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शब्द · बैंकिंग✓ स्रोत से जाँचा · 11 Oct 2026

Internal Ombudsman

आंतरिक लोकपाल · bank के अंदर का सबसे ऊँचा शिकायत-समीक्षक

एक लाइन में

Internal Ombudsman (IO) bank के अंदर शिकायतों की दोबारा जाँच करने वाला सबसे ऊँचा अधिकारी है; वह उस bank का कर्मचारी नहीं रहा होता। Bank आपकी जो शिकायत ठुकराता या आधी सुलझाता है, IO उसे दोबारा जाँचता है। आप उसके पास सीधे नहीं जाते; bank ख़ुद ऐसी शिकायत उसे भेजता है, और 30 दिन में आपको आख़िरी फ़ैसला बताना होता है।

आख़िरी फ़ैसला आप तक30 दिन मेंbank को शिकायत मिलने की तारीख़ से
IO के पास सीधे शिकायतनहींbank ख़ुद भेजता है, अपने-आप
ठुकराई या आधी सुलझी शिकायतअपने-आप IO कोआम तौर पर 20 दिन के अंदर
IO भी न माने, तोRBI Ombudsmanbank को जवाब में CMS का पता बताना है

मतलब

Internal Ombudsman (IO) bank के अंदर का सबसे ऊँचा शिकायत-समीक्षक है। RBI के मुताबिक इसका मक़सद है कि bank किसी ग्राहक की शिकायत ठुकराने से पहले, bank के अंदर ही ऊँचे स्तर पर उसकी दोबारा जाँच हो।[1]

  • Bank का कर्मचारी नहीं: IO उसी bank या उसकी holding, associate या subsidiary company का पहले या अभी का कर्मचारी नहीं हो सकता।[1]
  • कहाँ: भारत में 10 या ज़्यादा banking outlets वाले commercial banks में; NBFC और कुछ दूसरी संस्थाओं के लिए RBI के अलग निर्देश हैं।[1][2][3]

इसका मतलब आपके लिए क्या है

  • आपको कुछ नहीं करना: bank आपकी शिकायत आधी सुलझाए या ठुकराए, तो वह अपने-आप IO के पास जाती है।[1]
  • 30 दिन: bank को शिकायत मिलने के 30 दिन के अंदर आपको आख़िरी फ़ैसला बताना है।[1]
  • आगे का रास्ता: IO के बाद भी बात न बने, तो bank को आपको RBI Ombudsman और CMS portal का रास्ता बताना है।[1]

शिकायत IO तक कैसे पहुँचती है

RBI के निर्देशों के मुताबिक आपको आख़िरी फ़ैसला bank को शिकायत मिलने के 30 दिन के अंदर बताना है। IO भी bank का फ़ैसला सही माने, तो जवाब में साफ़ लिखा होना चाहिए कि शिकायत IO ने देखी है।

  • तीन ही नतीजे: bank अपने शिकायत system में फ़ैसला सिर्फ़ 'Fully Resolved', 'Partially Resolved' या 'Wholly Rejected' दर्ज करता है।[1]
  • Senior जाँच: शिकायत वही branch या unit बंद नहीं करती; ठुकराने या आधा सुलझाने से पहले bank में ऊँचे स्तर पर देखी जाती है।[1]
  • कितने दिन में IO को: जिन शिकायतों की समय-सीमा RBI, NPCI या card network ने तय की है, उनमें इतनी पहले कि IO को कम से कम 10 दिन मिलें; बाक़ी में शिकायत मिलने के 20 दिन के अंदर।[1]
  • आपसे पूछताछ: ज़रूरत हो, तो IO आपसे लिखित या मौखिक बात और काग़ज़ माँग सकता है।[1]

