1मतलब
PPF यानी Public Provident Fund। यह केंद्र सरकार की बचत योजना है, जो Government Savings Promotion Act, 1873 के तहत बनी Public Provident Fund Scheme, 2019 से चलती है।[1]
इसका खाता Post Office में खुलता है, और यह योजना banks में भी चलती है।[2][5]
2खाता और जमा
- कौन खोल सकता है: कोई व्यक्ति अपने नाम पर। वह उस नाबालिग के नाम पर भी एक खाता खोल सकता है, जिसका वह guardian है; एक नाबालिग के नाम पर एक ही खाता खुलता है।[1]
- Joint खाता नहीं: इस योजना में joint खाता नहीं खुलता।[1]
- पात्रता: India Post के पन्ने पर पात्रता में 'resident citizen of India' लिखा है।[2]
- कितना जमा: एक वित्तीय वर्ष में कम से कम ₹500 और ज़्यादा से ज़्यादा ₹1,50,000, ₹50 के गुणक में; एक बार में या किस्तों में।[1]
- सीमा में क्या गिना जाता है: ₹1.5 लाख की सीमा में अपने खाते के साथ नाबालिग के नाम पर खोले खाते की जमा भी शामिल है।[1]
- जमा छूट जाए तो: किसी साल कम से कम रकम जमा न हो, तो खाता 'discontinued' माना जाता है। पकने से पहले उसे ₹50 की fee और हर छूटे साल के ₹500 देकर फिर चालू किया जा सकता है। Discontinued खाते पर loan और निकासी नहीं मिलती।[1]
3ब्याज
- अभी की दर: 1 अक्टूबर 2026 से 31 दिसंबर 2026 तक 7.1%; ब्याज सालाना जुड़ता है।[2]
- दर कौन तय करता है: India Post के मुताबिक दर वित्त मंत्रालय समय-समय पर तय करता है। योजना के पैरा 7 में 1 अप्रैल 2020 से 7.1% दर लिखी है।[2][1]
- 5 तारीख़ का नियम: किसी महीने का ब्याज उस सबसे कम balance पर मिलता है, जो 5 तारीख़ के अंत से महीने के अंत तक खाते में रहा हो।[1]
- कब जुड़ता है: ब्याज हर वित्तीय वर्ष के अंत में खाते में जुड़ता है।[1]
- Tax: India Post और NSI के पन्नों पर लिखा है कि जमा पर Income Tax Act की धारा 80C की कटौती मिलती है और खाते में मिला ब्याज tax-free है।[2][3]
4Loan और निकासी
- Loan कब: जिस साल पहली जमा हुई, उस साल के अंत से एक साल बाद और पाँच साल पूरे होने से पहले। NSI के शब्दों में, तीसरे से छठे वित्तीय वर्ष तक।[1][3]
- Loan कितना: उस रकम के 25 प्रतिशत तक, जो loan माँगने वाले साल से ठीक पहले के दूसरे साल के अंत में खाते में थी। एक साल में एक ही loan।[1]
- Loan का ब्याज: मूल रकम 36 महीने में चुकानी होती है, फिर उस पर 1 प्रतिशत सालाना ब्याज। 36 महीने में न चुके, तो बाक़ी रकम पर 6 प्रतिशत सालाना।[1]
- निकासी कब: खाता खुलने वाले साल के अंत से पाँच साल बाद, साल में एक बार। NSI के शब्दों में, सातवें वित्तीय वर्ष से हर साल।[1][3]
- निकासी कितनी: उस रकम के 50 प्रतिशत तक, जो निकासी वाले साल से ठीक पहले के चौथे साल के अंत में, या पिछले साल के अंत में खाते में थी; दोनों में जो कम हो।[1]
515 साल बाद
15 साल खाता खुलने वाले वित्तीय वर्ष के अंत से गिने जाते हैं। जमा के साथ 5 साल और बढ़ाना हो, तो खाता पकने के एक साल के अंदर Form-4 देना होता है।
- बंद करना: Form-3 देकर खाता बंद किया जा सकता है; पूरी रकम ब्याज समेत मिलती है।[1]
