Interest Rates on Advances) Directions, 2025 (RBI/DOR/2025-26/161; DOR.CRE.REC.80./13.03.000/2025-26; 16 अक्टूबर 2026 को पढ़ा) ↗जारी: 28 नव 2025किस बात के लिए, दस्तावेज़ का कौन-सा हिस्सा
    • पैरा 3, 5(4)commercial banks पर, SFB / PB / LAB पर नहीं; external benchmark: repo rate, FBIL के 3 / 6 महीने के T-bill yield, या FBIL का कोई और benchmark
    • पैरा 15, 16, 23, 24, 36MCLR internal benchmark: cost of funds, CRR, operating cost, tenor premium; हर महीने पूर्व-घोषित तारीख़ पर; reset एक साल या कम
    • पैरा 25, 26, 27floating personal / retail (घर, गाड़ी) और MSME loans external benchmark से; एक श्रेणी में एक ही benchmark
    • पैरा 33spread bank तय करे; credit risk premium साख में बड़े बदलाव पर ही; बाक़ी spread तीन साल में एक बार, पहले घटाया जा सकता है
    • पैरा 38, 41external benchmark वाली दर कम-से-कम तीन महीने में reset; पुराने loans renewal तक; बिना pre-payment charge वालों के लिए EBLR पर बिना charge, नई दर, foreclosure नहीं

सुधार का इतिहास

  • पन्ना बना। RBI के Interest Rates on Advances Directions (161MD) से जाँचा।

पन्ना बना: 16 अक्तू 2026 · आख़िरी जाँच: 16 अक्तू 2026
यह सामान्य जानकारी है, कानूनी या वित्तीय सलाह नहीं।

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