IO क्या नहीं देखता

  • Bank के ऐसे घोटाले, जिनका ग्राहक पर कोई असर न हो।[1]
  • सुझाव और bank के कारोबारी फ़ैसले; पर ऐसे फ़ैसलों में सेवा की कमी की शिकायत IO देखता है।[1]
  • Bank का अंदरूनी प्रशासन, HR और कर्मचारियों का वेतन।[1]
  • Court, consumer commission या arbitration में तय हो चुके या चल रहे मामले।[1]
  • वे विवाद, जिनका उपाय Credit Information Companies (Regulation) Act, 2005 की धारा 18 में है।[1]

आम ग़लतफ़हमी

✕ ग़लतफ़हमी"Internal Ombudsman का phone नंबर या email लेकर सीधे उससे शिकायत करूँगा।"
✓ सचऐसा नहीं होता। IO सीधे ग्राहकों या आम लोगों की शिकायतें नहीं लेता, और bank को IO का संपर्क सार्वजनिक नहीं करना है। आपकी शिकायत bank के ज़रिये अपने-आप उस तक जाती है।[1]
✕ ग़लतफ़हमी"Internal Ombudsman भी bank का कर्मचारी है, इसलिए bank का ही पक्ष लेगा।"
✓ सचRBI के निर्देशों के मुताबिक IO उसी bank या उसकी holding, associate या subsidiary company का पहले या अभी का कर्मचारी नहीं हो सकता। उसकी नियुक्ति तय अवधि के contract पर होती है, और Board की Customer Service Committee की मंज़ूरी के बिना उसे बीच में हटाया नहीं जा सकता।[1]
✕ ग़लतफ़हमी"Internal Ombudsman और RBI Ombudsman एक ही हैं।"
✓ सचनहीं। Internal Ombudsman bank के अंदर का पद है, जो bank के फ़ैसले की दोबारा जाँच करता है। RBI Ombudsman RBI का अधिकारी है; IO के बाद भी शिकायत आधी सुलझी या ठुकराई जाए, तो bank को आपको RBI Ombudsman के पास जाने का विकल्प बताना है।[1]

आपका अधिकार

जिन banks पर ये निर्देश लागू हैं, वहाँ bank आपकी शिकायत आधी सुलझाए या ठुकराए, तो उसकी IO से दोबारा जाँच और 30 दिन के अंदर आख़िरी फ़ैसला पाना आपका हक़ है।[1]
  • साफ़ जवाब: IO bank का फ़ैसला सही माने, तो जवाब में साफ़ लिखा होना चाहिए कि शिकायत IO ने देखी है।[1]
  • RBI तक रास्ता: ऐसे जवाब में RBI Ombudsman के पास जाने का विकल्प और cms.rbi.org.in का पता होना चाहिए।[1]

अभी क्या करें

  • शिकायत पहले अपने bank में दर्ज कीजिए और शिकायत नंबर संभालकर रखिए।
  • Bank का आख़िरी जवाब पढ़िए: शिकायत ठुकराई गई है, तो देखिए कि उसमें IO के देखने का ज़िक्र और RBI Ombudsman का रास्ता लिखा है या नहीं।[1]
  • जवाब से संतुष्ट न हों, तो cms.rbi.org.in पर RBI Ombudsman के पास शिकायत कीजिए।[1]