- बिना जमा रखना: खाता बिना आगे जमा किए जितने समय चाहें रखा जा सकता है। Balance पर योजना की दर से ब्याज मिलता रहता है, और साल में एक बार कोई भी रकम निकाली जा सकती है।[1]
- जमा के साथ बढ़ाना: Form-4 देकर खाता 5 साल के block के लिए बढ़ाया जा सकता है। यह विकल्प खाता पकने के एक साल के अंदर देना होता है।[1]
- बढ़े हुए block में निकासी: 5 साल में कुल निकासी block की शुरुआत के balance के 60 प्रतिशत से ज़्यादा नहीं हो सकती।[1]
- ध्यान रखिए: पकने के बाद खाता एक साल से ज़्यादा बिना जमा के चल गया, तो दोबारा जमा के साथ चलाने का विकल्प नहीं रहता।[1]
6समय से पहले बंद और मृत्यु
- समय से पहले बंद: खाता खुलने वाले साल के अंत से पाँच साल बाद ही, और तीन वजहों पर: खाताधारक, पति/पत्नी या निर्भर बच्चों की जानलेवा बीमारी का इलाज (योजना के पैरा 13 में माता-पिता भी लिखे हैं); खाताधारक या निर्भर बच्चों की उच्च शिक्षा; या खाताधारक की residency status बदलना।[1][2]
- उसकी क़ीमत: ऐसे में ब्याज 1 प्रतिशत कम दर से मिलता है।[1][2]
- मृत्यु पर: खाता बंद होता है; nominee या क़ानूनी वारिस उसे जारी नहीं रख सकता। Balance पर ब्याज उस महीने से पिछले महीने के अंत तक मिलता है, जिसमें भुगतान होता है।[1]
- Nominee हो तो: nominee Form 11 में आवेदन और मृत्यु का प्रमाण देता है।[4]
- Nominee न हो तो: मृत्यु के छह महीने के अंदर probate, letters of administration या Succession Certificate पेश न हो, तो ₹5 लाख तक की रकम अधिकृत अधिकारी सही दावेदार को दे सकता है। इसके लिए Death Certificate, passbook, Affidavit (Form-13), letter of disclaimer (Form-14) और bond of indemnity (Form-15) लगते हैं। ₹5 लाख से ऊपर की रकम के लिए succession certificate देना होता है।[4][2]
- Bank वाले नियम नहीं: bank के जमा खातों के दावे निपटाने के RBI के निर्देश PPF पर लागू नहीं हैं।[5]
7आम ग़लतफ़हमी
8आपका अधिकार
- Nomination: एक से चार nominee रखे जा सकते हैं, और हर एक का हिस्सा तय किया जा सकता है।[4]
- छूटा खाता: discontinued खाता पकने से पहले ₹50 की fee और हर छूटे साल के ₹500 देकर फिर चालू किया जा सकता है।[1]
- 15 साल बाद: खाता बंद करना ज़रूरी नहीं; उसे बिना जमा के रखा या 5 साल के लिए बढ़ाया जा सकता है।[1]
9अभी क्या करें
- हर वित्तीय वर्ष में कम से कम ₹500 जमा कीजिए, ताकि खाता discontinued न हो।[1]
- जमा महीने की 5 तारीख़ तक कर दीजिए; उस महीने का ब्याज 5 तारीख़ के अंत से महीने के अंत तक के सबसे कम balance पर गिना जाता है।[1]
- खाते में nomination देख लीजिए; nominee न हो और रकम ₹5 लाख से ऊपर हो, तो दावे के लिए succession certificate देना पड़ता है।[4]
- खाता जमा के साथ बढ़ाना हो, तो पकने के एक साल के अंदर Form-4 दे दीजिए; बाद में यह विकल्प नहीं मिलता।[1]
- चालू तिमाही की दर India Post के 'Interest Rates' में देख लीजिए; दर समय-समय पर तय होती है।[2]
10सवाल-जवाब
11जुड़े शब्द
12स्रोत
