1मतलब
Internal Ombudsman (IO) bank के अंदर का सबसे ऊँचा शिकायत-समीक्षक है। RBI के मुताबिक इसका मक़सद है कि bank किसी ग्राहक की शिकायत ठुकराने से पहले, bank के अंदर ही ऊँचे स्तर पर उसकी दोबारा जाँच हो।[1]
- Bank का कर्मचारी नहीं: IO उसी bank या उसकी holding, associate या subsidiary company का पहले या अभी का कर्मचारी नहीं हो सकता।[1]
- कहाँ: भारत में 10 या ज़्यादा banking outlets वाले commercial banks में; NBFC और कुछ दूसरी संस्थाओं के लिए RBI के अलग निर्देश हैं।[1][2][3]
2इसका मतलब आपके लिए क्या है
- आपको कुछ नहीं करना: bank आपकी शिकायत आधी सुलझाए या ठुकराए, तो वह अपने-आप IO के पास जाती है।[1]
- 30 दिन: bank को शिकायत मिलने के 30 दिन के अंदर आपको आख़िरी फ़ैसला बताना है।[1]
- आगे का रास्ता: IO के बाद भी बात न बने, तो bank को आपको RBI Ombudsman और CMS portal का रास्ता बताना है।[1]
3शिकायत IO तक कैसे पहुँचती है
RBI के निर्देशों के मुताबिक आपको आख़िरी फ़ैसला bank को शिकायत मिलने के 30 दिन के अंदर बताना है। IO भी bank का फ़ैसला सही माने, तो जवाब में साफ़ लिखा होना चाहिए कि शिकायत IO ने देखी है।
- तीन ही नतीजे: bank अपने शिकायत system में फ़ैसला सिर्फ़ 'Fully Resolved', 'Partially Resolved' या 'Wholly Rejected' दर्ज करता है।[1]
- Senior जाँच: शिकायत वही branch या unit बंद नहीं करती; ठुकराने या आधा सुलझाने से पहले bank में ऊँचे स्तर पर देखी जाती है।[1]
- कितने दिन में IO को: जिन शिकायतों की समय-सीमा RBI, NPCI या card network ने तय की है, उनमें इतनी पहले कि IO को कम से कम 10 दिन मिलें; बाक़ी में शिकायत मिलने के 20 दिन के अंदर।[1]
- आपसे पूछताछ: ज़रूरत हो, तो IO आपसे लिखित या मौखिक बात और काग़ज़ माँग सकता है।[1]
4IO क्या नहीं देखता
- Bank के ऐसे घोटाले, जिनका ग्राहक पर कोई असर न हो।[1]
- सुझाव और bank के कारोबारी फ़ैसले; पर ऐसे फ़ैसलों में सेवा की कमी की शिकायत IO देखता है।[1]
- Bank का अंदरूनी प्रशासन, HR और कर्मचारियों का वेतन।[1]
- Court, consumer commission या arbitration में तय हो चुके या चल रहे मामले।[1]
- वे विवाद, जिनका उपाय Credit Information Companies (Regulation) Act, 2005 की धारा 18 में है।[1]
5आम ग़लतफ़हमी
6आपका अधिकार
- साफ़ जवाब: IO bank का फ़ैसला सही माने, तो जवाब में साफ़ लिखा होना चाहिए कि शिकायत IO ने देखी है।[1]
- RBI तक रास्ता: ऐसे जवाब में RBI Ombudsman के पास जाने का विकल्प और cms.rbi.org.in का पता होना चाहिए।[1]
7अभी क्या करें
- शिकायत पहले अपने bank में दर्ज कीजिए और शिकायत नंबर संभालकर रखिए।
- Bank का आख़िरी जवाब पढ़िए: शिकायत ठुकराई गई है, तो देखिए कि उसमें IO के देखने का ज़िक्र और RBI Ombudsman का रास्ता लिखा है या नहीं।[1]
- जवाब से संतुष्ट न हों, तो cms.rbi.org.in पर RBI Ombudsman के पास शिकायत कीजिए।[1]
8सवाल-जवाब
9जुड़े शब्द
10स्रोत