सवाल-जवाब

Internal Ombudsman क्या करता है?Bank आपकी जिस शिकायत को पूरी या आंशिक रूप से ठुकराने जा रहा हो, IO उसे ठुकराए जाने से पहले दोबारा जाँचता है। RBI के मुताबिक इसका मक़सद bank के अंदर ही शिकायत का जल्दी और सार्थक हल है।
मुझे IO तक शिकायत कैसे पहुँचानी है?आपको कुछ नहीं करना। Bank को पूरी तरह automatic शिकायत system रखना है, जिसमें आधी सुलझी या ठुकराई गई हर शिकायत अपने-आप IO के पास दोबारा जाँच के लिए जाती है। जिन शिकायतों पर RBI, NPCI या card network ने समय-सीमा तय की है, उनमें इतनी पहले भेजनी है कि IO को कम से कम 10 दिन मिलें; बाक़ी में शिकायत मिलने के 20 दिन के अंदर।
फ़ैसला कब तक मिलेगा?Bank को शिकायत मिलने की तारीख़ से 30 दिन के अंदर आपको आख़िरी फ़ैसला बताना है। IO हर मामले में कारण के साथ फ़ैसला दर्ज करता है।
IO ने भी bank की बात सही मानी, तो?तब bank के जवाब में साफ़ लिखा होना चाहिए कि शिकायत IO ने देखी है। Bank को आपको RBI Ombudsman के पास जाने का विकल्प, CMS portal का पता (https://cms.rbi.org.in) और RBI के Centralised Receipt and Processing Centre का पता भी बताना है। यह उन शिकायतों पर है, जो Reserve Bank – Integrated Ombudsman Scheme के दायरे में आती हैं।
क्या bank IO का फ़ैसला पलट सकता है?हाँ, पर सिर्फ़ अपने Whole Time Director या customer service के प्रभारी Executive Director की मंज़ूरी से। ऐसे हर मामले को Board की Customer Service Committee के सामने समीक्षा के लिए रखना होता है।
क्या IO मुआवज़ा दिला सकता है?IO उचित मुआवज़े की सिफ़ारिश करता है: RBI के तय मुआवज़े के हिसाब से, और जहाँ RBI ने तय न किया हो वहाँ bank की मुआवज़ा नीति से। IO इसके ऊपर Integrated Ombudsman Scheme के हिसाब से नुकसान, समय, ख़र्च और परेशानी के लिए भी मुआवज़े की सिफ़ारिश कर सकता है।
कौन-सी शिकायतें IO नहीं देखता?Bank के ऐसे घोटाले जिनसे ग्राहक पर असर न हो; सुझाव और bank के कारोबारी फ़ैसले (पर ऐसे फ़ैसलों में सेवा की कमी की शिकायत देखी जाती है); bank का अंदरूनी प्रशासन, HR और कर्मचारियों का वेतन; वे मामले जो court, consumer commission या arbitration में तय हो चुके या चल रहे हैं; और वे विवाद जिनका उपाय Credit Information Companies (Regulation) Act, 2005 की धारा 18 में है।
क्या हर bank में Internal Ombudsman होता है?ये निर्देश उन commercial banks पर हैं, जिनकी भारत में 31 मार्च 2025 को 10 या ज़्यादा banking outlets थीं (Small Finance Banks, Payments Banks और Local Area Banks इनमें नहीं गिने गए)। बाद में यह शर्त पूरी करने वाले bank पर छह महीने बाद से लागू होते हैं। Small Finance Banks, Payments Banks, NBFCs, non-bank PPI जारी करने वालों और Credit Information Companies के लिए RBI के अलग Internal Ombudsman निर्देश हैं।
NBFC में Internal Ombudsman कब होता है?RBI के NBFC वाले निर्देश उन NBFCs पर हैं, जो 31 मार्च 2025 को इनमें से कोई शर्त पूरी करती थीं: जमा लेने वाली NBFC, जिसकी 10 या ज़्यादा branches हों; या जमा न लेने वाली NBFC, जिसकी asset size ₹5,000 करोड़ या ज़्यादा हो और जो आम ग्राहकों से सीधे जुड़ती हो। बाद में शर्त पूरी करने वाली NBFC पर ये छह महीने बाद से लागू होते हैं। कुछ तरह की NBFCs, जैसे Housing Finance Companies, इनसे बाहर हैं। वहाँ भी आख़िरी फ़ैसला 30 दिन में बताना है।