- National Savings Institute (वित्त मंत्रालय) — Public Provident Fund Scheme, 2019 (G.S.R. 915(E), 12 दिसंबर 2019; G.S.R. 290(E), 5 मई 2020 तक संशोधित) ↗किस बात के लिए, दस्तावेज़ का कौन-सा हिस्सा
- पैरा 3व्यक्ति खाता खोल सकता है; नाबालिग के लिए एक खाता; joint खाता नहीं
- पैरा 4 और 5₹500 से ₹1,50,000; ₹50 के गुणक; एक बार में या किस्तों में; सीमा में नाबालिग का खाता शामिल
- पैरा 6discontinued खाता; ₹50 fee और ₹500 प्रति साल से दोबारा चालू; loan और निकासी नहीं
- पैरा 71 अप्रैल 2020 से 7.1%; 5 तारीख़ से महीने के अंत तक का सबसे कम balance; साल के अंत में ब्याज
- पैरा 8 और 9loan की अवधि और 25 प्रतिशत की सीमा; 36 महीने; 1 और 6 प्रतिशत ब्याज
- पैरा 10पाँच साल बाद निकासी; 50 प्रतिशत की सीमा; साल में एक बार
- पैरा 11 और 1215 साल बाद बंद करना, बिना जमा रखना, या 5 साल बढ़ाना; 60 प्रतिशत की सीमा
- पैरा 13समय से पहले बंद करने की वजहें; पाँच साल की शर्त
- पैरा 14मृत्यु पर खाता बंद; nominee या वारिस जारी नहीं रख सकता; ब्याज कब तक
- पैरा 15 और 16कुर्की नहीं; General Rules लागू
- India Post (डाक विभाग) — Saving Schemes: Public Provident Fund Account और Interest Rates (w.e.f 01.10.2026 to 31.12.2026) ↗किस बात के लिए, दस्तावेज़ का कौन-सा हिस्सा
- Interest Rates (New)1 अक्टूबर से 31 दिसंबर 2026: PPF 7.1%, ब्याज सालाना जुड़ता है
- PPF: Eligibility'resident citizen of India'
- PPF: Interestदर वित्त मंत्रालय समय-समय पर तय करता है; ब्याज tax-free
- PPF: Depositजमा पर धारा 80C की कटौती
- PPF: Premature Closureपाँच साल बाद; तीन वजहें; ब्याज 1 प्रतिशत कम
- Death Claimnomination या legal evidence न हो, तो ₹5 लाख तक
- National Savings Institute — Public Provident Fund Account (योजना का परिचय) ↗किस बात के लिए, दस्तावेज़ का कौन-सा हिस्सा
- Introductionloan तीसरे से छठे वित्तीय वर्ष तक; निकासी सातवें वित्तीय वर्ष से; धारा 80C; ब्याज पर Income Tax नहीं
- National Savings Institute — Government Savings Promotion General Rules, 2018 (G.S.R. 1003(E), 5 अक्टूबर 2018) ↗किस बात के लिए, दस्तावेज़ का कौन-सा हिस्सा
- नियम 14एक से चार nominee; Form 10; हर nominee का हिस्सा
- नियम 15nominee का दावा Form 11 में; nomination न हो तो ₹5 लाख तक और उससे ऊपर के काग़ज़
- RBI — Reserve Bank of India (Commercial Banks – Responsible Business Conduct) Directions, 2025 (RBI/DOR/2025-26/170; Updated as on October 1, 2026) ↗किस बात के लिए, दस्तावेज़ का कौन-सा हिस्सा
- पैरा 282दावे निपटाने के निर्देश bank में चलने वाली SCSS, PPF जैसी योजनाओं पर लागू नहीं
13सुधार का इतिहास
- पन्ना बना। Public Provident Fund Scheme, 2019 (NSI पर, 5 मई 2020 तक संशोधित), India Post के Saving Schemes पन्ने, Government Savings Promotion General Rules, 2018 और RBI के निर्देशों से जाँचा।
पन्ना बना: 07 अक्तू 2026 · आख़िरी जाँच: 07 अक्तू 2026
यह सामान्य जानकारी है, कानूनी या वित्तीय सलाह नहीं।