- RBI — Reserve Bank of India (Commercial Banks - Internal Ombudsman) Directions, 2026 (RBI/CEPD/2025-26/381; CEPD.PRD.No.S1027/13.01.019/2025-26; 14 जनवरी 2026; दस्तावेज़ पर 'Updated as on' की कोई तारीख़ नहीं है), PDF ↗किस बात के लिए, दस्तावेज़ का कौन-सा हिस्सा
- प्रस्तावनामक़सद: ठुकराने से पहले bank के अंदर ऊँचे स्तर पर दोबारा जाँच
- खंड 1(2)तुरंत लागू; खंड 7(2), 14(2) और 14(4) का पालन 30 जून 2026 तक
- खंड 3(1), (2)10 या ज़्यादा banking outlets वाले commercial banks; SFB, PB, LAB बाहर; छह महीने वाली शर्त
- खंड 5(2)IO उसी bank या उसकी group company का कर्मचारी न रहा हो
- खंड 8(1), (4), (6)contract पर नियुक्ति, कम से कम 3 और कुल 5 साल; बीच में हटाने पर रोक
- खंड 12(1), (4), (5)सीधी शिकायत नहीं; मुआवज़े की सिफ़ारिश
- खंड 4(1)(b), 13(3), (4)IO का फ़ैसला सिर्फ़ Whole Time Director / Executive Director की मंज़ूरी से पलट सकता है; ऐसे मामले Board की Customer Service Committee के सामने
- खंड 14(1)automatic escalation; कम से कम 10 दिन या 20 दिन के अंदर
- खंड 14(2)तीन ही नतीजे: Fully Resolved, Partially Resolved, Wholly Rejected
- खंड 14(4)शिकायत senior स्तर पर देखी जाए, उसी branch से बंद न हो
- खंड 14(5)IO के दायरे से बाहर की शिकायतें
- खंड 14(8)IO शिकायत करने वाले से लिखित या मौखिक बात और काग़ज़ माँग सकता है
- खंड 14(9), (10), (11)30 दिन में आख़िरी फ़ैसला; कारण सहित फ़ैसला; जवाब में IO के देखने का ज़िक्र
- खंड 14(12)RBI Ombudsman का विकल्प, cms.rbi.org.in और CRPC का पता
- खंड 14(17)IO का संपर्क सार्वजनिक नहीं
- खंड 17(1)2023 के Master Direction की जगह
- RBI — Reserve Bank of India (Non-Banking Financial Companies - Internal Ombudsman) Directions, 2026 (RBI/CEPD/2025-26/384; CEPD.PRD.No.S1030/13.01.019/2025-26; 14 जनवरी 2026) ↗किस बात के लिए, दस्तावेज़ का कौन-सा हिस्सा
- खंड 3(1), (2)कौन-सी NBFCs: जमा लेने वाली 10+ branches; बाक़ी ₹5,000 करोड़+ asset और आम ग्राहक; 31 मार्च 2025 की स्थिति; बाद में शर्त पूरी हो तो छह महीने बाद से
- खंड 12(1), 14(9)सीधी शिकायत नहीं; 30 दिन में आख़िरी फ़ैसला
- RBI — Master Directions की सूची, 'Consumer Education and Protection' भाग (11 अक्टूबर 2026 को देखा) ↗किस बात के लिए, दस्तावेज़ का कौन-सा हिस्सा
- 14 जनवरी 2026 की प्रविष्टियाँSFB, Payments Bank, NBFC, non-bank PPI और CIC के अलग Internal Ombudsman Directions
11सुधार का इतिहास
- पन्ना बना। RBI के Commercial Banks – Internal Ombudsman Directions, 2026 (14 जनवरी 2026) और NBFC – Internal Ombudsman Directions, 2026 (14 जनवरी 2026) से जाँचा।
पन्ना बना: 11 अक्तू 2026 · आख़िरी जाँच: 11 अक्तू 2026
यह सामान्य जानकारी है, कानूनी या वित्तीय सलाह नहीं।
यह पन्ना: https://seedhamatlab.com/shabdkosh/internal-ombudsman/ · आख़िरी जाँच: 11 अक्तू 2026
छपी हुई प्रति पुरानी हो सकती है। ताज़ा पन्ना site पर देख लीजिए।

एक लाइन में