जुड़े शब्द

स्रोत

  1. RBI — Reserve Bank of India (Commercial Banks - Internal Ombudsman) Directions, 2026 (RBI/CEPD/2025-26/381; CEPD.PRD.No.S1027/13.01.019/2025-26; 14 जनवरी 2026; दस्तावेज़ पर 'Updated as on' की कोई तारीख़ नहीं है), PDF ↗जारी: 14 जन 2026 · लागू: 14 जन 2026किस बात के लिए, दस्तावेज़ का कौन-सा हिस्सा
    • प्रस्तावनामक़सद: ठुकराने से पहले bank के अंदर ऊँचे स्तर पर दोबारा जाँच
    • खंड 1(2)तुरंत लागू; खंड 7(2), 14(2) और 14(4) का पालन 30 जून 2026 तक
    • खंड 3(1), (2)10 या ज़्यादा banking outlets वाले commercial banks; SFB, PB, LAB बाहर; छह महीने वाली शर्त
    • खंड 5(2)IO उसी bank या उसकी group company का कर्मचारी न रहा हो
    • खंड 8(1), (4), (6)contract पर नियुक्ति, कम से कम 3 और कुल 5 साल; बीच में हटाने पर रोक
    • खंड 12(1), (4), (5)सीधी शिकायत नहीं; मुआवज़े की सिफ़ारिश
    • खंड 4(1)(b), 13(3), (4)IO का फ़ैसला सिर्फ़ Whole Time Director / Executive Director की मंज़ूरी से पलट सकता है; ऐसे मामले Board की Customer Service Committee के सामने
    • खंड 14(1)automatic escalation; कम से कम 10 दिन या 20 दिन के अंदर
    • खंड 14(2)तीन ही नतीजे: Fully Resolved, Partially Resolved, Wholly Rejected
    • खंड 14(4)शिकायत senior स्तर पर देखी जाए, उसी branch से बंद न हो
    • खंड 14(5)IO के दायरे से बाहर की शिकायतें
    • खंड 14(8)IO शिकायत करने वाले से लिखित या मौखिक बात और काग़ज़ माँग सकता है
    • खंड 14(9), (10), (11)30 दिन में आख़िरी फ़ैसला; कारण सहित फ़ैसला; जवाब में IO के देखने का ज़िक्र
    • खंड 14(12)RBI Ombudsman का विकल्प, cms.rbi.org.in और CRPC का पता
    • खंड 14(17)IO का संपर्क सार्वजनिक नहीं
    • खंड 17(1)2023 के Master Direction की जगह
  2. RBI — Reserve Bank of India (Non-Banking Financial Companies - Internal Ombudsman) Directions, 2026 (RBI/CEPD/2025-26/384; CEPD.PRD.No.S1030/13.01.019/2025-26; 14 जनवरी 2026) ↗जारी: 14 जन 2026 · लागू: 14 जन 2026किस बात के लिए, दस्तावेज़ का कौन-सा हिस्सा
    • खंड 3(1), (2)कौन-सी NBFCs: जमा लेने वाली 10+ branches; बाक़ी ₹5,000 करोड़+ asset और आम ग्राहक; 31 मार्च 2025 की स्थिति; बाद में शर्त पूरी हो तो छह महीने बाद से
    • खंड 12(1), 14(9)सीधी शिकायत नहीं; 30 दिन में आख़िरी फ़ैसला
  3. RBI — Master Directions की सूची, 'Consumer Education and Protection' भाग (11 अक्टूबर 2026 को देखा) ↗किस बात के लिए, दस्तावेज़ का कौन-सा हिस्सा
    • 14 जनवरी 2026 की प्रविष्टियाँSFB, Payments Bank, NBFC, non-bank PPI और CIC के अलग Internal Ombudsman Directions

सुधार का इतिहास

  • पन्ना बना। RBI के Commercial Banks – Internal Ombudsman Directions, 2026 (14 जनवरी 2026) और NBFC – Internal Ombudsman Directions, 2026 (14 जनवरी 2026) से जाँचा।

पन्ना बना: 11 अक्तू 2026 · आख़िरी जाँच: 11 अक्तू 2026
यह सामान्य जानकारी है, कानूनी या वित्तीय सलाह नहीं।

यह पन्ना: https://seedhamatlab.com/shabdkosh/internal-ombudsman/ · आख़िरी जाँच: 11 अक्तू 2026
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